पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता

रिपोर्ट : विनय चतुर्वेदी (स्पेशल क्रॉसपोंडेंट)/ अजित चौबे

पाकिस्तान और सऊदी अरब के पुराने द्विपक्षीय संबंध हैं. अब दोनों देशों ने एक नया परस्पर सुरक्षा समझौता किया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने हाल के सालों में अरब देशों से संबंध मज़बूत किए हैं. माना जा रहा है कि पाकिस्तान का सऊदी के साथ समझौता अरब क्षेत्र में उसे और प्रासंगिक बना सकता है.
भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में हमेशा तनाव रहा है और हाल के सालों में भारत ने मध्य पूर्व में अपने संबंध और प्रभाव मज़बूत किया था.
पाकिस्तान एक सैन्य शक्ति लेकिन संघर्ष करती अर्थव्यवस्था है. वहीं सऊदी अरब आर्थिक रूप से ताक़तवर लेकिन सैन्य रूप से कमज़ोर है. सऊदी अरब और पाकिस्तान दोनों ही सुन्नी बहुल देश हैं और दोनों देशों के मज़बूत ऐतिहासिक संबंध रहे हैं.

सऊदी ने कई बार आर्थिक संकट के समय पाकिस्तान की मदद की है और पाकिस्तान भी बदले में सऊदी को सुरक्षा सहयोग का भरोसा देता रहा है. इस समझौते की सबसे अहम बात यह है कि अगर दोनों में से किसी भी देश पर हमला होता है तो उसे दूसरा देश भी ऐसे हमले को ख़ुद पर हमला मानेगा.

यानी अब अगर पाकिस्तान या सऊदी अरब पर कोई हमला होता है तो इसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा. दोनों देशों की थल, वायु और नौ सेनाएं अब और अधिक सहयोग करेंगी और ख़ुफ़िया जानकारियां साझा करेंगी. अब भारत सरकार और सेना इस समझौते को किस नजरीये से देखते हैं.

पाकिस्तान एक परमाणु संपन्न देश है ऐसे में इसे खाड़ी में सऊदी अरब के लिए सुरक्षा सहयोग का भरोसा भी माना जा रहा है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने इस समझौते के बाद कहा, “हमारे भाईचारे के रिश्ते ऐतिहासिक मोड़ पर हैं, हम दुश्मनों के ख़िलाफ़ एकजुट हैं.” पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक़्क़ानी ने इस समझौते पर टिप्पणी करते हुए एक्स पर कहा, “पाकिस्तान सऊदी से मिले पैसे से अमेरिकी हथियार ख़रीद पाएगा.”

वहीं पाकिस्तान की राजनयिक मलीहा लोधी ने इस समझौते के बाद कहा, “इससे अन्य अरब देशों के लिए भी दरवाज़े खुल गए हैं.” विश्लेषक मानते हैं कि अब भारत को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ एकतरफ़ा कार्रवाई करने से पहले यह सोचना पड़ेगा कि कहीं सऊदी अरब खुलकर तो पाकिस्तान के साथ नहीं आएगा.
पाकिस्तान-सऊदी अरब रक्षा समझौते को भारत के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है। इस समझौते के अनुसार, किसी भी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। प्रोफ़ेसर मुक़्तदर ख़ान कहते हैं, “भारत को अब यह सोचना होगा कि अगर वह पाकिस्तान पर हमला करेगा तो कहीं सऊदी सीधे तौर पर पाकिस्तान के साथ तो नहीं खड़ा होगा. अब भारत सरकार को इस समझौते को किस नजरीये से देखना पड़ेगा ये सोचना पड़ेगा।

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