कैंसर के इलाज में नर्सों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण: आरजीसीआईआरसी
11वें वार्षिक नर्सिंग कॉन्फ्रेंस में कैंसर देखभाल में नर्सों की महत्वपूर्ण भूमिका पर हुई व्यापक चर्चा, डाक्टरों ने नर्सिंग की महत्ता पर प्रकाश डाला
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर, 2024: कैंसर के इलाज में नर्सों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उनकी लगातार देखभाल और सेवाओं के कारण भी हम बड़े से बड़े इलाज में सफल हो पाते हैं। कैंसर देखभाल में अग्रणी संस्थान, राजीव गांधी कैंसर इंस्टिट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय नर्सिंग कॉन्फ्रेंस ‘नर्सीकॉन 2024’ में मशहूर डाक्टरों एवं विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
आरजीसीआईआरसी में नर्सिंग विभाग के निदेशक कर्नल मधुमिता ढल ने कैंसर देखभाल में नर्सों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा, ” ऑन्कोलॉजी नर्सिंग सिर्फ एक प्रोफेशन नहीं है, बल्कि एक नियति, मरीजों और उनके परिवारों के साथ उनके सबसे कठिन समय में साथ चलने की प्रतिबद्धता है। वास्तव में मरीजों की जटिल और कई प्रकार की आवश्यकताओं के प्रबंधन के लिए विशेष ज्ञान एवं कौशल की आवश्यकता पड़ती है। हमारा उद्देश्य मॉडर्न मेडिसिन के साथ समग्र एवं संवेदनापूर्ण देखभाल के मिश्रण में नर्सों की निर्णायक भूमिका को सामने लाना है। जागरूकता लाने के साथ-साथ हमें विशेषज्ञ ऑन्कोलॉजी नर्सों की संख्या में वृद्धि लाते हुए कैंसर के मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि सुनिश्चित करना है।”
कैंसर के उपचार में सर्वांगीण दृष्टिकोण के महत्व पर आरजीसीआईआरसी के सीईओ श्री डी. एस. नेगी ने कहा, “कैंसर उपचार की जटिलताओं पर काम करते हुए यह समझना जरूरी है कि सही मायने में हीलिंग के लिए केवल क्लीनिकल विशेषज्ञता की ही नहीं, बल्कि संवेदना, समर्पण और नवाचार की भी आवश्यकता पड़ती है। कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य ऐसे एकीकृत उपायों पर विचार-विमर्श करना है, जिनसे मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि के साथ-साथ विशेष ऑन्कोलॉजी नर्सिंग की तत्काल आवश्यकता का समाधान उपलब्ध कराते हुए हमें कैंसर देखभाल की बढ़ती चुनौती से पार पाने की दिशा में सशक्त करते हैं।”
आरजीसीआईआरसी में आयोजित होने वाली यह तीसरा अंतर्राष्ट्रीय और 11वां वार्षिक नर्सिंग कॉन्फ्रेंस था। कार्यक्रम में लगभग 400 प्रख्यात अंतर्राष्ट्रीय डॉक्टरों, विशेषज्ञों, नर्सों और मेडिकल प्रोफेशनलों ने हिस्सा लिया, और सभी ने कैंसर देखभाल में नर्सों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में नर्सिंग परामर्शदाता डॉ. दीपिका सेसिल खाखा कार्यक्रम की मुख्य अतिथि और मिलिट्री नर्सिंग सर्विस अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल इग्नेशियस डेलोस फ्लोरा विशिष्ट अतिथि थे। कॉन्फ्रेंस में फिलीपींस, सिंगापुर, नेपाल और मालदीव्स के प्रतिनिधियों समेत कई देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
“हीलिंग हैंड्स: इंटीग्रेटिव अप्प्रोचेज इन ऑन्कोलॉजी नर्सेज” नामक थीम पर आयोजित कॉन्फ्रेंस में कैंसर देखभाल में नर्सों की निर्णायक भूमिका को ऐसे समय में उभारा गया है, जब भारत में कैंसर के मामलों में काफी बढ़ोतरी होने की आंशका जताई जा रही है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय रोग सूचना विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र (एनसीडीआईआर) द्वारा किए गए एक अध्ययन में 2022 से 2045 के बीच भारत में कैंसर और उसके कारण मौतों के मामलों में, विशेषतः 2020 की तुलना में 2025 तक 12.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है।
सम्मेलन में जीवित बचे मरीजों का उपचार और ईलाज के परिणाम, रोगी देखभाल और सुरक्षा में संचार का महत्व, प्रतिरक्षाविहीन रोगियों के लिए संक्रमण नियंत्रण पद्धतियां, फीकल माइक्रोबायोटा प्रत्यारोपण जैसे नये तौर-तरीके, ऑन्कोलॉजी नर्सिंग में गुणवत्ता मापदंड और मरीज सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन्फ्यूजन थेरेपी में प्रगति सहित कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने मरीजों को दर्द प्रबंधन विकल्पों के बारे में शिक्षित और उनकी देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए उन्हें सशक्त करने में ऑन्कोलॉजी नर्सों की भूमिका पर भी चर्चा की। इस कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को ऑन्कोलॉजी नर्सिंग में अपने अभ्यास को बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की, साथ ही कैंसर चिकित्सा में नई तकनीकों, दवाओं और उपचार के तरीकों पर नवीनतम जानकारी के महत्व पर भी जोर दिया गया।


