अनंत कुमार सिंह की गिरफ्तारी

बिहार विधानसभा चुनाव 2025:

 

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मोकामा टाल हिंसा : सूरजभान सिंह से
पूछताछ में पुलिस को अहम सुराग
शायद मिल सकता हैं ?

राजीव कुमार झा

यह अच्छा है कि पुलिस ने मोकामा टाल हिंसा में जिसमें दुलारचंद यादव की मृत्यु हो गई थी उसमें अनंत कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है क्योंकि अनंत कुमार सिंह पर एफआईआर दर्ज होने के बाद उनकी गिरफ्तारी नहीं होने से विरोधी पक्ष के लोग सरकार पर कई तरह के जिसमें पक्षपात की बात भी शामिल है ,इसके आरोप लगा रहे थे।

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सूत्रों की बात पर अगर हम यकीन करें तो मोकामा टाल हिंसा की घटना यहां विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों की आपसी रंजिश और एक दूसरे पक्ष के प्रति उनके अनुचित व्यवहार का परिणाम मानी जा सकती है। चुनाव प्रचार के दौरान जन सुराज और राजद उम्मीदवारों के समर्थकों के द्वारा अनंत कुमार सिंह के चुनाव प्रचार में संलग्न गाड़ियों पर रोड़ेबाजी की गयी थी और फिर दुलारचंद यादव और जन सुराज उम्मीदवार प्रियदर्शी प्रियेश से जदयू उम्मीदवार अनंत कुमार सिंह और उनके समर्थकों की कहासुनी और लड़ाई हुई थी। पुलिस ने घटनास्थल से बाद में दुलारचंद यादव का शव बरामद किया था।

पुलिस ने अनंत कुमार सिंह की गिरफ्तारी से पहले उनके चुनाव प्रचार अभियान में शामिल गाड़ियों पर रोड़ेबाजी करने वाले तत्वों को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस की निष्पक्षता पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए और यह जरूरी है कि इस विवाद को दोनों पक्ष के लोग अब भुलाकर नये सिरे से मोकामा टाल क्षेत्र में शांति स्थापना में अपना योगदान देकर विधानसभा चुनाव को यहां सफल बनाकर बिहार में आगामी सरकार के गठन में योगदान दें।

बिहार जातिवाद की बुराई और समाज – राजनीति में इसके परिलक्षित होने वाले दुष्परिणामों को झेलता रहने वाला एक पिछड़ा राज्य है और दुलारचंद यादव लालू प्रसाद के कार्य काल में टाल क्षेत्र से उभरकर आने वाले पिछड़े तबके के नेता थे। अनंत कुमार सिंह से उनका पुराना टकराव था और वीणा देवी के इधर मोकामा में राजद उम्मीदवार बनने से उनके पति सूरजभान सिंह के साथ दुलारचंद यादव की नजदीकियां बढ़ गई थीं।‌अनंत कुमार सिंह ने आरोप लगाया है कि टाल क्षेत्र में पत्थर और रोड़ों से उनके चुनाव काफिले में शामिल गाड़ियों पर सूरजभान सिंह ने साजिश करके हमला करवाया था जिसके बाद दुलारचंद यादव की जान चली गई। इस बारे में सूरजभान सिंह से पूछताछ में पुलिस को अहम सुराग मिल सकते हैं। यह भी पता चला है कि घटना के समय दुलारचंद यादव सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी के चुनाव प्रचार में पड़ोस के बसावनचक गांव जा रहे थे।

सूरजभान सिंह पर पहले से मुकदमा चल रहा है और लालू प्रसाद की तरह से वह भी जमानत पर रिहा हैं।
मोकामा टाल में विगत दिनों में उनकी विवादास्पद भूमिका को देखते हुए पुलिस को उनके जमानत को रद्द करने की अर्जी न्यायालय में दाखिल करना चाहिए ताकि मोकामा में संघर्षरत वर्चस्वशाली गुटों पर नियंत्रण कायम किया जा सके।

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