हमारे देश के यशस्वी नेता:अटल बिहारी वाजपेयी
पुण्य स्मरण:
अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर उनको याद करना देश और विशेषकर भारतीय लोकतंत्र के उस स्वर्णिम इतिहास को विहंगम दृष्टि से अवलोकन करने के समान होगा जिसमें इस देश का इतिहास और इसकी इसकी शासन व्यवस्था
अपने नये रचनात्मक आयामों को उद्घाटित करती दिखाई देती है।
सारी दुनिया इस बात को जानती है कि अटल बिहारी वाजपेयी के सशक्त नेतृत्व में ही भारत में सशक्त विपक्ष के रूप में भारतीय जनता पार्टी का अभ्युदय हुआ और 2019 में उनके नेतृत्व में जो केन्द्र सरकार भारत मे गठित हुई उसको पहली बार अपना कार्यकाल पूरा करने का मौका मिला। इसके बाद हमारे देश में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का समुचित विकास होता दिखाई देता है और फिर कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार के पतन के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यहां केन्द्र में सशक्त सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ।
इस प्रकार भारतीय लोकतंत्र के प्रति अटल बिहारी वाजपेयी की देन को युगांतरकारी कहा जा सकता है। अटल बिहारी वाजपेयी अत्यंत उदार विचारों के राजनेता थे लेकिन राष्ट्रहित के मुद्दे पर उन्होंने कभी कोई समझौता नहीं किया और जब वह देश के प्रधानमंत्री पद पर आसीन थे तब उस वक्त बिहार में राष्ट्रीय जनता दल की सरकार के प्रमुख के तौर पर लालू प्रसाद के नेतृत्व में यहां सर्वत्र काफी लूट खसोट का माहौल कायम हो गया था। अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के प्रधानमंत्री के तौर पर लोकसभा में इस मुद्दे को उठाया था और बिहार में तत्कालीन राबड़ी देवी सरकार को उन्होंने बर्खास्त भी कर दिया था लेकिन कांग्रेस के सहयोग से राबड़ी देवी फिर से मुख्यमंत्री बनने में सफल हो गयी थीं लेकिन वह निराश नहीं हुए थे और 2005 में बिहार में लालू प्रसाद के शासन और सरकार का बिहार में पतन हो गया।
प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी पाकिस्तान के साथ रिश्तों को सुधारने के लिए लाहौर की मैत्री और शांति यात्रा पर रवाना हुए लेकिन पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और आगरा में तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री मुशर्रफ ने जब उनसे आमने-सामने की बातचीत में कश्मीर के मुद्दे को उठाना चाहा और कश्मीर के आतंकवादी अलगाववादी आंदोलन का समर्थन किया तो वह काफी क्षुब्ध और निराश हो उठे थे और उन्होंने मुशर्रफ के साथ अपनी बातचीत को वहीं रोक दिया था। सबको याद होगा कि जनरल मुशर्रफ आधी रात में पाकिस्तान लौट गये थे। दरअसल अटल बिहारी वाजपेयी पाकिस्तान के साथ कश्मीर के मुद्दे पर एक सहमति कायम करना चाहते थे लेकिन इसके लिए पाकिस्तान के भीतर उन्होंने सदैव मौकापरस्ती की क़ायम रहने वाली प्रवृत्तियों पर गौर किया और पाकिस्तान को लेकर वह उदासीनता होते चले गए।
अटल बिहारी वाजपेयी का
राजनेता के रूप में सारे देश में आदर सम्मान था और सभी दलों के नेता उनका सम्मान करते थे। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी भी उनका काफी सम्मान किया करते थे। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर उनको गुरु जी कहकर संबोधित करते थे। देश की राजनीति में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अभ्युदय भी अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में ही हुआ और नीतीश कुमार उनके मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की देखरेख का उत्तर दायित्व वहन करते रहे।
महान नेता को उनकी पुण्यतिथि पर शत-शत नमन!




