तृणमूल कांग्रेस में ऐतिहासिक टूट! विधायकों को एकजुट कर नया बागी गुट बनाने की प्रक्रिया शुरू

* बंगाल की राजनीति में भारी हलचल

* पहली बार के विधायक ऋतब्रत और संदीपन के हाथों में बगावत की कमान;

अजित प्रसाद, कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त का सबसे बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में औपचारिक रूप से एक ऐतिहासिक विभाजन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पार्टी के भीतर लंबे समय से सुलग रही असंतोष की चिंगारी अब खुली बगावत में बदल चुकी है। टीएमसी के नाराज विधायकों को एकजुट कर एक नया ‘विक्षुब्ध’ (बागी) गुट बनाने का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे राजनीतिक विद्रोह का नेतृत्व पहली बार विधायक बने दो युवा नेता— ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन कर रहे हैं। इस अचानक हुए घटनाक्रम से बंगाल के सियासी गलियारों में तनाव चरम पर है।

विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्राथमिक रणनीति के तहत यह बागी गुट पश्चिम बंगाल विधानसभा में पूरी तरह से एक अलग ब्लॉक (धड़ा) बनाने जा रहा है। इसके साथ ही, यह गुट सीधे तौर पर वर्तमान विपक्ष के नेता शोभनदेव चटर्जी के नेतृत्व को चुनौती देने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि बागी विधायक बहुत जल्द विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के पास एक औपचारिक प्रस्ताव भेजने वाले हैं, जिसमें शोभनदेव चटर्जी के स्थान पर ऋतब्रत बनर्जी को नया नेता प्रतिपक्ष (विपक्ष का नेता) घोषित करने की मांग की जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल के भीतर इस स्तर का विद्रोह और विधायकों के एक बड़े हिस्से का इस तरह टूटकर अलग होना ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका है। जिस तरह से पहली बार जीतकर आए विधायकों ने इस बगावत का झंडा बुलंद किया है, उससे साफ है कि पार्टी के भीतर सांगठनिक स्तर पर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था।

अब देखना यह होगा कि इस नए बागी गुट के पास कुल कितने विधायकों का समर्थन है और विधानसभा अध्यक्ष इस नए ब्लॉक को क्या कानूनी मान्यता देते हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व डैमेज कंट्रोल (नुकसान की भरपाई) के लिए सक्रिय हो गया है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तीर कमान से छूट चुका है और इस बगावत के बाद बंगाल की राजनीति के समीकरण हमेशा के लिए बदलने वाले हैं।

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