लेखिका डॉ चित्रा चतुर्वेदी से राजीव कुमार झा की बातचीत…

साहित्य: साक्षात्कार

 

प्रश्न : आपके सामाजिक कार्यों के लिए विगत वर्षों से कई संस्थाओं के द्वारा आपको सम्मान और पुरस्कारों से नवाज़ा गया है । अपने प्रति समाज के इस आभार को लेकर क्या आप कुछ कहना चाहेंगी ?

उत्तर मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में ही उसकी मान -मर्यादा, प्रतिष्ठा सब कुछ है । मेरे द्वारा किए गए लेखन कार्य, भारत स्काउट गाइड संस्था के लिए किए गए कार्यों की सभी ने सराहना की तथा उनके लिए मुझे जिन संस्थाओं ने सम्मानित किया , उनका मैं हृदय से आभार व्यक्त करती हूं ।
एक शिक्षिका होने के नाते लिखने का शौक मुझे था और मैं कविताएं ,लेख लिखा करती थी । मेरा अधिकतर समय पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय आयुध निर्माणी कटनी, मध्य प्रदेश में ही बीता । कटनी आने से पहले भी मैं लेखनकार्य किया करती थी, समाचारपत्रों में भी मेरे लेख प्रकाशित हुआ करते थे किंतु कटनी में आकर मेरे लेखन कार्य को ऊर्जा मिली ,यशभारत, दैनिक भास्कर जैसे समाचार पत्रों में मेरे लेख प्रकाशित हुए , उसके लिए मैं उन सभी का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं और आभार व्यक्त करती हूं उन सभी का जिन्होंने एक नहीं कई बार 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मानित करके मुझे गौरवान्वित किया।

प्रश्न: हिंदी काव्य के अपभ्रंश काल के बारे में आपने शोधकार्य किया है। हिंदी के विकास में अपभ्रंश के योगदान के बारे में बताइए।

उत्तर: अनुभूतियों , विचारों की दृष्टि से अपभ्रंश साहित्य अत्यंत गहन और शैली की दृष्टि से उत्कृष्ट है।
परंपरागत काव्यरूपों तथा काव्य रूढ़ियों को अपनाते हुए अपभ्रंश के रचनाकारों ने युगीन आवश्यकताओं तथा अपेक्षाओं के अनुकूल कार्य को जनमानस की भावना से संपन्न किया है। भारतीय साहित्य का अंतः प्रवाह भाषा के विकास या परिवर्तन से कभी भी खंडित नहीं हुआ है। उसकी मूल चेतना यद्यपि परिवर्तित रही किंतु वह सामाजिक मनोवृत्तियों तथा सामाजिक संबंधों के परिवर्तन से प्रभावित नहीं रह सका। फलस्वरुप पुरातनता नवीनता में ढलती रही। नए सामाजिक एवं मानवीय संदर्भ में साहित्य की परिभाषा स्वरूप और ढांचा बदलता रहा । अपभ्रंश के जैन रचनाकारों ने अपने धर्म की महत्ता सिद्ध करने के लिए इन महापुरुषों से संबंध घटनाओं में मनचाहा परिवर्तन किया। जैन रामकथा में हनुमान वानर नहीं हैं, इसी तरह रावण 10 सिरों वाला भी नहीं है। इस प्रकार यदि हम देखें तो अपभ्रंश की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।

प्रश्न: केंद्रीय विद्यालय संगठन में नौकरी करने के बाद आप अटल आवासीय विद्यालय सहजनवा, गोरखपुर ,उत्तर प्रदेश में अध्यापन कार्य कर रही हैं ।केंद्रीय विद्यालय संगठन में अपनी सेवा को आप किस तरह याद करना चाहेंगी?

उत्तर:केंद्रीय विद्यालय संगठन अपने आप में ही एक बहुत ही संपन्न एवं बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए तत्पर संस्था है ।
मैं अपने आप को पूर्णता गौरवान्वित महसूस करती हूं कि मैं केंद्रीय विद्यालय संगठन का एक ऐसा हिस्सा रही हूं ,जिसे केंद्रीय विद्यालय संगठन ने बहुत सम्मान दिया और मैंने भी पूरी तरह निष्ठा से केंद्रीय विद्यालय संगठन में अपना योगदान दिया।
मैं केंद्रीय विद्यालय संगठन को इस तरह से याद करना चाहूंगी कि केंद्रीय विद्यालय संगठन ने मुझे एक नई पहचान दी । मैं डॉ चित्रा चतुर्वेदी , प्र स्नातक शिक्षक (हिंदी) ही रह जाती अगर मैने भारत स्काउट गाइड संस्था में अपनी सक्रिय भूमिका नहीं निभाई होती । स्काउट / गाइड ने मुझे एक अलग पहचान दी। मैंने इसमें A.L.T.(गाइड कोर्स ) किया था जिसकी वजह से मुझे पूरे भारत में घूमने का अवसर मिला और मैं आपको बताऊं हमारा यह केंद्रीय विद्यालय संगठन एक परिवार है जिस तरह से सब लोग एक दूसरे का सहयोग करते हैं ,जिस तरह से एक दूसरे के लिए खड़े रहते हैं , वो अपनापन शायद हर जगह अब ना मिले इसके लिए मैं हृदय से केंद्रीय विद्यालय संगठन का आभार व्यक्त करूंगी और जो एक नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच मुझे संगठन से मिली है वह मैं कभी नहीं भूल पाऊंगी ,और मैं जो भी मेरा यह साक्षात्कार पढ़ रहे होंगे केंद्रीय विद्यालय संगठन में आए नए बच्चे मैं उनसे यही कहूंगी कि हर कार्य में
अपनी रुचि एवं सक्रिय भागीदारी रखिए, कम करने में जो खुशी मिलेगी उसका आप अंदाज़ा नहीं लगा पाएंगे।

प्रश्न:वर्तमान में अध्यापन का कार्य करके आप किस तरह से संतुष्ट हैं?

उत्तर: केंद्रीय विद्यालय आयुध निर्माणी कटनी, मध्य प्रदेश से जुलाई 2024 में सेवानिवृत्ति के बाद 04 अगस्त 2025 में मैंने अटल आवासीय विद्यालय, सहजनवा गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में प्र .स्नातक शिक्षक (हिंदी) के पद पर कार्य भार ग्रहण किया ।
उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने 2023 में 18 ब्लॉक में अटल आवासीय विद्यालय खोले हैं।
इन विद्यालयों में श्रमिकों एवं किसानों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है, केवल शिक्षा ही नहीं, भोजन से लेकर सारी चीजें बच्चों को मुफ्त में दी जाती हैं। आवासीय विद्यालय होने के कारण यहां पर केंद्रीय विद्यालय की अपेक्षा कार्य करने के तरीके एवं जिम्मेदारियों को मैंने एकदम अलग पाया । जो मैंने देखा केंद्रीय विद्यालय के बच्चों में और यहां के सहजनवा के बच्चों में जमीन – आसमान का अंतर है क्योंकि वहां हमारे यहां आवासीय विद्यालय नहीं है बच्चे आते हैं और अपने घर चले जाते हैं और यहां के जो बच्चे कृषकों और श्रमिकों के बच्चे हैं जो ग्रामीण क्षेत्र से आये हैं। पूर्वांचल के बच्चों में ही नहीं अपितु यहाँ के अभिभावकों में भी गुरुजनों के सम्मान की प्रवृत्ति कूट – कूट भरी है, बालक- बालिका, सभी गुरुजनों के चरणस्पर्श करके आशीर्वाद लेते हैं।
यहां भी के. वि. संगठन जैसा ही सीबीएसई का पाठ्यक्रम है । मुझे वरिष्ठ बालिका वर्ग यानि ग्यारहवीं की बालिकाओं की सदनाध्यक्ष की जिम्मेदारी प्रधानाचार्य महोदय द्वारा सौंपी गई है। बालिकाएं बहुत ही अनुशासन प्रिय एवं सभी प्रकार से अच्छी हैं।
यहां आकर मुझे इन बच्चों के साथ हर पल एक माँ की भूमिका का अहसास होता है, बालिकाएं हर बात मुझसे बताती हैं और मैं भी अपनी पूरी निष्ठा से उनकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास करती हूं। मुझे यहां आकर हर पल एक नई अनुभूति होती है, मैं बहुत प्रसन्नता से यहां अपना शिक्षण कार्य एवं सदन अध्यक्ष की भूमिका का निर्वहन कर रही हूं।

प्रश्न :अपने जीवन की अन्य उपलब्धियां से अवगत कराएं।

उत्तर: मेरी प्रारंभिक शिक्षा क्रॉस्थवेट गर्ल्स गर्ल्स इंटर कॉलेज प्रयागराज में हुई। यहीं से मैंने बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की ।
राष्ट्रीय स्तर की तैराक होने का गौरव भी मुझे विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने से ही मिला ।
प्रयागराज में प्रतिवर्ष सरस्वती घाट से संगम तक तीन मील की तैराकी प्रतियोगिता आयोजित की जाती थी , उसमें मैं कई वर्षों तक प्रथम स्थान पर रही । 1981 में विद्यालय की सर्वश्रेष्ठ छात्रा का गोल्ड मेडल भी मुझे इसी विद्यालय से प्राप्त हुआ।
लगातार बारह घंटों तक अनवरत तैरने का कीर्तिमान भी मैंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के तरणताल में ही बनाया ।
इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मैंने बी ए और एम .ए . ( हिंदी) की पढ़ाई पूरी की इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भी मैंने लेखन प्रतियोगिताओं में कई बार पुरस्कार प्राप्त किए । 1986 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हीरक जयंती कार्यक्रम में प्रकाशन मंत्री होने के कारण भी मेरी सक्रिय भूमिका रही । इसके अतिरिक्त केंद्रीय विद्यालय संगठन में भारत स्काउट एंड गाइड्स में A L T गाइड कोर्स करने के कारण भी मुझे कई सम्मान और अवार्ड प्राप्त हुए । मुझे कक्षा दसवीं को पढ़ने का अवसर मिला और उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम के लिए मुझे श्रीमती स्मृति ईरानी के द्वारा प्रशस्ति पत्र प्राप्त हुआ एवं केंद्रीय विद्यालय संगठन जबलपुर संभाग के उपायुक्त महोदय के द्वारा भी कई बार प्रशस्ति पत्र मुझे प्राप्त हुए।
गाइड में भी मैंने राज्य पुरस्कार, राष्ट्रपति पुरस्कार जैसे कई कोर्स में लीडर ऑफ द कोर्स की भूमिका निभा कर प्रशस्ति पत्र प्राप्त किए। मैंने कई बार रक्तदान शिवरों में, कैंसर अभियान , विधवा आश्रम, वृद्ध आश्रम ,अनाथालय में कई प्रकार की अपनी सेवाएं दी और हर जगह मुझे प्रशस्ति पत्र ही प्राप्त हुए। मैं ईश्वर को धन्यवाद देती हूं, अपने माता-पिता को धन्यवाद देती हूं ,अपने परिजनों को धन्यवाद देती हूं ,केंद्रीय विद्यालय संगठन के हर उस व्यक्ति को धन्यवाद देती हूं जिन्होंने मुझे इतने सम्मान के साथ केंद्रीय विद्यालय संगठन में सेवा करने का अवसर प्रदान किया। काव्य लेखन,समसामयिक गद्य लेखन का शौक होने के कारण मुझे कई सम्मान भी मिले, पत्र पत्रिकाओं में भी लेख प्रकाशित होते रहते हैं।

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