लोक आस्था के महापर्व के तीसरे दिन दिया जाएगा डूबते सूर्य को अर्घ्य
अजित प्रसाद / सिलीगुड़ी: चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व चैती छठ पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। दूसरे दिन यानी खरना का अनुष्ठान विधि-विधान से संपन्न हो चुका है और अब आज छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण दिन है संध्या अर्घ्य। इस दिन व्रती महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु की कामना करती हैं। इस बार विशेष बात यह है कि आज के दिन रोहिणी नक्षत्र और प्रीति योग का अद्भुत संयोग भी बन रहा है, जो इस पूजा के महत्व को और अधिक बढ़ा रहा है। आइए जानते हैं संध्या अर्घ्य का समय, पूजा विधि और जरूरी नियमों के बारे में।छठ महापर्व में भगवान सूर्य की पूजा की जाती है और उनसे पूरे परिवार, संतान के लिए सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की जाती है. छठ महापर्व षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, इसलिए देवी के छठे स्वरूप जिनकी पूजा संतान रक्षा के लिए की जाती है उनकी पूजा भी छठी मैया के रूप में होती है. बच्चों के जन्म के बाद भी छठे दिन इसी देवी छठी मैया की पूजा होती है.। क्या छठ महापर्व बिना पंडित या पुजारी के होता है संपन्न?: छठ महापर्व की खासियत में यह बात सबसे अहम है कि इस पूजा के लिए किसी पंडित या पुजारी की जरूरत नहीं होती है. छठ में व्रत करने वाला व्रती, पूरी शुद्धता के साथ व्रत की शुरुआत करता है और भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना करता है।व्रती कोई भी हो सकता है. स्त्री, पुरुष, विवाहित, अविवाहित या फिर विधवा या विधुर. व्रत में काफी सरलता है, किसी कठिन मंत्र की जरूरत नहीं है. बस आप अपनी इच्छा से भगवान के सामने समर्पण करें और उनसे विनती करें।अपने शब्दों में अपनी शुद्ध भावना के साथ. पूजा में किसी कर्मकांड की जरूरत नहीं है. कुछ दीये जलते हैं, अगरबत्तियां जलाई जाती है और कुछ फूल चढ़ाए जाते हैं अगर उपलब्ध हो तो. आटा-गुड़ से बना टेकुआ और कोई भी मौसमी फल भगवान को अर्पित किया जाता है. यह सब कुछ व्रती खुद करता है उसे पुजारी की जरूरत नहीं होती है. हां,लेकिन परिवार और पड़ोसी इस पूजा में सहभागी होते हैं। खरना के साथ शुरू हुआ निर्जला उपवास से शुरू व्रत: चार दिवसीय इस महापर्व के दूसरे दिन यानी सोमवार को व्रतियों ने खरना का अनुष्ठान पूरा किया. शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रतियों का 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास शुरू हो गया है, जो बुधवार सुबह सूर्योदय के बाद पारण के साथ संपन्न होगा।संध्या अर्घ्य: शुभ मुहूर्त (24 मार्च 2026) आज चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि है. आज शाम को अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा.
विशेष संयोग: आज पूजा के समय रोहिणी नक्षत्र और प्रीति योग विद्यमान रहेगा, जिसे ज्योतिष शास्त्र में बेहद कल्याणकारी माना गया है।पूजा की विधि और सामग्री
प्रमुख प्रसाद: गेहूं के आटे और गुड़ से बना पारंपरिक ठेकुआ, चावल के लड्डू (लडुवा), और पूरी। फल एवं सब्जियां: नींबू, केला, सिंघाड़ा, गन्ना, सुथनी, शकरकंद और मौसमी फल।
अन्य सामग्री: नारियल, अगरबत्ती, मिट्टी का दीपक, सिंदूर और अक्षत। विधि: व्रती पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य की ओर मुख करते हैं. सूप में सभी पूजन सामग्री सजाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और छठी मैया के गीत गाकर संतान की लंबी आयु व सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।।छठ पूजा के जरूरी नियम : स्वच्छता का महत्व: छठ पूजा में सफाई का सबसे अधिक महत्व है. प्रसाद बनाने वाली जगह से लेकर बर्तनों तक, सब कुछ बिल्कुल नया या पूरी तरह शुद्ध होना चाहिए। सात्विक आहार: व्रत के दौरान घर में लहसुन और प्याज का उपयोग पूरी तरह वर्जित रहता है।बिस्तर पर नहीं सोते हैं: उपवास के दौरान व्रती जमीन पर कंबल या चटाई बिछाकर सोते हैं।वाणी पर संयम: इस दौरान व्रती को शांत रहकर छठी मैया का ध्यान करना चाहिए और किसी के प्रति कटु वचन नहीं बोलने चाहिए। कल होगा महापर्व का समापन
कल यानी 25 मार्च को चैत्र शुक्ल सप्तमी के दिन उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाएगा. इसके बाद व्रती कच्चे दूध और प्रसाद के साथ अपना व्रत खोलेंगे, जिसके साथ ही इस चार दिवसीय अनुष्ठान का समापन होगा।



