पितृ पक्ष के अंत और देवी पक्ष के आरंभ के उपलक्ष्य में उत्तर बंगाल में तर्पण ।

पुरुष, महिलाएँ, वृद्ध और युवा - सभी ने मंत्रोच्चार और स्नान करके अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया।

 

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सिलीगुड़ी/मालदा: आज महालया है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के अंत और देवी पक्ष, यानी मातृ पक्ष के आरंभ के इस पावन दिन पर उत्तर बंगाल के कई घाटों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। मालदा के मंगलबाड़ी महानंदा घाट से लेकर सिलीगुड़ी नदी के घाटों, जलपाईगुड़ी में तीस्ता नदी के तट, कूचबिहार में रूपनारायण नदी घाट और अलीपुरद्वार व उत्तर दिनाजपुर के विभिन्न नदी घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालु और तीर्थयात्री तर्पण और अर्घ्य देने के लिए घाटों पर उमड़ पड़े।

भोर से पहले ही हजारों लोग अपने परिवारों के साथ पहुँच गए। पुरुष, महिलाएँ, वृद्ध और युवा – सभी ने मंत्रोच्चार और स्नान करके अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया। नदी घाटों पर कहीं मंत्रोच्चार हुआ तो कहीं पूर्वजों को याद करते हुए दीप जलाए गए—आज पूरा उत्तर बंगाल भक्ति, श्रद्धा और भावना से बंधा हुआ प्रतीत हो रहा था।

महानंदा घाट पर उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन और आपदा मोचन बल सुबह से ही तैनात थे। सिलीगुड़ी में भी महानंदा, बालासन, साहू नदी, करोटवा और तीस्ता घाटों पर श्रद्धालुओं की आमद को नियंत्रित करने के लिए सुबह से ही कड़ी निगरानी रखी गई थी। जलपाईगुड़ी में तीस्ता नदी के घाटों और कूचबिहार में रूपनारायण नदी के तटों पर भी यही स्थिति देखी गई।

पितृ तर्पण ही नहीं, कई श्रद्धालुओं ने देव तर्पण और ऋषि तर्पण में भी भाग लिया। स्थानीय पुजारियों के अनुसार, महालया के दिन तर्पण करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और देवी पक्ष की शुरुआत के साथ ही दुर्गा पूजा का आगमन शुरू हो जाता है।

सुबह से दोपहर तक, उत्तर बंगाल के नदी तट श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों से भरे रहते हैं। महानंदा, तीस्ता, रूपनारायण सहित विभिन्न नदियों के तट भक्ति और परंपरा के वातावरण से भर जाते हैं।

आज की महालया की सुबह एक स्पष्ट संदेश देती प्रतीत हुई—पितृ पक्ष श्रद्धा और तर्पण के साथ विदा हो गया, और देवी पक्ष शुरू हो गया—आगमन के गीत पूरे उत्तर बंगाल में गूंज उठे।

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