तीन भारतीय नाविकों की मौत पर भारत ने अमेरिका को घेरा
सैन्य कार्रवाई नई दिल्ली को स्वीकार्य नहीं: जयशंकर
-भारत ने लगातार दूसरी बार अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत को किया तलब
विशेष प्रतिनिधि
नई दिल्ली। ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत ने जिस तीखे तेवर में अमेरिका को घेरा है, उसने दोनों देशों के रिश्तों में नई बेचैनी पैदा कर दी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से सीधे बातचीत कर साफ शब्दों में कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर इस तरह की घातक सैन्य कार्रवाई किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराई जा सकती।
फिनलैंड दौरे पर मौजूद जयशंकर ने रुबियो को फोन कर भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया। यह एक स्पष्ट संदेश था कि भारतीय नागरिकों की जान जोखिम में डालने वाली कार्रवाई नई दिल्ली को कतई स्वीकार्य नहीं है। विदेश मंत्री स्तर पर हुई यह बातचीत इस बात का भी संकेत है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर कूटनीतिक और मानवीय संकट के रूप में देख रहा है।
घटना की गंभीरता इसी से समझी जा सकती है कि भारत ने लगातार दूसरी बार दिल्ली में अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय तलब किया। सामान्यतया भारत विदेशी राजनयिकों को बुलाने के लिए तलब जैसे सख्त शब्दों से बचता है लेकिन इस बार विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में साफ तौर पर कहा कि अमेरिकी नौसैनिक बलों द्वारा भारतीय नाविकों को ले जा रहे वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हमले अस्वीकार्य हैं और इन हमलों में तीन भारतीयों की ष्दुखद और टाली जा सकने वाली मौत हुई है।
दरअसल बुधवार को अमेरिकी बलों ने एमटी सेत्तेबेल्लो नामक जहाज पर हमला किया था। जहाज पर सवार 24 भारतीय नाविकों में से 21 को बचा लिया गया, लेकिन तीन भारतीय लापता हो गए थे, जिनकी बाद में मौत की पुष्टि हुई। इसके अगले ही दिन अमेरिकी बलों ने ओमान तट के पास गिनी बिसाऊ ध्वज वाले टैंकर एमटी जलवीर के इंजन कक्ष पर हेलफायर मिसाइलें दाग दीं। जहाज पर मौजूद सभी 20 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन लगातार दो दिनों में भारतीयों को निशाना बनाने वाली इन घटनाओं ने नई दिल्ली को झकझोर दिया।
भारत के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी है। एक तरफ उसे अपने नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, दूसरी तरफ अमेरिका जैसे रणनीतिक साझेदार के साथ संबंधों को भी संतुलित रखना है।




