उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर की लेखिका रंजना पाण्डेय ‘मुक्ता’ से राजीव कुमार झा की बातचीत

साहित्य: साक्षात्कार

 

प्रश्न: आपको मंचों पर भी कविता पाठ के लिए आमंत्रित किया जाता है। आपने मंच पर अपनी कविताओं को प्रस्तुत करते हुए क्या महसूस किया?

उत्तर: मंचों पर कविता पाठ करना अपने आप में बहुत गर्व और सम्मान की बात है, और आज के समय में समाज में विशेष स्थान बनाने के लिए हमें साहित्य के क्षेत्र में मंचों पर काव्य पाठ की आवश्यकता होती है,वो ऑनलाइन काव्य पाठ हो या ऑफ लाइन हो।
निश्चय ही आत्मिक शांति और सूकून मिलता है। मंचों पर कविता को पढ़ना ही नहीं अपितु श्रोताओं को पसंद आए इसका भी विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।

प्रश्न: आपने जौनपुर में अपनी स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है। पूर्वांचल विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई-लिखाई से जुड़े अनुभवों को साझा कीजिए।

उत्तर: जी , मैंने जौनपुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के दौरान ही मेरा विवाह हो गया।
उस समय में इतने पढ़ाई के साधन नहीं हुआ करते थे,पर फिर भी अपने पहले के पीढ़ियों के अपेक्षाकृत अधिक सुविधाएं थीं। को-एड विद्यालय होने के कारण भी कभी कोई परेशानी नहीं होती थी क्योंकि घर में हमेशा से लड़के लड़कियों में भेद की भावना ही नहीं रही, इसलिए सामान्य रूप से ही बात चीत होती थी।
यहां मैं एक बात और बताना चाहूंगी कि मैं स्नातक करने के बाद ससुराल चली आई पर लगता कम से कम परस्नातक होना चाहिए और यह विचार मैंने अपने पतिदेव के सामने व्यक्त किया उन्होंने मुझे 16 वर्ष बाद परस्नातक करवाया।

प्रश्न:आपने प्रिय कवियों और लेखकों के बारे में बताएं।

उत्तर: हमारे प्रिय लेखक हैं मुंशी प्रेमचंद जी आप उनकी रचनाओं को पढ़िए तो ऐसा लगता है कि चलचित्र की तरह सामने चल रहा हो,एक बात और कि ऐसा लगता है जैसे उन्होंने उस परिस्थिति को जिया हो ऐसा सटिक लिखते थे। और कवयित्री महादेवी वर्मा जी की रचनाएं पढ़िए सरल भाषा और प्रकृति प्रेम पर आधारित कविताएं होती थीं। और भी बहुत से रचनाकार और कवि-कवयित्रियां है जो एक से बढ़कर एक हैं।

प्रश्न:पूर्वांचल की लोक-संस्कृति और इसकी समृद्ध विरासत के बारे में जानकारी दीजिए।

उत्तर: पूर्वांचल क्षेत्र शुरू से ही शैक्षिक तौर पर आध्यात्मिक तौर पर और व्यवसायिक तौर पर बहुत ही समृद्ध रहा है, मिर्जापुर हमेशा से पीतल के बर्तनों के लिए प्रसिद्ध रहा, यहां की लोकगीत कजरी विश्व प्रसिद्ध रही और यहां कजरी के साथ ही दंगल का भी आयोजन किया जाता था क्योंकि पुराने समय में यही मनोरंजन के साधन हुआ करते थे।
प्रयागराज और काशी के मध्य होने के कारण इसका धार्मिक महत्व भी बहुत है, मां विंध्यवासिनी देवी का मंदिर है, और विजयगढ़ किला भी इसी क्षेत्र में है, जिसे चंद्रकांता सीरियल में चुनारगढ़ किला के साथ दिखाया गया था।
पूर्वांचल हमेशा से कृषि समृद्ध रहा है, यहां बारहो महिने कुछ न कुछ बोआ जाता रहता है। यह बहुत ही धार्मिक और सांस्कृतिक एवं साहित्यिक क्षेत्र है।

प्रश्न:कविता लेखन के अलावा अपनी अन्य प्रकार की अभिरुचि के बारे में बताइए।

उत्तर: कविता लेखन के अलावा मुझे लघुकथा लिखने में भी रुचि है, मैं आज भी हिंदी साहित्य से जुड़ी चीजों को सीखती रहतीं हुं,इसके अलावा मुझे पुराने गाने सुनना बहुत पसंद हैं। और रसोई के कामों में भी मुझे विशेष रुचि है।

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