पहाड़ी शिक्षक भर्ती मामला: 313 शिक्षकों की नौकरी रद्द करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, मिली बड़ी राहत

शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार मामले में आज कोलकाता हाईकोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच की डिवीजन बेंच ने तीन महीने के लगाई रोक।

 

अजित प्रसाद, विशेष संवाददाता जलपाईगुड़ी (पश्चिम बंगाल ):पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों (GTA) में शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार मामले में आज एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ आया है। कोलकाता हाईकोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच की डिवीजन बेंच ने ३१३ शिक्षकों की नौकरी रद्द करने के सिंगल बेंच के फैसले पर तीन महीने के लिए अंतरिम रोक (Stay Order) लगा दी है। इस फैसले से उन शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी सेवाएं तत्काल समाप्त करने का आदेश दिया गया था।

पिछले सप्ताह, न्यायमूर्ति विश्वजीत बसु की सिंगल बेंच ने जीटीए (Gorkhaland Territorial Administration) के तहत नियुक्त ३१३ ‘स्वयंसेवक’ (Volunteer) शिक्षकों के नियमितीकरण को अवैध घोषित किया था। कोर्ट ने कहा था कि ये नियुक्तियाँ बिना किसी उचित अधिसूचना और नियमों की अनदेखी कर की गई थीं। साथ ही, शिक्षकों का वेतन तत्काल रोकने और मामले की सीआईडी (CID) जांच जारी रखने का निर्देश दिया गया था।सिंगल बेंच के इस कड़े फैसले को जीटीए और प्रभावित शिक्षकों ने जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच की डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति तपोब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति विश्वरूप चौधरी की खंडपीठ ने आज मामले की सुनवाई करते हुए निम्नलिखित आदेश दिए:सिंगल बेंच द्वारा ३१३ शिक्षकों की नौकरी रद्द करने के आदेश पर तीन महीने के लिए रोक लगा दी गई है।अगले आदेश तक इन शिक्षकों की सेवाएं फिलहाल बहाल रहेंगी।अदालत मामले के कानूनी पहलुओं और नियमितीकरण की प्रक्रिया की और अधिक विस्तार से समीक्षा करेगी।
सिंगल बेंच के फैसले के बाद दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों में शिक्षकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था और कई स्कूल अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए गए थे। डिवीजन बेंच के इस स्थगन आदेश के बाद उन परिवारों में उम्मीद जगी है जिनकी आजीविका इस नौकरी पर निर्भर थी। हालांकि, भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच अभी भी जारी रहेगी।

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