भारत के दो रत्न: सुभाष और गांधी का किया गया लोकार्पण

तरुण सांस्कृतिक चेतना समिति, बेगूसराय के बैनर तले राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन आयोजित

 

नन्दकिशोर दास

बेगूसराय ब्यूरो। नवोदय विद्यालय समस्तीपुर की शिक्षिका एवं रूपसवाज बछबाड़ा की बेटी आचार्य अर्चना चौधरी अर्पण के नव प्रकाशित काव्य भारत के दो रत्न सुभाष एवं गांधी का भव्य लोकार्पण तेघड़ा के डीपीएस स्कूल परिसर में तरुण सांस्कृतिक चेतना समिति, बेगूसराय के बैनर तले रविवार को राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन में किया गया। मुख्य अतिथि पूर्व डीएसपी सह भाजपा नेता सुनील कुंवर, तमिलनाडु से पधारे प्रख्यात कवि एवं गीतकार ईश्वर करुण , डॉ. सचिदानंद पाठक, डीपीएस स्कूल के निदेशक राजीव कुमार, आयोजन समिति के संस्थापक सह संरक्षक सीताराम शेरपुरी, आनंद जायसवाल ,
हास्य-व्यंग्य के मशहूर कवि मिन्टू कुमार झा, प्रो सत्यसंध भरतद्वाज , कवि श्रीराम राय, मशहूर गजलकार राजेन्द्र राजन ,रंजना लता , कवि सौरभ वाचस्पति , हरिशंकर राय एवं अरबिंद कुमार चौधरी के कर कमलों द्वारा किया गया ।
उक्त काव्य ग्रंथ को कवयित्री अर्चना ने अपनी स्व. मां सरस्वती देवी एवं स्व. पिता जयदेव को समर्पित किया । इस पुस्तक में नेताजी सुभाष चंद्र बोस एवं महात्मा गाँधी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को काव्य रुप दिया गया है । सम्पूर्ण काव्य देशभक्ति एवं राष्ट्रीयता की भावना से ओत – प्रोत है । कवयित्री ने अपने सम्बोधन में क्रांति और शांति दोनों को मानवता एवम राष्ट्र के विकास के लिए आवश्यक बताया । अपनी साहित्य एवं कर्तव्य यात्रा की उत्कृष्टता का श्रेय अपने माता -पिता,भाई एवं पति अरविंद कुमार चौधरी एवं अपने बच्चों को दिया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्धि कवि सीताराम शेरपुरी एवं मंच संचालन नेहा राज ने किया। कवि सम्मेलन में दूर-दूर से आए कवियों ने अपने जादुई अंदाज में हास्य कविता प्रस्तुत कर लोगों को खूब लोटपोट किया। कभी जिंदगी के अनछुए पहलुओं को उजागर किया, तो कभी जिंदगी की सच्चाई को प्रस्तुत किया। कविता सुनकर लोग कभी जोर-जोर से ठहाके लगाते तो कभी उनके आंखों से खुशी के आंसू भी निकलते देखे गये। बिहार एवं देश के विभिन्न हिस्सों से आए मशहूर कवियों ने श्रोताओं को खूब रिझाया, गुदगुदाया और ठहाके लगवाये। वीर रस, हास्य, व्यंग्य, ओज और श्रृंगार के जाने माने कवियों ने अपने अपने अंदाज में ऐसी काव्य सरिता बहाई कि श्रोताओं ने खूब डुबकियां लगायी। देश और राज्यों की राजनीति पर ऐसे ऐसे बाण छोड़े की श्रोता हंस-हंस कर लोटपोट हो गए ।

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