*दिलशाद अंसारी की मौत का सच आए सामने, विधायक अभिषेक रंजन ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
_रमेश ठाकुर – रामनगर पश्चिम चंपारण, बिहार_ चनपटिया, पश्चिम चंपारण। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के चनपटिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत अवरेया गांव निवासी 25 वर्षीय दिलशाद अंसारी की पुलिस हिरासत में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए चनपटिया विधायक अभिषेक रंजन ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
विधायक द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र के अनुसार, दिलशाद अंसारी की 12 अक्टूबर 2026 की सुबह पुलिस हिरासत में मौत हुई। पुलिस की ओर से दावा किया जा रहा है कि दिलशाद चलती गाड़ी से कूद गया था। हालांकि, घटना की परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विधायक ने पत्र के माध्यम से कहा है कि मामले की वास्तविक सच्चाई सामने लाने और जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
*स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग*
विधायक अभिषेक रंजन ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल हो सके। उन्होंने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज करने और जांच के आधार पर दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग भी की है।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत होना गंभीर मामला है। ऐसी परिस्थितियों में घटना की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाना और दोषियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
*पीड़ित परिवार को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने का आग्रह*
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में विधायक ने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान करने तथा परिजनों और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए मामले की जांच की जानी चाहिए, ताकि किसी भी महत्वपूर्ण तथ्य की अनदेखी न हो।
विधायक ने मुख्यमंत्री से मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप करने और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए और कानून के प्रति आम जनता का विश्वास कायम रहना चाहिए।
*पुलिस की कार्यशैली पर भी उठ रहे सवाल*
इस घटना ने पुलिस हिरासत में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसकर्मियों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि किसी हिरासत में लिए गए व्यक्ति की मौत होती है, तो यह जांच का विषय है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई या नहीं।
साथ ही, पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण, सतर्कता और जिम्मेदारियों के निर्वहन पर भी गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है। हालांकि, मामले में किसी भी पुलिसकर्मी की भूमिका और घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री और संबंधित प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। निष्पक्ष जांच, साक्ष्यों का संरक्षण और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में समयबद्ध कार्रवाई इस पूरे प्रकरण में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।




