अचलगंज में भ्रष्टाचार से बढ़ती समस्याओं के लिए दोषी कौन – सीएम ,डीएम या अधिशाषी अधिकारी ?

निर्देशित 8 के बजाय अधिशाषी अधिकारी ने स्वीकृत किया 13 प्रतिशत सेवा कर

 

नगर पंचायत अध्यक्ष की अनुमति / सहमति के बगैर ही 250 में से चुनी एक ही व्यक्ति की तीन कंपनियों में से एक को दिया ठेका और नियम के विपरीत अनुबंध को एक के बजाय किया 3 वर्ष के लिए निष्पादित

सुनील बाजपेई
कानपुर। कमीशन खोरी के रूप में अधिक से अधिक कमाई में लालच में भ्रष्ट बताये जाने वाले अधिकारी आम जनता की समस्या हल करने की बजाय न केवल उन्हें बढ़ा रहे हैं, बल्कि सरकारी राजस्व को भी लाखों की चपत लगाने में भी सफल हो रहे हैं। यही नहीं कमीशन खोरी आदि के जरिए अधिक से अधिक कमाई का ऐसे अधिकारियों का लालच नियमों और कानून के विपरीत खुलेआम मनमानी करके समस्याओं के खिलाफ ना केवल सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं को पलीता लगा रहा है ,बल्कि उनको अमली जामा पहनाने में जिलाधिकारियों की गंभीरता, उनके नेतृत्व और कार्यों की पर्यवेक्षण कुशलता और क्षमता पर भी सवाल उठा रहे हैं, जिसकी पुष्टि के लिए उन्नाव की अचलगंज नगर पंचायत की महिला अधिशासी अधिकारी द्वारा कथित रूप से नियम कानून को ताक रखकर की गई टेंडर प्रक्रिया काफी है ,जिसे एक बहुत बड़ा टेंडर घोटाला भी बताया जा रहा है।
लग रहे आरोपों और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अचलगंज नगर पंचायत की अधिशाषी अधिकारी अंकिता देवी द्वारा नगर पंचायत अचलगंज में सेवा प्रदाता के चयन हेतु बिड संख्या-जेम/ 2023/बी/337 दिनांक 22.09.2023 को जेम पोर्टल पर अपलोड की गई ,जिसमें लगभग 250 सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रतिभाग किया गया ,जिसके बाद अधिशाषी अधिकारी द्वारा मनमाने तरीके से अपने चहेते सेवा प्रदाता को ठेका दिये जाने के उद्देश्य से मात्र 03 फर्मों की टेक्निकल बिड बिना अध्यक्ष नगर पंचायत अचलगंज के संज्ञान में लाये स्वीकृत की गई। साथ ही अन्य फर्मों की टेक्किनल बिड बिना कारण स्पष्ट करते हुए निरस्त कर दी गई।
अधिशासी अधिकारी के नजदीकी बताए जाने वाले चार सभासदों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर भरोसेमंद सूत्रों को इस बारे में जो जानकारी दी है ,उसके मुताबिक नियम निर्देशों के अनुरूप तीन से आठ प्रतिशत सेवा कर कमीशन के विपरीत निजी लाभ के लिए 13% सेवाकर के रूप में कमीशन देने वाली विवादित महिला अधिशाषी अधिकारी ने टेक्निकल बिड अपने स्तर से ही खोलकर अन्य बिडों को निरस्त कर अपने चहेते सेवा प्रदाता की तीन बिड अर्ह कर उनकी फाईनेन्शियल बिड भी खोलकर बिना नगर पंचायत अध्यक्ष के संज्ञान में लाये व बिना अनुमति के एल-1 फर्म मे० ओएके स्क्वायर डेवलपर्स नोयडा को 20 अक्टूबर 2023 को स्वीकृति आदेश जारी करते हुए रू0 100/- के स्टाम्प पर अनुबन्ध पत्र भी नियमानुसार एक के बजाय तीन वर्ष के लिए निष्पादित कर दिया।
खास बात यह भी कि स्वीकृत बिड में सेवाकर 13 प्रतिशत स्वीकृत किया गया, जबकि शासनादेशों के अनुसार सेवाकर 3 से 8 प्रतिशत तक का ही प्राविधान है। यह भी बताया गया कि बिड में एक वर्ष के लिए ही अनुमानित बिड मूल्य रू0 1,65, 00,787.20 निर्धारित करते हुए ईएमडी धनराशि रू० 8,25,039.00 निर्धारित की गई थी, फिर भी अनुबन्ध तीन वर्ष हेतु निष्पादित कर दिया। नगर पंचायत का चुनाव हार चुके एक प्रत्याशी के दो नजदीकी सभासदों ने भी सूत्रों को बताया कमीशन खोरी के रूप में भ्रष्टाचार से की जाने वाली भारी कमाई में प्रशासन के एक अधिकारी की भी हिस्सेदारी बताई जाती है। यही वजह है कि लिखित शिकायतों के बाद भी अधिशाषी अधिकारी से इस बात का स्पष्टीकरण अभी तक नहीं मांगा गया है कि उन्होंने 250 सेवा प्रदाताओं में से केवल एक ही व्यक्ति की तीन में से एक कंपनी का टेंडर क्यों पास किया ? शासन द्वारा निर्धारित तीन से आठ प्रतिशत के बजाय सेवा कर 13% क्यों स्वीकृत किया ? संज्ञान में लाते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष से उसकी अनुमति क्यों नहीं ली गई ? नियमतः 1 वर्ष के स्थान पर 3 वर्ष का अनुबंध क्यों किया गया ?
वहीं दूसरी गहराई से जानकारी रखने वाले दो नजदीकी सूत्रों ने इस बारे में जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक कमीशन खोरी आदि के जरिए भ्रष्टाचार के फलस्वरूप अधिशासी अधिकारी लाखों करोड़ों की चल – अचल, नामी – बेनामी संपत्ति की मालकिन बनने में भी सफल हुई बताई जातीं हैं, जिसकी पुष्टि उनकी आय से अधिक संपत्ति मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने से भी हो सकती है।
फिलहाल आर्थिक स्वार्थ पूर्ति के इरादे से जुड़े अधिशासी अधिकारी के इस रवैये से यूपी सरकार की मंशा के अनुरूप नगर पंचायत अचलगंज की जन समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पा रहा है, जिसकी असली वजह अधिशासी अधिकारी का कथित भ्रष्टाचार पूर्ण रवैया ही बताया जाता है। आखिर अचलगंज क्षेत्र इन हालातों से निजात कब पाएगा। यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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