बड़हिया के कालेज घाट पर रात में स्नान करना असुरक्षित है!
लोकचिंतन !
राजीव कुमार झा
लखीसराय के बड़हिया में कालेज घाट पर गंगा मैया का मंदिर कब बनेगा यह कहना काफी मुश्किल है। लेकिन यहां लखीसराय जिला प्रशासन ने घाट तो बनवा दिया है लेकिन एक मंदिर का निर्माण भी जरूरी है। बड़हिया में इस साल भी गंगा नदी में डूबने से लोगों की मौत हो रही है। पिछले दिनों शत्रुघ्न साव की अंत्येष्टि में पुलिस यहां सुरक्षा में मुस्तैद रही लेकिन यह सुविधा पुलिस अधिकारी सबको प्रदान नहीं कर सकते हैं इसलिए यहां एक पुलिस चौकी स्थापित कर दी जाए। अपराधियों ने रुपए पैसे के लिए हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। हमारे समाज में एक ही शहर एक ही गांव एक ही इलाके में अपने जान पहचान के लोगों के साथ रुपए पैसे के चक्कर में ऐसे कृत्य निंदनीय हैं। आखिर लोग इस धंधे में क्यों आते हैं? वे भागे – भागे फिरते हैं। नृशंसता क्रूरता के कामों से ही उनको सुख शांति और इज्जत प्रतिष्ठा महसूस होती है। बड़हिया के अलावा बिहार और देश के तमाम शहरों के बाजारों में काफी तादाद में ऐसे तत्व सक्रिय हैं। बड़हिया में शत्रुघ्न साव के परिजन उनकी अंत्येष्टि में पुलिस के बिना घाट पर जाने में हिचकिचा क्यों रहे थे? हरेक हिन्दू को यह अधिकार है । सारे हिन्दुओं और सारे भारतीयों को यह अधिकार है।हमारे समाज में लोग भय और दहशत फैलाते हैं। वे किसी की जान के रक्षक और भक्षक बन जाते हैं। इन दोनों ही प्रकार की बातों को मैं फिजूल मानता हूं। किसी को खासकर हिन्दुओं को श्मशान ले जाना ही पड़ता है और मरने के बाद पोस्टमार्टम डाक्टर और पुलिस तफ्तीश का चक्कर भी विशेष परिस्थितियों में हो जाता है। कालेज घाट के आसपास में इस साल भी गर्मी के मौसम में लोगों ने दिन – दिन भर नदी से ट्रैक्टर पर बालू भरवाया और अब नहाते वक्त लोगों के पैर नदी के गड्ढों में चले जाएंगे। बड़हिया पुलिस को कालेज घाट पर अपनी एक सुरक्षा चौकी बनानी चाहिए। बालू उठाव में संलग्न लोगों के अलावा अपराधियों पर भी नकेल कसने में इस चौकी पर मौजूद पुलिसकर्मी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यहां अपराधी रात में हत्या वगैरह करने के बाद नहाने भी आते हैं। बड़हिया के लोग सोच रहे हैं कि मरीन ड्राइव बनने से अब उनके घर में सिपाही और दारोगा की तैयारी में जुटे युवा सुबह में वहां दौड़ने जाएंगे और गंगा में नहाकर ही आएंगे। लखीसराय पुलिस को एक मोटरबोट भी बड़हिया के कालेज घाट पर सदैव रखना चाहिए।


