निर्दोष को जेल भेजने का परिणाम ,कानपुर में पति को छुड़ाने के लिए 50 फीट ऊंचे टावर पर चढ़ी महिला

 

सुनील बाजपेई
कानपुर। जब भी किसी के खिलाफ पुलिस में कोई रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है ,तो पुलिस निष्पक्ष विवेचना नहीं करती। वह पहले आरोपी से सौदेबाजी करती है और जब बात नहीं बनती तो निर्दोष होने के बाद भी दोषी साबित करते हुए संबंधित व्यक्ति को जेल भेज देती है। इसी आशय की घटना के परिणाम ने एक महिला को पुलिस कमिश्नर ऑफिस के पास बने 50 फीट ऊंचे टावर पर चढ़वा दिया। जानकारी के मुताबिक उसने ऐसा इसलिए किया ,क्योंकि उसके कथित निर्दोष पति को पास्को एक्ट के तहत जेल भेजा जा चुका है, जिसे छुड़ाने की मांग को लेकर ही महिला ने यह कदम उठाया। एडिशनल पुलिस कमिश्नर समेत कई अधिकारी महिला को टावर से नीचे उतर आने के लिए मनाते रहे लेकिन वह तैयार नहीं हुई। उसका कहना था कि जब तक उसके पति को जेल से रिहा नहीं किया जाएगा ,तब तक वह टावर से नीचे नहीं उतरेगी। इस स्थिति से समाचार लिखे जाने तक पुलिस में भीहड़कंप देखा गया।
यह महिला टावर पर चढ़ते ही चिल्लाने लगी कि मेरे पति को छोड़ दो नहीं तो यहां से कूदकर जान दे दूंगी। टॉवर पर महिला को देखकर आसपास काफी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई।
मौके पर पहुंचे स्टाफ ऑफिसर अमरनाथ यादव ने महिला को समझाने की कोशिश की ,जिस पर महिला ने कहा कि जब तक मेरे पति जेल से नही छूटेंगे तब तक मैं टॉवर से नहीं उतरूंगी।
करीब आधे घंटे बाद अपर पुलिस आयुक्त विपिन ताडा भी पहुंचे उन्होंने भी समझाने की कोशिश की। बोले- नीचे उतर जाओ लेकिन समाचार लिखे जाने तक अपनी बात पर पड़ी रही। यद्यपि पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ इस तरह की यह घटना पहले नहीं है इसके पहले भी इस तरह की घटनाएं महानगर में हो चुकी हैं। अधिकांश पीडतों का यही आरोप है कि अगर किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो जाती हैतो पुलिस निर्दोष को भीअपना शिकार बनती है और जेल जाने से बचने के नाम पर पैसे की मांग करती है और जब वह मांग पूरी नहीं हो पाती तो वह कथित निर्दोष को भी दोषी साबित करते हुए जेल भेज देती है ,जबकि इसी बात का फायदा उठाकर बहुत से लोग पैसे के बल पर दोषी होने के बाद भी बच जाते हैं। कानपुर में पुलिस कमिश्नर ऑफिस के टावर पर चढ़ने वाली महिला रानी का भी मामला कुछ इसी तरह का होने का दावा किया गया है जिसमें उसके पति महेश को जेल भेजा गया था।

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