RBI समेत कई संस्थानों में पहले से 5 डे वीक, बैंकों में क्यों नहीं?इसी मांग पर 27 जनवरी को 8 लाख बैंक कर्मियों की हड़ताल!

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_रमेश ठाकुर_
_रामनगर -नरकटियागंज,_ _प०चंपारण(बिहार)_
देशभर में बैंकिंग सेवाएँ 27 जनवरी को प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में अखिल भारतीय बैंक हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, विदेशी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों के लगभग 8 लाख कर्मचारी एवं अधिकारी शामिल होने की संभावना है।
UFBU देश की नौ प्रमुख बैंक यूनियनों का संयुक्त मंच है, जिनमें ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉयीज़ एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉयीज़ (NCBE), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA), बैंक एम्प्लॉयीज़ फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI), इंडियन नेशनल बैंक एम्प्लॉयीज़ फेडरेशन (INBEF), इंडियन नेशनल बैंक ऑफिसर्स कांग्रेस (INBOC), नेशनल ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ बैंक वर्कर्स (NOBW) तथा नेशनल ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ बैंक ऑफिसर्स (NOBO) शामिल हैं।
हड़ताल का मुख्य मुद्दा बैंकिंग उद्योग में पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना है। यूनियनों की मांग है कि वर्तमान में दूसरे और चौथे शनिवार के अलावा शेष सभी शनिवारों को भी अवकाश घोषित किया जाए। UFBU के अनुसार यह मांग 7 दिसंबर 2023 को भारतीय बैंक संघ (IBA) और UFBU के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन तथा 8 मार्च 2024 के सेटलमेंट/जॉइंट नोट के अनुरूप है, जिसमें इस दिशा में सकारात्मक सहमति बनी थी।
यूनियनों का कहना है कि वर्ष 2015 के 10वें द्विपक्षीय समझौते के समय भी यह आश्वासन दिया गया था कि भविष्य में सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने के विषय पर विचार किया जाएगा। बाद में 2022 और 2023 में सरकार, IBA और UFBU के बीच हुई बैठकों में यह प्रस्ताव तैयार हुआ कि सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य कर सभी शनिवारों को अवकाश दिया जा सकता है। यह प्रस्ताव सरकार को भेजा गया, लेकिन पिछले दो वर्षों से इसकी स्वीकृति लंबित है।
UFBU के नेताओं का आरोप है कि बार-बार आश्वासन के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे बैंक कर्मचारी और अधिकारी स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इससे पहले भी UFBU ने 24 और 25 मार्च 2025 को दो दिवसीय हड़ताल की घोषणा की थी, जिसे सरकार द्वारा “विषय विचाराधीन है” कहे जाने के बाद स्थगित कर दिया गया था।
यूनियन नेताओं का तर्क है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), बीमा क्षेत्र की प्रमुख संस्थाएँ जैसे LIC और GIC, केंद्र व राज्य सरकार के कार्यालय, स्टॉक एक्सचेंज तथा मनी मार्केट पहले से ही पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह पर काम कर रहे हैं। साथ ही डिजिटल बैंकिंग, एटीएम, मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग जैसी सुविधाओं के चलते ग्राहकों को अत्यधिक असुविधा नहीं होगी।
UFBU ने स्पष्ट किया है कि बैंक कर्मियों के साथ हो रहे भेदभावपूर्ण व्यवहार और लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी के कारण ही हड़ताल का निर्णय लिया गया है। यूनियन ने बैंक ग्राहकों से अपील की है कि वे संभावित असुविधा को समझते हुए सहयोग बनाए रखें।
यह जानकारी एआईबीओसी बिहार इकाई के सचिव अमरेश विक्रमादित्य ने दी।

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