श्री मारकंडेश्वर मंदिर में हुआ कूष्माण्डा स्वरूप का पूजन मां दुर्गा का चौथा स्वरूप आदिशक्ति है : महंत जगन्नाथ पुरी  

 

अश्विनी वालिया
कुरुक्षेत्र, : चैत्र नवरात्रों के चलते मारकंडा नदी के तट पर श्री मारकंडेश्वर महादेव मंदिर ठसका मीरां जी में बारह ज्योतिर्लिंगों पर अनुष्ठान के बाद लाई गई मां भगवती की अखंड ज्योति पर अखंड पूजन चल रहा है। मां भगवती की अखंड ज्योति के दर्शनों के लिए दूर दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। अखिल भारतीय मारकंडेश्वर जनसेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं मंदिर के व्यवस्थापक महंत जगन्नाथ पुरी ने दुर्गा सप्तशती के पाठ में बताया कि मां दुर्गा के चौथे स्वरूप के रूप मां कूष्मांडा की पूजा और अर्चना की जाती है। माना जाता है कि सृष्टि की उत्पत्ति से पूर्व जब चारों ओर अंधकार था और कोई भी जीव जंतु नहीं था तो मां दुर्गा ने इस अंड यानी ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें कूष्मांडा कहा जाता है। सृष्टि की उत्पत्ति करने के कारण इन्हें आदिशक्ति नाम से भी अभिहित किया जाता है। इस अवसर पर स्वामी संतोषानंद, स्वामी पृथ्वी पुरी, शौय गुप्ता, सृष्टि गुप्ता, अनिरुद्ध, वंशिका, बलजीत, नाजर सिंह, सुक्खा सिंह, बिल्लू पुजारी, मंजीत कौर, सुखवंत कौर इत्यादि श्रद्धालु मौजूद रहे।

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