संस्मरण: सिनेमा के पर्दे पर मनोज कुमार की यादें

क्रांति! क्रांति! कसम हमें है इस मिट्टी की गोद में इसकी सो जाएंगे।

 

राजीव कुमार झा

सिनेमा के ज्यादातर पुराने अभिनेता गुजर गये हैं और अब उनकी कमी अक्सर महसूस होती है। मनोज कुमार की पहली फिल्म ज्वार-भाटा मैंने सहरसा के अशोक सिनेमा हॉल में देखा और उस यहां समय जिला स्कूल में पढ़ता था और सिनेमा देखने के लिए पैसे भी नहीं रहते थे लेकिन पिता जी के कारण अशोक जी जो मालिक थे वह सिनेमा देखने के लिए फर्स्ट क्लास का गेट पास बनवा दिया करते थे। ज्वार भाटा के गीत मुझे पसंद आये। प्रेम प्रधान यह फिल्म सादगी से परिपूर्ण थी शायद पता नहीं क्यों हमलोगों के लिए सिनेमा एक कौतूहल की तरह से उस समय हो गया था और बाहर की दुनिया की असंख्य रंग बिरंगी चीजों को पर्दे पर देखा करते थे। ज्वार भाटा में बेहद सहज दृश्यों का दृश्य क्रम और जीवन संघर्ष के साथ सांसारिक यथार्थ का भावपूर्ण चित्रण इस फिल्म को अविस्मरणीय बनाती है। नयी फिल्म के प्रदर्शन के साथ हम अशोक सिनेमा हॉल जरूर पधारा करते थे। अशोक सिनेमा हॉल में प्रकाश झा की फिल्म हिप हिप हुर्रे के अलावा सिकंदरे आजम फिल्म भी मैंने देखी। मनोज कुमार की क्रांति प्रशांत सिनेमा हॉल में प्रदर्शित हुई और उस समय जिंदगी की न टूटे लड़ी प्यार करले घड़ी दो घड़ी हमलोग रेडियो पर खूब सुनते थे। चना जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार गीत पटना से पाटलिपुत्र एक्सप्रेस से लौटने समय कोई हाकर आज भी ट्रेन में मुझे गाता दिखाई देता है लेकिन इस फिल्म के इस गीत पर हेमामालिनी की अदाकारी सबको याद आएगी। इस फिल्म में देश की खातिर काम आएंगे गीत सबको प्रेरणा प्रदान करता रहेगा।

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