गजल
चली है जो तीरे नजर धीरे-धीरे
हुआ दिल तो छलनी मगर धीरे-धीरे ।।
तेरे प्यार का दिल में अब बनके शोला
भड़कने लगा है शरर धीरे-धीरे ।।
शरारत से उसकी चली है। ये जादू
हुआ मुझपे लेकिन असर धीरे-धीरे।।
निगाहों की बिजली ना चमके ना कड़के
जलाती है कल्बो जिगर धीरे-धीरे।।
पिलाई है मुझको नवाज उसने जीभर
नशा मुझ पे छाया मगर धीरे-धीरे ।।
नवाज (अररियावी)
शाहनवाज आलम 9470494344




