विशेष साक्षात्कार (Exclusive Interview) डॉ. नीता सिंह, आध्यात्मिक एवं शास्त्रीय संगीत गायिका
**स्वर-साधना से आत्म-साधना तक…**:

रिपोर्ट : अजित चौबे ” भारत पोस्ट “
नोएडा,(उत्तर प्रदेश), संगीत केवल सुरों और तालों का संगम नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाली एक अद्भुत साधना है। जब शास्त्रीय संगीत की गहराई आध्यात्मिक भावों से मिलती है, तो भजन केवल एक गीत नहीं रह जाता, वह प्रार्थना बन जाता है, ध्यान बन जाता है और मन की शांति का माध्यम बन जाता है।
आज हमारे साथ एक ऐसी ही आध्यात्मिक भजन गायिका और शास्त्रीय संगीत की साधिका हैं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज़ और भावपूर्ण गायन के माध्यम से संगीत को साधना का स्वरूप दिया है।
उनकी गायकी में जहाँ शास्त्रीय संगीत की परंपरा और अनुशासन दिखाई देता है, वहीं भजनों में भक्ति, समर्पण और आध्यात्मिक अनुभूति की गहरी झलक मिलती है।
आज हम उनके संगीत-सफर, गुरु-परंपरा, रियाज़, भक्ति और जीवन के उन अनुभवों को जानेंगे, जिन्होंने उनके सुरों को एक विशेष पहचान दी।
तो आइए, सुरों की इस आध्यात्मिक यात्रा पर उनके साथ चलते हैं और जानते हैं—
संगीत उनके लिए केवल कला है… या ईश्वर तक पहुँचने का एक मार्ग?
परिचय : डॉ श्रीमती नीता सिंह का जन्म वर्ष 1965 में दून घाटी अर्थात देहरादून में हुआ था । इन्होने चार साल की निविदा उम्र में भजन सुनाकर अपने माता-पिता को चौंका दिया । जिसके बाद इनकी पिता ने इनके इस कलात्मक और आध्यात्मिक प्रतिभा को आगे बढ़ाने में शुरुआती प्रेरणा दी।
बचपन से संगीत के प्रति विशेष लगाव ,गीत-संगीत डॉ नीता सिंह के लिए केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि भावनाओं को अभिव्यक्त करने और मन को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम था। धीरे-धीरे संगीत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बनता गया। रही।परिवार और गुरुजनों के प्रोत्साहन ने इनकी प्रतिभा को नई दिशा दी और इन्होंने संगीत की विधिवत शिक्षा एवं साधना शुरू की।
पंडित शंकर गौड़ पाटिल जी ने इन्हें अपना संरक्षण दिया और इस तरह इस उभरती हुई प्रतिभा के लिए एक मज़बूत नींव रखी। दस साल की उम्र में भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में इन्हें CCRT स्कॉलरशिप (भारत सरकार द्वारा प्रायोजित) के लिए चुना गया और यह स्कॉलरशिप पाँच साल तक जारी रही।
अपनी शुरुआती शिक्षा और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद डॉ नीता सिंह शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में, एडवांस्ड ट्रेनिंग के लिए भारतीय शास्त्रीय संगीत के केंद्र, बनारस पहुँचीं। वहाँ इन्होंने ख्याल गायकी में प्रचलित और अप्रचलित रागों का बारीकी से अध्ययन किया और कई भजन व ग़ज़लें तैयार कीं। उन्हें बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) ने 23 साल की बहुत कम उम्र में प्रोफेसर ऋत्विक सान्याल जी के संरक्षण में ‘डॉक्टर ऑफ़ म्यूज़िक’ की उपाधि से सम्मानित किया। डॉ नीता सिंह ने अपनी सुरीली और दमदार आवाज़ की वजह से इन्हें अपने करियर के दौरान कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फ़ेलोशिप मिलीं।
साल 1989 में इनकी शादी डॉ. अवनीश सिंह से हुई, जिन्होंने इन्हें हमेशा प्रोत्साहित और प्रेरित किया। डॉ नीता सिंह ने अपने प्रोफेशनल और पर्सनल जीवन के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाते हुए एक व्यस्त जीवन जिया। शादी के बाद डॉ. नीता सिंह अपने पति डॉ. अवनीश सिंह के साथ मुंबई चली गई , जहां पे उनकी मुलाकात शास्त्रीय संगीत के महान हस्तियों से हुई l
डॉ. नीता सिंह के शास्त्रीय संगीत की समझ ,इस बात को दर्शाता है की ,भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान गायको पंडित जसराज , भजन सम्राट अनूप जलोटा, अनुराधा पौंडवाल जैसे दिग्गजो के साथ मंच साझा किया l भारतीय संगीत के इस सफर में इनकी गायकी को फिल्म और एंटरटेमेंट के फील्ड में नामचीन कंपनी टी- सीरीज, टिप्स से इनके ऑडियो सांग रिलीज़ हुए।
साथ ही साल 2021 में अवनीत आर्ट्स के बैनर तले बानी हिंदी फीचर फिल्म में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा , इस फिल्म में इन्होने एक बहुत ही कर्णप्रिय लोरी ” बदरा के पलना , बिजुरिया की डोरी , जैसे बहुत ही मार्मिक और संवेदनशील गाने को आवाज़ दी है, इस फिल्म में इन्होने मशहूर गायक सुदेश भोसले जी के साथ होली सांग को भी गाया है। ये फिल्म समाज के सत्य घटना पे आधारित थी , और इस फिल्म के संगीत पक्ष को डॉ. नीता सिंह की आवाज़ से एक मज़बूती मिली।
डॉ. नीता सिंह के द्वारा गाये कुछ ऑडियो एल्बम: – सुर के श्याम (कृष्ण भजन) इस्कॉन, मुंबई द्वारा जारी किया गया।
मैया जी का जगराता (मां भजन) टिप्स म्यूजिक कंपनी द्वारा जारी किया गया।
साईं दे दो हमको सहारा (साईं भजन) टी-सीरीज़ द्वारा जारी किया गया।
साईं राम शिरिडी धाम (साईं भजन) टिप्स म्यूजिक कंपनी द्वारा जारी किया गया।
मुंबा चालीसा (मुंबा देवी भजन) मुंबा देवी ट्रस्ट, मुंबई द्वारा जारी किया गया ।
हरि दर्शन (निर्गुण भजन) श्री राम शरणम (राम भजन) संगीत विद्या संस्थान द्वारा जारी किया गया।
कहते है की हर स्त्री के जीवन में वो पल आता है , जिसका उसे इंतज़ार रहता है ,और वो पल होता है एक माँ के रूप में खुद को देखना , डॉक्टर नीता सिंह के जीवन में खुशियों का रंग उस समय भर गया,जब वो दो बच्चो की माँ बन गई , कहते है की माँ बनने के बाद ज़िम्मेदारियाँ भी बढ़ जाती है ,और यही वो पल था जब एक गायिका को संगीत, परिवार और ममता के बीच ला खड़ा किया।
बहुत कम ही ऐसा होता है जब किसी एक स्त्री में सुरीली आवाज़, शांत व्यक्तित्व, एक समर्पित पत्नी, एक त्यागी माँ और एक प्रेरणादायक शिक्षिका के गुण एक साथ देखने को मिलें; संक्षेप में कहें तो, वे नारीत्व की एक मिसाल हैं ।
शिक्षा बनी जीवन की दूसरी पहचान
संगीत के साथ-साथ इन्होने शिक्षा के क्षेत्र को भी अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।
व्यावसायिक शिक्षा संगीत स्नातक- संगीत विशारद (1980, अखिल भारतीय गन्धर्व महाविद्यायल, मिरज) तबला में डिप्लोमा- माध्यमा पूर्ण (1982, अखिल भारतीय गन्धर्व महाविद्यायल, मिरज) संगीत में मास्टर ऑफ़ म्यूजिक । (1984, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय-बी.एच.यू.) कला स्नातक-संस्कृत ऑनर्स। (1986, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय-बी.एच.यू.) डॉक्टर ऑफ म्यूजिक (1989, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय-बी.एच.यू.) थीसिस विषय- प्रचलित और अप्रचलित रागों का विस्तृत अध्ययन।
व्यावसायिक प्रशिक्षण ‘ख्याल का गायकी – ग्वालियर घराने के – पं. बलवंत राय भट्ट और मेवाती घराने के पं. जसराज. ‘ठुमरी और दादरा’ – पं. महादेव मिश्र एवं पं. चुन्नू लाल मिश्र.,’ रागो की गहन अलापचारी’ – डागर घराने के डॉ. ऋत्विक सान्याल द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया।
एक शिक्षिका के रूप में इन्होने विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित ज्ञान देने के बजाय उनके व्यक्तित्व और संस्कारों को विकसित करने पर भी जोर दिया।
उनका मानना रहा कि एक शिक्षक का दायित्व केवल क्लास में पढ़ाने तक सीमित नहीं होता। शिक्षक विद्यार्थियों के सपनों को दिशा देता है, उनके भीतर आत्मविश्वास पैदा करता है और उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है। यही सोच उनके शिक्षकीय जीवन की पहचान बनी।
क्लास से मंच तक का सफ़र
एक ओर क्लास में विद्यार्थियों के बीच ज्ञान बाँटना और दूसरी ओर मंच पर अपनी आवाज़ से श्रोताओं के दिलों तक पहुँचना—यह दोहरी भूमिका आसान नहीं थी। समय का संतुलन, निरंतर अभ्यास और पारिवारिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच अपनी संगीत साधना को बनाए रखना उनके लिए एक चुनौती भी था।
लेकिन इन्होने चुनौतियों को अपनी राह की रुकावट नहीं बनने दिया।
सुबह की शुरुआत हो या दिनभर की व्यस्तता, संगीत के लिए समय निकालना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा। नियमित रियाज़ ने इनकी आवाज़ को निखारा और मंचीय अनुभव ने इनके आत्मविश्वास को मजबूत किया।
संगीत बना अभिव्यक्ति का माध्यम
समय के साथ इनकी गायकी ने एक अलग पहचान बनानी शुरू की। शास्त्रीय, उपशास्त्रीय एवं सुगम संगीत जैसे विभिन्न रूपों में उनकी रुचि ने उनकी संगीत यात्रा को व्यापक बनाया।
इनकी आवाज़ में केवल सुर नहीं, बल्कि भावनाओं की गहराई भी सुनाई देती है। विशेष रूप से आध्यात्मिक और भक्ति संगीत के प्रति उनका जुड़ाव इनके गायन को एक अलग संवेदनशीलता प्रदान करता है।
इनके लिए संगीत केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि साधना है।
संघर्षों ने बनाया मजबूत
हर सफल यात्रा के पीछे कई ऐसे पड़ाव होते हैं, जिन्हें दुनिया नहीं देख पाती। व्यस्त जीवन, जिम्मेदारियाँ, समय की कमी और लगातार स्वयं को बेहतर बनाने की चुनौती—इन सबके बीच अपनी पहचान बनाए रखना आसान नहीं था।
लेकिन इन्होने एक बात हमेशा अपने जीवन में कायम रखी—सीखना कभी बंद नहीं करना।
हर मंच ने इन्हे कुछ नया सिखाया, हर विद्यार्थी ने इन्हे एक नया अनुभव दिया और हर चुनौती ने डॉ. नीता सिंह को पहले से अधिक मजबूत बनाया।
डॉ. नीता सिंह की संगीत के क्षेत्र में उपलब्धियों की बात की जाए तो इसकी एक लम्बी फेहरिस्त है-
पेशेवर उपलब्धियाँ: तीन दशकों से ज़्यादा समय से ऑल इंडिया रेडियो (AIR) और दूरदर्शन की ग्रेडेड आर्टिस्ट रही हैं। ICCR की प्रोफेशनल आर्टिस्ट के तौर पर भारत और विदेशों में परफ़ॉर्मेंस दी हैं। शास्त्रीय संगीत की 100 से ज़्यादा रचनाएँ तैयार की हैं। अलग-अलग संस्थानों में विज़िटिंग फैकल्टी (भारतीय शास्त्रीय संगीत) के तौर पर काम किया है। विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों में भारतीय शास्त्रीय संगीत (प्रैक्टिकल और थ्योरी) की परीक्षक रही हैं। 5000 से ज़्यादा उभरते हुए कलाकारों (जिनमें गायत्री अय्यर, हार्दिक साहनी, भार्गवी ठाकुर, मोबनी मजूमदार शामिल हैं) की प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाई और उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत की बारीकियाँ सिखाईं। भारत और विदेशों में 500 से ज़्यादा स्टेज परफ़ॉर्मेंस दी हैं। कई संगीत प्रतियोगिताओं में जूरी सदस्य के तौर पर काम किया है।
एक शिक्षिका, एक गायिका और एक प्रेरणा
इनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि जीवन में किसी एक पहचान तक सीमित रहना आवश्यक नहीं है। यदि लगन और इच्छाशक्ति हो, तो शिक्षा और कला दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ा जा सकता है।
एक शिक्षिका के रूप में वे आने वाली पीढ़ी को ज्ञान देती हैं और एक गायिका के रूप में श्रोताओं को भावनाओं एवं आध्यात्मिकता से जोड़ती हैं।
इनकी ये यात्रा उन महिलाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो अपने परिवार और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को कहीं पीछे छोड़ देती हैं।
सुरों की साधना अभी जारी है
आज भी उनकी यात्रा किसी मंजिल पर समाप्त नहीं हुई है। प्रत्येक नया गीत, प्रत्येक नया मंच और प्रत्येक विद्यार्थी उनके जीवन में एक नया अध्याय जोड़ता है।
डॉ नीता सिंह ने अपने इस संगीत के सफर को एक नया आयाम दिया , Dr.Neeta Singh Musical Academy Institute, Noida से संचालित कर, बच्चो में भारतीय संगीत के रंगो को भर रही है , इनका का ये कार्य भारतीय संगीत के नीव को मज़बूत करने का काम कर रही है।
उनका विश्वास है कि संगीत मन को संवेदनशील बनाता है और शिक्षा जीवन को सार्थक दिशा देती है।
शायद यही कारण है कि उनकी पहचान केवल एक गायिका या शिक्षिका के रूप में नहीं, बल्कि ऐसी व्यक्तित्व के रूप में बनती है, जिसने सुरों को साधना और ज्ञान को बाँटना—दोनों को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया।
यह सफ़र अभी जारी है…
क्योंकि सुरों की कोई अंतिम मंज़िल नहीं होती और शिक्षा की कोई अंतिम सीमा नहीं।




