इंडिया मेडटेक एक्सपो 2025’ सफलतापूर्वक सम्पन्न फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने दोहराई प्रतिबद्धता– भारत को मेडटेक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अग्रसर

 

नई दिल्ली, 7 सितम्बर 2025: भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत फार्मास्यूटिकल्स विभाग (DoP) ने कहा है कि देश तेजी से मेडिकल डिवाइस उत्पादन और निर्यात में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। विभाग के सचिव अमित अग्रवाल ने ‘इंडिया मेडटेक एक्सपो 2025’ के समापन अवसर पर कहा कि भारत ने पिछले पाँच वर्षों में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।

उन्होंने बताया कि मेडिकल डिवाइस का घरेलू आवश्यकताओं में हिस्सा 10% से बढ़कर 30% हो गया है, जबकि उच्च स्तरीय उत्पादों में यह हिस्सा अब 20% तक पहुँच चुका है। इस अवधि में भारत का निर्यात भी 4 अरब डॉलर से अधिक तक बढ़ा है।

श्री अग्रवाल ने कहा, “दो वर्ष पहले जब हमने पहला मेडटेक एक्सपो आयोजित किया था तब विदेशी प्रतिभागियों ने क्लास A और B नॉन-इनवेसिव मेडिकल डिवाइस में रुचि दिखाई थी। इस बार 30 देशों से आए हजारों विदेशी प्रतिनिधियों ने क्लास C एडवांस इनवेसिव उत्पादों में गहरी रुचि दिखाई। भारत इन उत्पादों को 10 से 40 प्रतिशत सस्ते दाम पर बना रहा है और इनसे निर्यात में तेजी से बढ़ोतरी की संभावना है।”

एक्सपो के अंतिम दिन आयोजित सत्र ‘Meeting with Global Regulators: Shaping a Future-ready MedTech Regulatory Ecosystem’ की अध्यक्षता करते हुए, राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की सदस्य सचिव सुश्री साई अहलादिनी पांडा ने कहा कि भारत में जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है और इसके लिए गुणवत्तापूर्ण मेडिकल डिवाइस आवश्यक हैं। इसके लिए क्लिनिकल एवं अन्य प्रकार के डाटा की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार करना जरूरी है।

फार्मास्यूटिकल्स विभाग की आर्थिक सलाहकार सुश्री गायत्री नायर ने कहा कि विभाग क्षमता निर्माण के लिए शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म कोर्स चला रहा है। प्रशिक्षित संसाधन उपलब्ध होने के बाद उद्योग को और मजबूती मिलेगी।

CDSCO के डिप्टी ड्रग कंट्रोलर श्री असीम साहू ने कहा कि नियामक प्रणाली में सुधार के चलते भारत में मेडिकल डिवाइस निर्माताओं की संख्या पाँच वर्षों में 400 से बढ़कर 4000 हो गई है।

इस अवसर पर अल्जीरिया के प्रो. सलाह देर्राजी ने कहा कि उनका देश केवल 2% मेडिकल डिवाइस खुद बनाता है और भारतीय कंपनियों के लिए वहाँ विशाल अवसर मौजूद हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच नियामक सामंजस्य की आवश्यकता पर बल दिया।

वहीं, फार्मास्यूटिकल्स विभाग के निदेशक हितेंद्र साहू ने कहा, “भारत फिलहाल वैश्विक मेडिकल डिवाइस मांग का केवल 2% निर्यात करता है। हमें गुणवत्ता मानकों को और ऊँचा करना होगा ताकि निर्यात को कई गुना बढ़ाया जा सके।”

यह एक्सपो फार्मास्यूटिकल्स विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, EPCMD और CDSCO द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। तीन दिवसीय आयोजन (4-6 सितम्बर 2025) भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में हुआ, जिसमें 500 से अधिक घरेलू कंपनियाँ, स्टार्ट-अप्स, MSMEs, राज्य सरकारें और 30 देशों से आए 150 अंतरराष्ट्रीय खरीदार शामिल हुए।

‘India: Global MedTech Manufacturing Hub – Precision Engineering yet Affordable’ थीम पर आधारित इस आयोजन को AIMED, ADMI, MTAI, AMTZ, AMCHAM, APACMED, ADVAMED, APMEI, ASSOCHAM, CII, FICCI, INVEST INDIA, PHDCCI, NATHEALTH, USIBC, USISPF सहित अनेक प्रमुख उद्योग संगठनों का समर्थन मिला।

गौरतलब है कि एक्सपो ने भारत की बढ़ती क्षमताओं और सटीक किंतु किफायती मेडटेक समाधान देने की क्षमता को दुनिया के सामने पेश किया। यह आयोजन भारत को मेडिकल टेक्नोलॉजी और डिवाइस क्षेत्र में एक वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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