त्रेता युग के ऐतिहासिक मंदिर और गुरुकुल का जीर्णोधार कराये जाने की मांग
*ब्यूरो चीफ बाराबंकी*
बाराबंकी । जनपद के नगरपंचायत सतरिख में वंदन योजना से लाभान्वित करायें जाने के उद्वेश्य से तत्कालीन जिला अधिकारी सतेन्द्र कुमार ने अधिकारियों कर्मचारियों के साथ सप्त ऋषि आश्रम/सतरिख/का भ्रमण कर योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना से त्रेता युग के ऐतिहासिक मंदिर और गुरुकुल का जीर्णोधार कराये जाने का प्रस्ताव शासन को भेजे जाने का आश्वासन दिया था।लेकिन कई माह बीत जाने के बावजूद भी अभी तक वशिष्ठ मुनि का प्रिय यह आश्रम आज भी योगी सरकार की विशिष्ट योजना से फलीभूति होने के इन्तजार में टक टकी लगाये निहार रहा है।जिसके चलते क्षेत्र के जागरुक जनों ने तेज तर्रार एंव न्याय प्रिय जिलाधिकारी शंशाक त्रिपाठी से सप्त ऋषि आश्रम के प्रति विशेष गौर फरमाये जाने की मांग की है।मालूम हो कि तुलसी कृत श्री राम चरित मानस की यह चौपाई गुरु गृह पढन गये रघुराई अल्प काल विद्मा सब पाई जिस स्थान से जुड़ी है वह स्थान बाराहवन परिवर्तित नाम बाराबंकी जिले सतरिख नगर पंचायत के पास सप्त ऋषि आश्रम के नाम से जाना जाता है।लेखो के मुताबिक भगवान श्री राम चन्द्र ने यहां वशिष्ठ मुनि के सानिध्य में रहकर चारों भाइयों के साथ शस्त्र और शास्त्र की प्रारम्भिक शिक्षा ग्रहण की थी।वशिष्ट मुनि के इस आश्रम मे रह कर सप्त ऋषियों ने कठोर तपस्या की थी।अयोध्या के राज वंश में बताया जाता है कि इस आश्रम और गुरुकुल की बड़ी मान्यता थी।जिसके समीप ऋषि मानवा नाम की नदी बहती थी जिसे हम सब रेठ नदी के नाम से जानते हैं।सप्त ऋषि उदासीन आश्रम के महन्त नानक शरण दास बताते हैं कि मुगल शासन काल में इस आश्रम और गुरुकुल को ध्वस्त कर दिया गया था।महन्त जी का कहना था कि लेख के मुताविक ई सा के पहले 1027 में महमूद गजनवी के बहनोई सैयद शाहू ने अपने पुत्र सालार मसूद के साथ आक्रमण किया था।ध्वस्त करने के समय श्री संत महन्त ने उनके सेनापति को पहली बार भागने पर मजबूर कर दिया था।यहां पर बात इतनी ही नहीं है एक हाथी को पटक कर उसके दांत तोड़ दिये थे।उस हाथी का एक दांत आज भी मौजूद है।यहां पर देवरहा माता जी का स्थान भी है सभी ऋषि गण और शिक्षार्थी मानवा नदी/रेठ/ में स्नान कर पूजा किया करते थे।सप्त ऋषि आश्रम का ही परिवर्तित नाम सतरिख बताया जाता है।आश्रम के नाम पर आज भी करीब दस एकड़ भूमि है।यहां पर प्राचीन शिवलिंग भी है जो लोगों की आस्था केन्द्र है।खैर यह सब तो मात्र बानगी भर है यहां के तमाम किस्से जागरुक जनों में आज भी लोगों की जुबान पर है।

