सदीनामा पत्रिका ने आयोजित की एक शाम ग़ज़ल के नाम

 

लाल बिहारी लाल

नई दिल्ली। 5 मई को कोलकाता में सदीनामा पत्रिका द्वारा आयोजित एक “शाम ग़ज़ल के नाम” जिसमें आप ग़ज़ल सुनें, ग़ज़ल सीखें और ग़ज़ल को समझें, सदीनामा रोजाना बुलेटिन, जो ऑनलाइन है, उसको 3 साल के लगभग हो गए हैं, ग़ज़लनामा स्तंभ निकालते हुए। इसी तत्वावधान में यह “एक शाम ग़ज़ल के नाम” ग़ज़लकारों के साथ मुलाकात, बातचीत और ग़ज़ल को समझने की कोशिश की गई 33, शेक्सपियर सरणी, कोलकाता में। उनकी ग़ज़लें भी सुनी गईं। इस कार्यक्रम के संयोजक थे सैयद इमरान शेर, निवेदक ओमप्रकाश नूर, जितेंद्र जीतांशु, संपादक सदीनामा। इस कार्यक्रम का संचालन तथा विषय प्रवर्तन किया जितेंद्र जीतांशु ने, स्वागत भाषण रखा डॉक्टर केयूर मजमुदार ने। ओमप्रकाश नूर जो रुड़की में रहते हैं, उनके ग़ज़लनामा का स्तंभ के बारे में जो अनुभव थे, जिनको पढ़ा मीनाक्षी सांगानेरिया ने। ग़ज़ल पर वक्तव्य दिया साहित्यकार, प्रमोद शाह “नफीस” ने। उन्होंने कहा, ग़ज़ल का काफ़िला अरब के रेगिस्तान से होकर ईरान के बागों की सैर करता हुआ हिमालय और गंगा के देश, भारत पहुँचा। भारत में पहली बार 13-14 वीं शताब्दी में इसका दामन अमीर ख़ुसरो ने थामा और ख़ुसरो के बाद संत कबीर ने इसके रूप को संवारा। इसके साथ ही गजल पर अपना वक्तव्य रखा साहित्यकार महेंद्र पूनिया ने जिन्होंने ग़ज़ल पर विस्तार से बात की तथा कहा, ग़ज़ल दिल दिमाग पर बैठती है, हम ग़ज़ल को याद रखते हैं, किस तरह ग़ज़ल, ‘बोल के लब आजाद हैं मेरे’, हर आंदोलन की भाषा बन गई। हिंदी, उर्दू तथा नेपाली भाषा के ग़ज़लकार थे, रामनाथ बेखबर, रीमा पांडे, नंदलाल रोशन, प्रमोद शाह नफीस, रईस हैदर आज़मी, हलीम साबिर, जगमोहन सिंह खोखर, शाहिद फ़िरोगी, अभिज्ञात, आतिश रेजा, एजाज़ अहमद, अल्पना सिंह, डॉक्टर केयूर मजमुदार, इम्तियाज़ केसर, भूपेंद्र सिंह बशर, रौनक अफ़रोज, गोपाल भित्रीकोटी, परवेज अख़्तर, मुज्तर इफ्तेखारी, सरर रस्ती, महेंद्र सिंह पुनिया, हीरालाल साव, सुनील रोजारियो, प्रकाश किल्ला, कौशल किशोर सिंह, आदि। धन्यवाद रखा जगमोहन सिंह खोखर ने।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button