गोरखा बहनें भाई दूज ( ‘भाई टीका’) पर भाइयों को लगाती हैं 7 रंग का टीका

दी जाती है अखरोट की बलि, मांगी जाती है भाई के लिए यमराज से मांगती है वरदान

 

अजित प्रसाद / सिलीगुड़ी: पूर्वोत्तर भारत का प्रवेशद्वार सिलीगुड़ी। यहां जिस प्रकार सभी संप्रदायों का संगम है इसलिए इसे मिनी इंडिया कहा जाता है। बंगाली यहां आज भाई फोटा मानते है तो गोरखा समाज भैया दूज को भाई टीका के रूप में मनाया है। भाई बहन के इस अनोखे पर्व को लेकर जबरदस्त उत्साह है। गोरखा के लिए दीपावली और भाई टीका पर्व बेहद अहम होता है। यहां इस त्योहार को ‘तिहार’ कहते हैं, जिसका उत्सव 5 दिन चलता है। इसके अंतिम दिन ‘भाई टीका’ मनाया जाता है, जो भाई दूज के समान होता है।

यह पर्व भाई-बहन के अटूट रिश्ते को समर्पित है, जो आज यानि 23 अक्टूबर को पड़ रहा है। गोरखा बहनें आज के दिन भाइयों के माथे पर 7 रंगों का तिलक लगाती हैं। जिसके सभी रंगों का विशेष महत्व होता है। इस तरह बनाया जाता है भाई टीका: भाई टीका की शुरुआत यमराज, देवी यमुना, यमदूत और अस्त चिरंजीबी (अमर देवताओं) की पूजा करने से होती है। इसके बाद बहनें बुरी आत्माओं और मृत्यु से रक्षा करने के लिए भाइयों के चारों ओर 3 बार तांबे के घड़े से तेल और जल छिड़कती हैं। तिलक लगाने से पहले बहनें अखरोट की बलि दी जा जाती हैं। इसके बाद वे भाइयों के माथे पर सप्तरंगी टीका लगाती हैं। चावल के पेस्ट को आधार के रूप में लगाने के बाद तिलक लगाए जाते हैं।
आपनेलाल और नारंगी: भाई टीका में सबसे पहले लाल रंग का टीका लगाया जाता है। यह रंग सुख का प्रतिनिधित्व करता है और नेपाल का यह राष्ट्रिय रंग भी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, लाल टीका सबसे पहले यमुना ने अपने भाई यमराज को लगाया था। इसके बाद यमराज ने कहा कि जिस भाई को उसकी बहन लाल तिलक लगाएगी, वह अकाल मृत्यु से बच जाएगा। तिलक के अंत में नारंगी टीका लगाया जाता है, जो अच्छा भाग्य और उमंग का प्रतीक होता है। सफेद: टीका लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सफेद रंग पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है। परंपरागत रूप से इसे चावल और दही से तैयार किया जाता था। यह तब भोत प्रचिलित हुआ करता था जब लाल टीका मिलना मुश्किल होता था। यह भी मान्यता है कि सफेद रंग का तिलक लगाने से भाइयों की बुद्धि बढ़ती है और वे जीवन की कठिनाइयों को आसानी से पार कर पाते हैं। पीला: भाई टीका के दौरान पीले रंग का तिलक भी किया जाता है, जो हिंदू धर्म में विशेष मान्यता रखता है। इस रंग का टीका उल्लास और विद्या का प्रतिनिधित्व करता है। इसके साथ ही यह टीका भाइयों को किसी भी प्रकार की हानि या बीमारी से बचाकर भी रखता है। यह भाइयों के दिमाग को तेज करने में योगदान देता है और उनके जीवन को खुशियों से भर देता है। हरा: इस तिलक में हरे रंग का भी खास महत्व होता है, जो दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है। इस रंग का तिलक लगाने से भाई का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और उनकी उम्र लंबी होती है। इतना ही नहीं, इस रंग का टीका भाइयों के जीवन में आने वाली बाधाओं को रोकने में भी मदद करता है। इससे उनके रुके हुए काम बन जाते हैं और उन्हें सफलता हासिल करने में सहायता मिलती है। नीला और बैंगनी: बहनें अपने भाइयों के माथे पर नीले रंग का तिलक भी करती हैं। यह रंग महिमा का प्रतीक माना जाता है और उसे भाइयों के जीवन में फैलाता भी है। यह रंग ताकत और स्थिरता का भी प्रतिनिधित्व करता है। कहते हैं कि नीले रंग का तिलक करने से भाइयों का मन स्थिर रहता है और उन्हें कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति मिलती है। भाई टीका पर बैंगनी तिलक भी किया जाता है, जो अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक होता है।

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