बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारी समय से पहले हुई शुरू
सरकार को पत्र अधिकारियों के नाम प्रस्तावित करने को कहा गया जो ईसीआई के निर्धारित मानकों के हो अनुरूप
– संवेदनशील इलाकों, विशेषकर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे क्षेत्रों में चुनाव से पूर्व सुरक्षा को लेकर आयोग विशेष सतर्क
अजित प्रसाद / सिलीगुड़ी: बंगाल में आगामी 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियां समय से पहले शुरू कर दी हैं। आयोग वर्ष के अंत तक केंद्रीय और राज्य स्तर की विभिन्न सुरक्षा तथा खुफिया एजेंसियों की भूमिकाएं स्पष्ट कर देगा। चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर ऐसे अधिकारियों के नाम प्रस्तावित करने को कहा गया है जो ईसीआई के निर्धारित मानकों के अनुरूप हों। आयोग के अनुसार, केवल पश्चिम बंगाल सिविल सर्विस (कार्यकारी) कैडर के उप-मंडलाधिकारी, एसडीओ और ग्रामीण विकास अधिकारी जैसे अधिकारी ही ईआरओ नियुक्त किए जा सकते हैं।आयोग ने पाया है कि इन अधिकारियों की नियुक्ति ईसीआई द्वारा निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन करते हुए की गई है।
इस संबंध में राज्य सरकार को पत्र भेजकर ऐसे अधिकारियों के नाम प्रस्तावित करने को कहा गया है जो ईसीआई के निर्धारित मानकों के अनुरूप हों. आयोग के अनुसार, केवल बंगाल सिविल सर्विस (कार्यकारी) कैडर के उप-मंडलाधिकारी, एसडीओ और ग्रामीण विकास अधिकारी जैसे अधिकारी ही ईआरओ नियुक्त किए जा सकते हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के एक सूत्र ने बताया कि आयोग ने पाया है कि इन 78 निर्वाचन क्षेत्रों में ऐसे अधिकारी नियुक्त किए गए हैं जो निर्धारित रैंक से नीचे हैं. इसी कारण ईआरओ के प्रतिस्थापन के निर्देश जारी किए गए हैं.
सूत्रों के अनुसार, आयोग राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों के ईआरओ की पदानुक्रम स्थिति की जांच कर रहा है. कई अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की विसंगतियां सामने आई हैं, जिनमें भी प्रतिस्थापन का आदेश दिया जाएगा।
पिछले सप्ताह राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने ईआरओ की नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर निर्वाचन आयोग का ध्यान आकर्षित किया था. उन्होंने भी यह आरोप लगाया था कि आयोग के दिशा-निर्देशों से नीचे के अधिकारियों को ईआरओ नियुक्त किया गया है। इसके बाद ईसीआई ने सीईओ कार्यालय को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी परिस्थिति में ईसीआई द्वारा निर्धारित मानकों से समझौता न किया जाए, विशेषकर बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) और ईआरओ की नियुक्तियों में। आयोग ने जिलाधिकारियों, जो जिला निर्वाचन अधिकारी भी होते हैं, तथा अतिरिक्त जिलाधिकारी (चुनाव) को इस सप्ताह के भीतर ‘मैपिंग और मैचिंग’ प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं. इसके बाद राज्य में विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) की अधिसूचना जारी की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने पिछले सप्ताह स्पष्ट किया था कि वर्ष 2022 के विशेष पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में जिनके नाम दर्ज थे, वे स्वचालित रूप से मान्य मतदाता माने जाएंगे। हालांकि, जिनके नाम 2022 की सूची में नहीं हैं, उन्हें नागरिकता प्रमाण के रूप में आयोग द्वारा अनुमोदित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय, पश्चिम बंगाल की ओर से अब तक 22 केंद्रीय और राज्य एजेंसियों को पत्र भेजकर उनसे 30 अक्टूबर तक अधिकारियों के नाम मांगे गए हैं, जिन्हें चुनावी प्रक्रिया में नोडल अधिकारी के रूप में तैनात किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, जैसे ही इन एजेंसियों से नाम प्राप्त होंगे, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल अगले माह इन नोडल अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इन बैठकों में आयोग प्रत्येक एजेंसी की भूमिका और जिम्मेदारियां तय करेगा। आमतौर पर यह प्रक्रिया चुनाव की घोषणा और आचार संहिता लागू होने के बाद शुरू की जाती है, लेकिन बंगाल चुनाव की संवेदनशीलता को देखते हुए इस बार चुनाव आयोग ने पहले ही इसे शुरू कर दिया है। सीईओ कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि राज्य के कुछ संवेदनशील इलाकों, विशेषकर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे क्षेत्रों में चुनाव से पूर्व सुरक्षा को लेकर आयोग विशेष सतर्क है। इसके साथ ही चुनाव आयोग इस बार प्रचार अभियानों के दौरान राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के खर्च पर भी कड़ी निगरानी रखेगा। आयोग नकदी और शराब जैसी वस्तुओं के वितरण के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिशों पर विशेष नजर रखेगा। फिलहाल राज्य की राजनीतिक स्थिति पहले से ही गरमाई हुई है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। सूत्रों के अनुसार, एसआईआर की अधिसूचना किसी भी समय जारी हो सकती है। इसी माह की शुरुआत में चुनाव आयोग की एक केंद्रीय टीम ने पश्चिम बंगाल का दौरा किया था और एसआईआर की तैयारियों की समीक्षा की थी। टीम ने सीईओ कार्यालय को यह स्पष्ट निर्देश दिया था कि निर्वाचन आयोग द्वारा तय किए गए मानकों, विशेषकर बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) और मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) की नियुक्ति में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए।

