उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की लेखिका एवं शिक्षिका पल्लवी शर्मा से राजीव कुमार झा की बातचीत

साहित्य: साक्षात्कार

 

प्रश्न 1: आप शिक्षिका हैं। साहित्य और संस्कृति से आपका असीम प्रेम रहा है। इसके बारे में जानकर खुशी होगी।

उत्तर: मुझे गर्व है कि मैं एक नवाचारी शिक्षिका हूँ और अपनी छात्राओं के लिए पूर्ण निष्ठा से समर्पित हूँ। उन्हें बहुमुखी प्रतिभा-संपन्न बनाने हेतु मैं निरंतर प्रयासरत रहती हूँ। संगीत, योग, कला एवं सिलाई जैसी विधाओं में उन्हें निपुण बनाने का अनवरत प्रयास करती हूँ। साहित्य-संस्कृति से मेरा गहरा लगाव है। स्वयं नियमित लेखन करती हूँ तथा साथी शिक्षकों एवं भावी पीढ़ी को भी इसके लिए प्रेरित करती हूँ। एक शिक्षिका के नाते मैंने अपनी छात्राओं को भी काव्य-प्रेम से ओत-प्रोत किया है।

प्रश्न 2: अपने घर-परिवार, बचपन और शिक्षा-दीक्षा के बारे में बताइए।

उत्तर: मेरे माता-पिता दोनों शिक्षक थे, अतः घर में अध्ययन-अध्यापन का वातावरण सदैव रहा। माता जी भी शिक्षिका थीं, इसलिए गृहकार्य में उनका सहयोग करते हुए भी हम भाई-बहनों ने पढ़ाई पूरी लगन से की। मैंने हिंदी एवं राजनीति शास्त्र में डबल एम.ए., बी.एड. किया है। स्काउट-गाइड में राष्ट्रपति पुरस्कार, एन.सी.सी. ‘बी’ सर्टिफिकेट, एन.एस.एस. आदि में विशेष योग्यता अर्जित की है।

प्रश्न 3: आप कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी रही हैं। अपनी सामाजिक सक्रियता के बारे में बताइए।

उत्तर: समाज-सेवा मुझे अत्यंत प्रिय है। अवसर मिलते ही मैं सक्रिय हो जाती हूँ। मैं अनेक समाजसेवी संस्थाओं से जुड़ी हूँ तथा शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय मोटिवेटर के रूप में कार्यरत हूँ। कई संस्थाओं की संयोजक भी हूँ। नवाचारी शिक्षकों के कार्यों को देखकर उन्हें अपने साथ जोड़ना तथा विभिन्न मंचों से सम्मान दिलाना मेरा स्वभाव है। इसी क्रम में मैंने भारत के 28 राज्यों के शिक्षकों को जोड़कर उन्हें ‘राष्ट्रीय उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान’ दिलवाया है।

प्रश्न 4: आपकी रचित पुस्तकों के बारे में जानकर खुशी होगी।

उत्तर: साहित्य समाज का दर्पण है। सामाजिक समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुए मैं भारत के विभिन्न राज्यों के कवियों से सामाजिक एवं सामयिक विषयों पर कविताएँ आमंत्रित करती हूँ। साझा काव्य-संकलनों के माध्यम से पुस्तकों का संपादन कर समाज में जागरूकता लाने का प्रयास करती हूँ। मैंने ‘जागो बिटिया जागो’ – लव जिहाद पर केंद्रित पुस्तक का संपादन किया है। इसके अतिरिक्त ‘मेरे रघुवर’, ‘नवाचारी शिक्षक’, ‘राष्ट्र निर्माता’, ‘भारत की महान विभूतियाँ’, ‘मैं कवि कैसे बना’ आदि साझा काव्य-संकलनों का संपादन किया है।

प्रश्न 5: मुरादाबाद आपका नगर है। इस नगर के इतिहास, संस्कृति और इससे जुड़ी अन्य बातों के बारे में बताइए।

उत्तर: मुझे गर्व है कि मैं मुरादाबाद की निवासी हूँ। यह ‘पीतल नगरी’ के नाम से विश्व-प्रसिद्ध है। यहाँ के पीतल बर्तनों की चमक पूरी दुनिया में है। मुगलकालीन नवाब मुराद के नाम पर इसका नाम मुरादाबाद पड़ा। आज यह ‘स्मार्ट सिटी’ के रूप में विकसित हो रहा है। यहाँ रामगंगा नदी बहती है। नदी के किनारे स्थित प्राचीन काली माता मंदिर के दर्शन से मन भक्ति-भाव से भर जाता है। दिल्ली रोड पर नवनिर्मित हनुमान वाटिका, संविधान वाटिका, वॉर मेमोरियल, अंबेडकर पार्क, हर्बल पार्क आदि दर्शनीय स्थल हैं। इस प्रकार मुरादाबाद एक पर्यटन-स्थल के रूप में भी विकसित हो चुका है।

प्रश्न 6: अपने प्रिय लेखकों-कवियों के बारे में जानकारी दीजिए।

उत्तर: मैं भजन-गायन करती हूँ, इसलिए सूर, तुलसी, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के साथ मेरी प्रिय कवयित्री मीराबाई हैं। मीरा के पदों का मैं गायन के साथ नृत्य भी करती हूँ और छात्राओं को भी करवाती हूँ। पाठ्य-पुस्तक की सभी कविताओं का छात्राओं से सस्वर गायन कराने में मुझे अपार आनंद मिलता है।

प्रमुख सम्मान:
शिक्षा क्षेत्र: सावित्रीबाई फुले सम्मान, राष्ट्रीय उत्कृष्ट शिक्षक, नवाचारी शिक्षक सम्मान, राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान, उत्तर प्रदेश पारस रत्न सम्मान, बिरसा मुंडा राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान, गुरु वंदन सम्मान, राधाकृष्णन शिक्षक सम्मान साहित्य क्षेत्र: काव्य श्री सम्मान, शब्द शिल्पी सम्मान, राष्ट्रवादी कवि सम्मान, उत्कृष्ट हिंदी सेवी सम्मान, कला साधक सम्मान

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