सीपी अखिल के खिलाफ साजिश में जुटे माफिया अखिलेश के प्रभावशाली सहयोगी

 

सुनील बाजपेई
कानपुर। ना केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश के और भी प्रांतों में चर्चा का विषय कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका से जुड़े लोगों की वजह से देश के एकमात्र पहले बहुत प्रभावशाली सफेदपोश अखिलेश दुबे और उनके गिरोह के खिलाफ लगातार मिल रही पीड़ितों की शिकायतों पर सभी आवश्यक कारवाइयां लगातार जारी हैं।
याद रहे कि भारत का यह पहला ऐसा खतरनाक चालाक गिरोह है , जिसने अपनी सफलता का आधार एन केन प्रकारेण सिपाहियों से लेकर पीपीएस और आई पी एस अधिकारियों ,पत्रकारों ,नेताओं और वकीलों के सहयोग को बना रखा था और उनके सहयोग से ही विष कन्याओं के माध्यम से लोगों के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर ब्लैकमेलिंग जमीनों, मकानों और भूखंडों पर जबरन कब्जे जैसा अपना हर इरादा पूरा कर रहा था।
अब बात कानपुर की पुलिस कमिश्नर के रूप में सरगना अखिलेश दुबे और उसके गिरोह का भंडाफोड़ करने वाले वरिष्ठ आईपीएस अखिल कुमार की। जिनकी अथाह निडरता, जिनकी ईमानदारी और जिनकी कर्तव्य के प्रति प्रगाढ़ निष्ठा ही अखिलेश गिरोह का भंडाफोड़ करने का कारण बनी। इस हिसाब से जुझारू अखिल कुमार अखिलेश, अवनीश और वकील दीनू उपाध्याय जैसे शातिर गिरोह का भंडाफोड़ करने वाले देश के पहले आईपीएस है ,जिसके लिए उन्हें सदैव याद रखा जाएगा। इसमें सबसे महत्वपूर्ण अखिलेश दुबे गिरोह ,क्योंकि देश में अखिलेश जैसा ऐसा गिरोह पहली बार ही प्रकाश में आया है ,जिसमें लोकतंत्र के चारों खंभे पुलिस ,पत्रकार ,वकील और नेता भी शामिल है। इसीलिए सरगना अखिलेश को जेल भेजना और उसके गिरोह का भंडाफोड़ करना आदमखोर शेर की माद में हाथ डालने से भी ज्यादा खतरनाक था। केवल वही नहीं,
उसके साथ और भी कई आदमखोर। वह भी साधारण नहीं। असाधारण। सरगना अखिलेश से लाभ उठाने के मामले में केवल भ्रष्ट नहीं महाभ्रष्ट, जिनकी अखिल कुमार के खिलाफ साजिशें भी बदले के इरादे से लगातार जारी बताई जातीं है। जिसमें मुख्य भूमिका उन पुलिस अधिकारियों की होने का दावा सूत्रों ने किया है , जिनके महा भ्रष्ट स्वार्थी चेहरे भी अखिलेश गिरोह के साथ बेनकाब हुए हैं। मतलब बदला लेने के इरादे से यह सभी कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन शायद उन्हें यह नहीं पता कि जिन्हें परमेश्वर अपना माध्यम बनाता है। अखिलेश जैसा उनका बाल बांका कभी नहीं कर पाता है। क्योंकि जब अखिलेश, अवनीश या दीनू जैसे किसी के भी पाप का घड़ा भर जाता है ,तो उसे फोड़ने के लिए खुद परमेश्वर ही योगी आदित्यनाथ और आईपीएस अखिल कुमार बन जाता है। वही परमेश्वर इसके लिए क्रम बद्ध रास्ता भी बनाता है। जिसका एस एस पी की जगह पुलिस कमिश्नरेट के गठन से भी नाता है। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो क्या कोई एस एस पी पदधारक ऐसा कर पाता ?
इसी क्रम में जब उचित समय आया, तभी कानपुर ने अखिल कुमार के रूप में एक तरह से परमेश्वर को ही पाया। इसकी पुष्टि रामचरितमानस में जब जब होइ धरम कै हानी, बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी। तब तब धरि प्रभु विविध शरीरा, हरहिं दयानिधि सज्जन पीरा।” और श्रीमद्भगवद्गीता में भी “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत” लिख कर भी की गई है।
चूंकि जनहित के मामले में हर दृष्टिकोण से संपूर्ण यानी अखिल निडरता, अखिल ईमानदारी , अखिल कर्तव्यनिष्ठा , अखिल पीड़ित हित ,अखिल परोपकार और सहायता का ईश्वर ,अल्लाह और गॉड से ही नाता है। यही वजह है कि हर संभव कोशिश के बाद भी आई पी एस अखिल को कोई खरीद या डरा नहीं पाता है। और उन्हीं की निडरता पूर्ण विशुद्ध ईमानदारी का शक्ति चक्र अखिलेश जैसे देश व्यापी गिरोह के असम्भव जैसे चक्रव्यूह का भेदन सम्भव कर दिखाता है।
एक और बात के लिए भी आईपीएस अखिल कुमार की विशुद्ध ईमानदारी सराहना की सीमाएं तोड़ने वाली है ,जिसका संबंध पुलिस थानों की नीलामी से है। मतलब काफी अरसे बाद आईपीएस अखिल कुमार के रूप में ऐसा ईमानदार पुलिस अधिकारी मिला, जिसने रिश्वत के बल पर थानों के चार्ज हासिल करने
के हर इरादे पर पानी फेर दिया। जबकि पूर्व में बहुत से ऐसे भी कई भ्रष्ट आईपीएस अधिकारी रहे जो पुलिस थानों की नीलामी के बदले लाखों करोड़ों रुपया पैदा कर ले जाने में भी सफल रहे। इसके लिए उन्होंने अपना मुख्य माध्यम इसी अखिलेश दुबे को बना रखा था।
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संरक्षण में निर्भीकता और ईमानदारी की सीमाएं तोड़ने वाले आईपीएस अखिल कुमार के आलावा कोई और प्रभावशाली सफेद पोस माफिया अखिलेश दुबे का असली चेहरा बेनकाब ही नहीं कर सकता था। मतलब योगी आदित्यनाथ जैसा मुख्यमंत्री नहीं होता और अखिल कुमार जैसा निर्भीक और ईमानदार आईपीएस नहीं होता तो फिर अखिलेश दुबे जैसे गिरोह का भंडाफोड़ कभी नहीं होता।

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