पश्चिमी चंपारण में सिविल सर्जन कार्यालय के समक्ष खड़ी की गई गाड़ियाँ,निजी कंपनी पर शोषण और मनमानी का लगाया आरोप!

 

_रमेश ठाकुर_
बेतिया। बिहार राज्य ऐम्बुलेंस कर्मचारी संघ के आह्वान पर पश्चिमी चंपारण जिले के सभी ग्रेडों के अस्पतालों में कार्यरत ऐम्बुलेंस ड्राइवर और ईएमटी (आपातकालीन चिकित्सकीय तकनीशियन) गुरुवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। अचानक हुई इस हड़ताल से जिले की स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने की कगार पर पहुँच गई हैं। मरीजों को अस्पताल आने-जाने और आपातकालीन परिस्थितियों में गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

संघ के जिला अध्यक्ष सुनील राम ने सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में आयोजित धरना को संबोधित करते हुए कहा कि इस भयंकर महंगाई में ऐम्बुलेंस कर्मचारियों को मात्र ₹11,500 मासिक वेतन मिलता है, जबकि ड्यूटी समय 12 घंटे से अधिक का होता है। उन्होंने कहा कि जीवन बचाने का काम करने वाले कर्मियों के अपने परिवार के लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। “पैसे के अभाव में कर्मचारियों के परिजन इलाज नहीं करा पाते, बच्चों की पढ़ाई अधूरी रह जाती है और कई बार तो परिवार के लिए रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाता है।”

निजी कंपनी पर मनमानी और तानाशाही का आरोप

सुनील राम ने आगे कहा कि जब तक ऐम्बुलेंस संचालन जिला स्वास्थ्य समिति के अधीन था, तब तक ऐसी समस्याएँ सामने नहीं आती थीं। लेकिन जबसे संचालन की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को दी गई है, तब से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। गाड़ी खराब होने पर कर्मचारियों की मजदूरी तक काट ली जाती है। सेवा निवृत्ति की उम्र सीमा अन्य विभागों में बढ़ाई जा रही है, लेकिन ऐम्बुलेंस कर्मचारियों के लिए इसे 60 से घटाकर 58 कर दिया गया है। साथ ही झूठे आरोप लगाकर कर्मचारियों को प्रताड़ित भी किया जाता है।

एटक के जिला प्रभारी ओमप्रकाश ने कहा कि कंपनी खुलेआम सरकार के न्यूनतम मजदूरी कानून का उल्लंघन कर रही है और श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि नौकरी में स्थायित्व का कोई भरोसा नहीं है और कर्मचारियों से हर संभव तरीके से शोषण किया जा रहा है।

न्यूनतम मजदूरी की गारंटी और स्थायी दर्जा देने की मांग

संघ ने 19 अगस्त को ही राज्य स्वास्थ्य समिति को लिखित रूप से चेतावनी दे दी थी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो हड़ताल होगी। लेकिन समय पर कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण कर्मचारी हड़ताल करने को मजबूर हुए। कर्मचारियों का कहना है कि न्यूनतम मजदूरी के हिसाब से प्रत्येक ऐम्बुलेंस कर्मचारी को कम से कम ₹19,000 मासिक वेतन मिलना चाहिए, लेकिन इसके बजाय मात्र ₹11,500 दिया जा रहा है। यह श्रम कानून का सीधा उल्लंघन है।

धरना के पहले दिन जिले की सभी ऐम्बुलेंस गाड़ियाँ जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय में खड़ी कर दी गईं। कर्मचारियों ने कार्यालय के सामने नारेबाजी करते हुए कहा कि “कर्मचारियों को स्थायी दर्जा दो”, “न्यूनतम मजदूरी की गारंटी करो” और “सेवा निवृत्ति आयु सीमा 60 करो”।

धरना का नेतृत्व आदर्श मणि, संजीत सिन्हा, संदीप यादव सहित कई नेताओं ने किया। इस दौरान कृष्णानंद ठाकुर, रितुराज, चंद्र मोहन सिंह, संजय प्रसाद, आजाद आलम, शाहिद अली, नौसाद आलम, रोहित कुमार समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित थे।

वार्ता नहीं हुई तो उग्र होगा आंदोलन

कर्मचारियों ने कहा कि राज्य स्वास्थ्य समिति को अविलंब कंपनी और संघ के प्रतिनिधियों के साथ त्रिपक्षीय वार्ता करनी चाहिए। साथ ही कंपनी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सरकार और समिति द्वारा भुगतान की गई राशि का कर्मचारियों को कितना हिस्सा मिलता है।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो अन्य मजदूर संगठन भी उनके समर्थन में सड़क पर उतरेंगे। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि चुनावी वर्ष में सरकार सभी विभागों में वेतन और मानदेय बढ़ा रही है, लेकिन ऐम्बुलेंस कर्मचारियों को निजी कंपनी के भरोसे छोड़ दिया गया है, जबकि वे भी सरकार का ही काम करते हैं।

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