श्री राम मंदिर में दान की कथित चोरी वाराणसी की सुरक्षा एजेंसी से जुड़े तार

-हाउसकीपिंग स्टाफ से कराई जा रही थी नोटों की गिनती

भारत पोस्ट संवाददाता
अयोध्या। अयोध्या के भव्य श्री राम मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित चोरी के मामले में चल रही जांच में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आया है। जांचकर्ताओं को इस पूरे मामले का एक श्वाराणसी कनेक्शन मिला है। इस खुलासे के बाद अब जांच का दायरा केवल एक मामूली चोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जांच एजेंसियां अब मंदिर के दान प्रबंधनए आउटसोर्सिंग सिस्टम, बैंकिंग प्रक्रियाओं और सुरक्षा कर्मियों की भर्ती में हुई गंभीर चूक की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से छह वाराणसी स्थित एक निजी सुरक्षा फर्म, सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के पेरोल पर थे।
सूत्रों ने बताया कि एजेंसी ने अयोध्या में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की न्यू घाट शाखा को कर्मचारी उपलब्ध कराए थे। बैंक ने कथित तौर पर कैश गिनने के काम में मदद के लिए 19 कर्मचारियों की मांग की थी। वाराणसी स्थित एजेंसी ने कर्मचारियों की भर्ती  में तैनात किया, जिसके बाद उन्हें राम मंदिर में प्राप्त दान को गिनने और संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई। जांचकर्ताओं को संदेह है कि ये कर्मचारी कथित तौर पर दो मुख्य आरोपियों, अनिल मिश्रा और टिन्नू यादव के करीबी सहयोगी थे।
जांच के अनुसारए एजेंसी ने भर्ती किए गए सभी 19 कर्मचारियों को तैनाती के लिए  टीम को सौंप दिया। बाद में इन कर्मचारियों को दान गिनने और मंदिर के कैश कलेक्शन को संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई। कथित तौर पर प्रत्येक कर्मचारी को लगभग 20,000 रुपये का मासिक वेतन दिया जाता था। हालांकि, जांच से पता चला है कि इन कर्मचारियों को मूल रूप से हाउसकीपिंग के काम के लिए भर्ती किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें दान के कैश को गिनने और प्रबंधित करने की अत्यंत संवेदनशील जिम्मेदारी सौंप दी गई।
सूत्रों ने बताया कि राम मंदिर का दैनिक दान और चढ़ावा अयोध्या में तुलसी नगर शाखा में जमा किया जाता था। बैंक ने कैश को गिनने, छांटने और सुरक्षित रूप से ले जाने के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने के लिए वाराणसी स्थित आउटसोर्सिंग एजेंसी को काम पर रखा था। जांचकर्ता अब यह जांच कर रहे हैं कि क्या भर्ती प्रक्रिया में उचित पारदर्शिता बरती गई थी और क्या आउटसोर्स किए गए कर्मचारियों को सौंपी गई जिम्मेदारियां उचित थीं। सूत्रों का यह भी दावा है कि कुछ नियुक्तियां पारदर्शी चयन प्रक्रिया के बजाय सिफारिशों के आधार पर की गई हो सकती हैं।
सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के मालिक गौरव सिंह ने अपनी कंपनी और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बीच किसी भी सीधे संबंध से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि कंपनी का समझौता केवल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ था। सिंह के अनुसार, कर्मचारियों को सिर्फ़ हाउसकीपिंग के काम के लिए रखा गया था और एजेंसी को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उन्हें राम मंदिर परिसर के अंदर क्या काम सौंपे गए हैं।
जांच से यह भी पता चला है कि मंदिर ट्रस्ट ने इस साल जनवरी में ही दान इकट्ठा करने में गड़बड़ी का पता लगा लिया था। रेगुलर मंथली ऑडिट के दौरान, चार्टर्ड अकाउंटेंट ने देखा कि मंदिर में आने वाले लोगों की संख्या में कोई कमी न होने के बावजूद दान की रकम में अचानक गिरावट आई है। ऑडिट में वाउचर और रसीद के बीच भी अंतर पाया गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 5 लाख रुपये से ज़्यादा के खर्च का सही हिसाब.किताब नहीं मिल सका। इन बातों को देखते हुए, ट्रस्ट ने कथित तौर पर जनरल सेक्रेटरी चंपत राय को एक लेटर और मैसेज भेजकर कई सुधारात्मक उपाय करने की सलाह दी।

 

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