बांग्लादेशी और रोहिंग्या की उलटी गिनती शुरू
-घुसपैठ के वित्तीय नेटवर्क पर ईडी का कसा शिकंजा
-तीन दिवसीय दौरे की शुरुआत कर केंद्रीय गृह मंत्री ने दिया संकेत
भारत पोस्ट संवाददाता
सिलिगुड़ी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पश्चिम बंगाल दौरा ऐसे समय शुरू हो रहा है जब भारत.बांग्लादेश सीमा से जुड़ी सुरक्षा, बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस अपने चरम पर है। सिलिगुड़ी के रणनीतिक जुमागाछ बॉर्डर आउटपोस्ट से अपने तीन दिवसीय दौरे की शुरुआत कर केंद्रीय गृह मंत्री ने साफ संकेत दिया है कि सीमा सुरक्षा अब केवल चौकसी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आधुनिक तकनीक, खुफिया तंत्र और सख्त कार्रवाई के जरिए हर अवैध घुसपैठि, और उसके पूरे नेटवर्क पर प्रहार किया जाएगा। संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि जो भी बांग्लादेशी या रोहिंग्या अवैध रूप से भारत में घुसकर फर्जी पहचान बनाकर बसने की कोशिश करेगा, उसके लिए अब भारत में कोई जगह नहीं है।
उल्लेखनीय है कि अमित शाह के दौरे का सबसे अहम पड़ाव सिलिगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ है, जिसे देश की सामरिक जीवनरेखा माना जाता है। महज 20.22 किलोमीटर चौड़ा यह गलियारा पूरे पूर्वोत्तर भारत को मुख्य भूमि से जोड़ता है। इसके एक ओर बांग्लादेश, दूसरी ओर नेपाल, ऊपर भूटान और निकट ही चीन का प्रभाव क्षेत्र होने के कारण यह इलाका राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। केंद्रीय गृह मंत्री यहां बीएसएफ जवानों से मुलाकात करेंगे, सीमा चौकियों का निरीक्षण करेंगे और स्मार्ट फेंसिंग, एंटी.ड्रोन सिस्टम, आधुनिक निगरानी तकनीक तथा बेहतर बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में नई परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर सीमा प्रबंधन को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाना चाहती है।
उधर, सीमा सुरक्षा की यह सख्ती अब जमीन पर भी दिखाई देने लगी है। हरियाणा के गुरुग्राम में पुलिस ने एक महीने पहले अलग.अलग निर्माण स्थलों पर छापेमारी कर 13 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया था। दस्तावेजों की जांच में उनके भारत में अवैध रूप से रहने की पुष्टि होने के बाद गुरुवार को उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच नई दिल्ली से मालदा टाउन एक्सप्रेस के जरिए पश्चिम बंगाल भेज दिया गया, जहां से उन्हें सीमा सुरक्षा बल और अन्य एजेंसियों को सौंपकर बांग्लादेश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस अभियान के लिए 23 पुलिसकर्मियों की विशेष एस्कॉर्ट टीम तैनात की गई। पकड़े गए अधिकांश लोग गुरुग्राम में मजदूर के रूप में काम कर रहे थे और किराये के मकानों में रह रहे थे।
गुरुग्राम पुलिस की कार्रवाई केवल 13 लोगों तक सीमित नहीं है। पूरे शहर में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। कॉलोनियों, झुग्गी बस्तियों, लेबर कॉलोनियों, औद्योगिक क्षेत्रों और किराये के मकानों में रह रहे 1200 से अधिक संदिग्ध लोगों के दस्तावेजों की जांच जारी है। जिन राज्यों के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं, वहां के जिला प्रशासन से सत्यापन कराया जा रहा है। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कोई संदिग्ध किरायेदार, घरेलू सहायक, होटल कर्मचारी, निर्माण मजदूर या अन्य विदेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहा हो तो तुरंत डायल.112 या नजदीकी थाने में सूचना दें। यह अभियान बताता है कि अब केवल सीमा पर ही नहीं बल्कि देश के भीतर भी अवैध नेटवर्क को तोड़ने की रणनीति अपनाई जा रही है।
हरियाणा के बाद कर्नाटक के मंगलुरु में भी इसी तरह की कार्रवाई सामने आई है। यहां पुलिस ने दो अलग.अलग निर्माण स्थलों से 11 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय ; को उनकी रिपोर्ट भेजी जा रही है ताकि उन्हें हिरासत में लेकर निर्वासित किया जा सके। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि पश्चिम बंगाल से इन लोगों को काम दिलाने वाले बिचौलिये के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इससे स्पष्ट है कि जांच अब केवल घुसपैठियों तक सीमित नहीं बल्कि उन्हें रोजगार दिलाने और देशभर में बसाने वाले पूरे नेटवर्क तक पहुंच रही है।
इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय ;ईडी ने भी अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठ के वित्तीय नेटवर्क पर बड़ा शिकंजा कस दिया है। ईडी ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल के 13 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी का दावा है कि कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट, जिन्हें विदेशी अंशदान ; के तहत धन प्राप्त होता था, कथित तौर पर विदेशी फंड का इस्तेमाल अवैध घुसपैठियों को भारत में बसाने के लिए कर रहे थे। जांच में यह भी सामने आया कि हवाला, म्यूल अकाउंट और कई परतों वाले बैंक लेन.देन के जरिए छोटी.छोटी रकम जैसे 6 हजार, 8 हजार और 10 हजार रुपये, घुसपैठियों तक पहुंचाई जाती थी ताकि वे भारत में आर्थिक रूप से स्थापित हो सकें।
ईडी की जांच के अनुसार यह संगठित गिरोह केवल लोगों को सीमा पार कराने तक सीमित नहीं था। उनके लिए फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट और अन्य भारतीय पहचान पत्र तैयार कराए जाते थे। इसके बाद उन्हें अलग.अलग राज्यों में रोजगार दिलाया जाता था और कुछ मामलों में ई.रिक्शा, नकद सहायता तथा अन्य आर्थिक साधन उपलब्ध कराकर स्थायी रूप से बसाने की कोशिश की जाती थी। यह खुलासा राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की उस आशंका को मजबूत करता है कि अवैध घुसपैठ अब केवल सीमा का मुद्दा नहीं बल्कि फर्जी दस्तावेज, हवाला, मानव तस्करी और संगठित अपराध से जुड़ा एक बड़ा नेटवर्क बन चुका है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच संयुक्त राष्ट्र की एक चिंताजनक रिपोर्ट भी सामने आई है। म्यांमार के रखाइन प्रांत से निकली दो नौकाओं के डूबने की आशंका जताई गई है, जिनमें 500 से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी सवार थे। इनमें कई लोग बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों से भी बताए जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के अनुसार दोनों नौकाएं खराब समुद्री परिस्थितियों के बीच लापता हो गईं और बड़ी संख्या में लोगों की मौत की आशंका है। यह त्रासदी एक ओर रोहिंग्या समुदाय की मानवीय पीड़ा को दर्शाती है, तो दूसरी ओर यह भी याद दिलाती है कि अवैध और असुरक्षित प्रवासन मानव तस्करी तथा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।



