राहुल गांधी जी का पटना कार्यक्रम रद्द होना बिहार कांग्रेस की संगठनात्मक विफलता का प्रमाण

 

पटना : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के सर्वमान्य नेता श्री राहुल गांधी जी का 15 जुलाई को पटना में प्रस्तावित कार्यक्रम रद्द हो जाना अत्यंत दुखद एवं शर्मनाक है। बताया जा रहा है कि समय पर आवश्यक तैयारियाँ पूरी नहीं हो पाने के कारण यह निर्णय लिया गया। स्वयं बिहार कांग्रेस के प्रभारी श्री कृष्णा अल्लावरू ने इसकी जानकारी जिलाध्यक्षों को दी है।
यह बातें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सदस्य आनन्द माधव, पूर्व विधायक छत्रपति यादव, नागेंद्र पासवान ‘विकल’, तथा बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजकुमार राजन, वसी अख्तर, प्रद्युम्न यादव, रमेश सिंह, पूर्व जिला अध्यक्ष शौकत अली, हरेंद्र सिंह एवं विधूशेखर पांडेय ने संयुक्त बयान जारी कर कही है।
नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी जी ऐसे जननेता हैं, जिनकी एक झलक पाने और उन्हें सुनने के लिए बिना किसी विशेष तैयारी के भी हजारों लोग स्वतः उमड़ पड़ते हैं। ऐसे लोकप्रिय नेता का कार्यक्रम केवल संगठनात्मक तैयारियों के अभाव में रद्द हो जाना बिहार कांग्रेस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इससे न केवल लाखों कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावनाएँ आहत हुई हैं, बल्कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के सामने भी संगठन की कमजोरी उजागर हुई है।
उन्होंने कहा कि बिहार कांग्रेस के वर्तमान प्रभारी एवं प्रदेश अध्यक्ष को यह समझना होगा कि राजनीति केवल लैपटॉप पर आँकड़े प्रस्तुत करने से नहीं चलती, यह लिफापेबाजी है।जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने, उनकी ऊर्जा का सम्मान करने और संगठन को सक्रिय रखने से चलती है। यदि तैयारी के अभाव में राष्ट्रीय नेता का कार्यक्रम रद्द हो जाए, तो यह संगठनात्मक नेतृत्व की गंभीर विफलता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कार्यक्रम रद्द होने के पीछे बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की आचार संहिता को कारण बताया जाता है, तो यह तर्क भी तथ्यात्मक रूप से कमजोर है, क्योंकि चुनाव के दौरान भी राजनीतिक दलों के शीर्ष नेता निर्धारित नियमों के अनुरूप सभाएँ और जनसंपर्क कार्यक्रम करते रहे हैं।
संयुक्त बयान में आरोप लगाया गया कि वर्तमान में बिहार कांग्रेस का ध्यान संगठन को मजबूत करने के बजाय दिखावटी गतिविधियों और आंतरिक व्यवस्थाओं तक सीमित हो गया है। समर्पित एवं जमीनी कांग्रेस कार्यकर्ता स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो संगठन और अधिक कमजोर होगा।
नेताओं ने कहा कि कांग्रेस केवल कुछ चाटुकारों या धनपशुओं के भरोसे नहीं चल सकती। पार्टी की वास्तविक शक्ति उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं। यदि उन्हें सम्मान और भागीदारी नहीं मिलेगी, तो संगठन को नुकसान होना स्वाभाविक है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से आग्रह किया कि पूरे प्रकरण का गंभीर संज्ञान लेते हुए संगठनात्मक जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

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