जयपुर की कवयित्री डॉ अनुपमा वर्मा से राजीव कुमार झा की बातचीत…
आपके प्रश्न मेरे जवाब
जयपुर को राजस्थान की सांस्कृतिक और साहित्यिक राजधानी कहा जा सकता है।
-डॉ अनुपमा वर्मा
प्रश्न :आपने कई विषयों में एम.ए. की पढ़ाई की है। उच्च शिक्षा के प्रति आपके अनुराग को देखते हुए देश में उच्च शिक्षा के प्रति महिला शिक्षार्थियों की उदासीनता से जुड़े सवालों की तरफ भी ध्यान जाता है। इस बारे में आपके विचारों को जानकर खुशी होगी।
उत्तर: उच्च शिक्षा किसी भी समाज के समग्र विकास का आधार होती है। आज भारत में महिलाओं की उच्च शिक्षा में भागीदारी पहले की अपेक्षा बढ़ी है, फिर भी अनेक सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारणों से कई छात्राएँ उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी, बाल विवाह, आर्थिक निर्भरता तथा पारिवारिक जिम्मेदारियाँ इसके प्रमुख कारण हैं। मेरा मानना है कि यदि महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराई जाए तो वे न केवल आत्मनिर्भर बनेंगी, बल्कि परिवार और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगी। सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और समाज को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए जिसमें प्रत्येक महिला अपनी शिक्षा पूरी कर सके और अपनी प्रतिभा का पूर्ण विकास कर सके।
प्रश्न : देश में वोकेशनल एजुकेशन के विकास के लिए आपने काफी काम किया है। इस प्रकार के एजुकेशन के महत्व के बारे में बताइए।
उत्तर: वोकेशनल एजुकेशन अर्थात् व्यावसायिक शिक्षा का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख कौशल प्रदान करना है। वर्तमान समय में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यावहारिक दक्षता भी आवश्यक है। व्यावसायिक शिक्षा युवाओं को उद्योगों और रोजगार बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करती है। इससे बेरोजगारी कम करने, उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा आर्थिक विकास को गति देने में सहायता मिलती है। नई शिक्षा नीति 2020 ने भी व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने पर विशेष बल दिया है। मेरा मानना है कि कौशल आधारित शिक्षा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रश्न:आप कवयित्री भी हैं। अपने कविता लेखन के बारे में बताइए।
उत्तर:कविता मेरे लिए भावनाओं, अनुभवों और जीवन-दर्शन की अभिव्यक्ति का माध्यम है। मैं अपने आसपास के जीवन, प्रकृति, सामाजिक परिस्थितियों, मानवीय संबंधों तथा व्यक्तिगत अनुभवों से प्रेरणा लेकर लेखन करती हूँ। मेरी कविताओं में संवेदनशीलता, आशा, संघर्ष, प्रेम, स्त्री संघर्ष और जीवन के विविध रंगों का चित्रण देखने को मिलता है। लेखन मेरे लिए केवल साहित्यिक सृजन नहीं, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति और समाज से संवाद का माध्यम भी है।
प्रश्न :आपका कविता संग्रह ‘Shades of Life’ हिंदी में है या अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ है? इसमें आपकी किस प्रकार की कविताएँ संग्रहित हैं?
उत्तर:‘Shades of Life’ शीर्षक से ही स्पष्ट है कि यह जीवन के विविध आयामों को अभिव्यक्त करने वाला काव्य-संग्रह है। इसमें जीवन के सुख-दुःख, आशा-निराशा, मानवीय संबंधों, सामाजिक सरोकारों, प्रकृति और आत्मचिंतन से संबंधित कविताएँ संग्रहित हैं। यह संग्रह पाठकों को जीवन के विभिन्न रंगों से परिचित कराता है और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है। इसकी भाषा सरल, संवेदनशील और भावपूर्ण है, जिससे पाठक सहज रूप से जुड़ाव महसूस कर सकते हैं। शेड्स ऑफ़ लाइफ हिंदी और इंग्लिश दोनों में लिखी हुई है जिसमें कुछ कविताएं हिंदी में है और कुछ अंग्रेजी में।
प्रश्न :जयपुर के साहित्यिक माहौल के बारे में जानकारी दीजिए।
उत्तर:जयपुर को राजस्थान की सांस्कृतिक और साहित्यिक राजधानी कहा जा सकता है। यहाँ साहित्य, कला और संस्कृति की समृद्ध परंपरा रही है। जयपुर में नियमित रूप से साहित्यिक गोष्ठियाँ, काव्य-पाठ, पुस्तक विमोचन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। विशेष रूप से जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साहित्यिक पहचान प्रदान की है। हिंदी, राजस्थानी और अंग्रेजी सहित अनेक भाषाओं के साहित्यकार यहाँ सक्रिय हैं। यह वातावरण नए और स्थापित लेखकों को अपनी रचनात्मकता विकसित करने तथा साहित्यिक संवाद को समृद्ध बनाने का अवसर प्रदान करता है।
वैसे मैं बचपन से लिखती आई हूं लेकिन जब से जयपुर आई हूँ मुझे एक अलग ही पहचान मिली है इसके लिए मैं जयपुर की हार्दिक आभारी हूं।
जयपुर को राजस्थान की सांस्कृतिक और साहित्यिक राजधानी कहा जा सकता है।

