दीपावली : कानपुर के कई इलाकों में पुलिस की मिलीभगत से सजीं जुएं की फड़ें

दीपावली के अलावा भी कई थाना क्षेत्रों में खुलेआम कराया जाता है जुआं। बदले में थानेदार की होती है प्रतिमाह लाखों की कमाई

 

सुनील बाजपेई
कानपुर। प्रदेश के इस अतिसंवेदनशील जिले में दीपावली के त्यौहार को सकुशल तरीके से संपन्न कराने के लिए यहां की पुलिस अपराधी अराजक तत्वों के खिलाफ पूरी तरह से सतर्क है।
इस दौरान जुआ खेलने वाले या फिर शराब पीकर हुड़दंग करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई भी की जा रही है।वहीं आउटर पुलिस की भी सतर्कता महाराजपुर ,बिल्लौर, सचेंडी, बिधनू ,सचेंडी नरवल, चौबेपुर ,शिवराजपुर घाटमपुर सजेती आज थाना क्षेत्रों में भी नजर आई।
कुल मिलाकर दीपावली के इस पावन पर्व को सकुशल का पूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए अधिकारियों की ओर से सभी पुलिस कर्मियों को आवश्यक आदेश निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं।, जिसके फलस्वरूप दीपावली के त्यौहार को सफल और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस दौरान अधिकारियों ने किसी भी तरह की लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों को उनके विरुद्ध भी कार्रवाई किए जाने की चेतावनी भी दी।
दूसरी विभागीय सूत्रों का दावा यह भी है कि कई थाना क्षेत्रों में पुलिस की मिलीभगत से लाखों के जुआंड़ खानों का भी संचालन किया जा रहा है। मतलब पुलिस ही पैसे लेकर जमा करवा रही है।
यद्यपि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है हर साल यहां दीपावली पर इसी तरह से जुए की फड़ पुलिस की मिलीभगत से ही लगभग हर थाना क्षेत्र में सजाई जाती है। और और इनमें से अधिकांश जुआंड खानों को पकड़ा तभी जाता है । जब संबंधित इलाके के थानेदार को अपनी कुर्सी खतरे में पड़ती दिखाई पड़ती है। वरना ना केवल दीपावली बल्कि पूरे साल जुआ घरों का संचालन पुलिस की ही मिलीभगत से होता रहता है | सूत्रों की माने तो अपने इलाके में जुआं करवाने के बदले हर थानेदार को प्रतिमाह लाखों की कमाई होती है।

दीपावली पर विशेष – – –

: : गरीबों की मांग : :

दीप मालिके वापस जाओ।
दीप मालिके वापस जाओ।।

स्वागत कैसे करुं तुम्हारा।
स्वागत का कुछ नहीं सहारा॥
या पहले ”साधन ”दिलवाओ,
दीप मालिके वापस जाओ।
दीप मालिके वापस जाओ।

पहले ही संताप बहुत है।
हर ”अभाव” का ताप बहुत है ॥
कैसे इसका करुं समापन,
हो हिम्मत सहाय बन जाओ।
दीप मालिके वापस जाओ।
दीप मालिके वापस जाओ।

जब भी तुम वापस आती हो,
वे खुश,मुझको गम लाती हो।
हालातों को कब तक झेलूं,
कोई तो अब राह बताओ।

दीप मालिके वापस जाओ।
दीप मालिके वापस जाओ।।

इच्छाओं का सागर गहरा,
उस पर भी अभाव का पहरा।
प्रभु कहने का साहस दिलवाओ।

दीप मालिके वापस जाओ।
दीप मालिके वापस जाओ।।

– सुनील बाजपेई
(कवि ,गीतकार ,लेखक एवं
वरिष्ठ पत्रकार),
कानपुर
उत्तर प्रदेश।
7985473020
9839040294

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