कवि, संपादक लेखक पंकज बिंदास से राजीव कुमार झा की संक्षिप्त बातचीत…

प्रश्न: आपने संस्मरण भी लिखा है। उसके बारे में बताइए?

उत्तर: अपने संस्मरण में मैंने अपनी बचपन की यादों को संजोने का प्रयास किया है। बचपन सबको सुखद लगता है, बचपन की खट्टी–मीठी यादें जीवन पर्यंतस्मरण रहती है। विद्यालय का जीवन, विद्यालयी दोस्त, शिक्षक संस्मरण में आ ही जाते हैं। लंबा गुरुजी नामक संस्मरण में एक आदर्श शिक्षक के गुण और विशेषताओं को दर्शाया गया है।

प्रश्न: आप ग़ज़ल लेखन भी करते हैं। ग़ज़लों में आपकी संवेदना और अनुभूति के बारे में जानना चाहूंगा?

उत्तर: ग़ज़ल एक सशक्त विधा है। गागर में सागर भरना हो तो ग़ज़ल बहुत अच्छी विद्या है। अपनी अधिकांश गजलों में मैंने प्रेम को अभिव्यक्ति दी है। इसके अलावा जीवन से जुड़े अनुभव, दोस्ती, धोखा, उदासी, असफलता, यह सभी विषय मेरी ग़ज़लों में दिखाई देते हैं। जीवन के केंद्र में प्रेम है। करुणा, जिसे संस्कृत–आचार्यों ने रसराज तक माना, इन दो रसों से परिपूर्ण संवेदना अपेक्षाकृत सहजता से ग़ज़ल में आ जाती है।

प्रश्न: आपने अनेक साझा संकलनों का संपादन किया है और इनमें अंतस का दीप नामक संकलन को खूब पसंद किया गया है?

उत्तर: यद्यपि मेरे अभी तक पांच साझा संकलन प्रकाशन हो चुके हैं। लेकिन मैंने अभी एक साझा संकलन अंतस् का दीप का प्रकाशन किया है। इस साझा संकलन में 62 कवियों की कविताएँ उनके जीवन–परिचय के साथ प्रकाशित की गईं हैं।

उत्तर: मैं उत्तराखंड राज्य के अंतर्गत रुद्रप्रयाग जिले के आगर गांव का मूलनिवासी हूं। मैं भगवान कार्तिकेय की नगरी से हूँ। भगवान केदारनाथ की नगरी से हूँ। जहां तक परिवार की बात करें तो परिवार में माता–पिता, हम तीन भाई, भाभी और भतीजी हैं।

प्रश्न: अपनी उच्च शिक्षा के बारे में बताइए?

उत्तर: मेरी शिक्षा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से हुई। वहीं से मैंने एम.ए. हिन्दी किया। वर्तमान में मैं हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के एसआरटी कैंपस से पीएचडी कर रहा हूं।

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