79 वर्षों बाद भी देश का आम नागरिक यह पूछने को मजबूर है — क्या यह आज़ादी वास्तव में जनता तक पहुँची है?

 

भारत को 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता मिली थी, लेकिन आज 79 वर्षों बाद भी देश का आम नागरिक यह पूछने को मजबूर है — क्या यह आज़ादी वास्तव में जनता तक पहुँची है?

आज भारत लगभग 147 करोड़ नागरिकों का देश है — दुनिया की सबसे बड़ी आबादी। यह 147 करोड़ लोग हर वर्ष अपनी मेहनत, पसीने और संघर्ष से सरकार को ₹38 लाख करोड़ से अधिक टैक्स देते हैं। यह धन देश की जनता का है, देश के भविष्य का है, और हर नागरिक के सम्मानजनक जीवन की गारंटी होना चाहिए।

लेकिन सच्चाई कड़वी है।

जिस देश की जनता लाखों करोड़ टैक्स दे रही हो, उसी देश में आज भी गरीब नागरिक पीने का पानी खरीदने को मजबूर है। शहरों में पानी बोतलों में बिक रहा है और गांवों में लोग गंदा पानी पीकर बीमार हो रहे हैं। यह केवल व्यवस्था की कमी नहीं — यह राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की विफलता है।

इसी गंभीर स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए Dinesh Kumar, Advocate एवं National Spokesperson – Growing Bihar ने कहा:

“जब जनता टैक्स देती है और बदले में उसे पानी तक खरीदना पड़े, तो यह लोकतंत्र की सफलता नहीं बल्कि चेतावनी है। असली आज़ादी वही है जहाँ जीवन की मूल आवश्यकताएँ अधिकार हों, व्यापार नहीं।”

देशहित में Dinesh Kumar द्वारा निम्न राष्ट्रीय मांगें रखी जाती हैं:

स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल को तुरंत मौलिक अधिकार घोषित किया जाए।

हर नागरिक के लिए न्यूनतम मुफ्त पेयजल की राष्ट्रीय गारंटी लागू की जाए।

वीआईपी संस्कृति, अनावश्यक सरकारी सुविधाओं एवं राजनीतिक विलासिता पर होने वाले खर्च की राष्ट्रीय समीक्षा की जाए।

जनता से प्राप्त टैक्स के प्रत्येक रुपये का सार्वजनिक एवं पारदर्शी सामाजिक ऑडिट अनिवार्य किया जाए।

Growing Bihar का स्पष्ट मत है कि विकास के बड़े दावे तब तक अधूरे हैं जब तक देश का अंतिम नागरिक सम्मानपूर्वक जीने की बुनियादी सुविधा प्राप्त न कर ले।

राष्ट्र के नाम संदेश —

“147 करोड़ लोगों का टैक्स, 147 करोड़ लोगों का अधिकार।”“पानी जीवन है — इसे बाज़ार की वस्तु नहीं बनने दिया जाएगा।”“जनता की जरूरत पहले, सत्ता की सुविधा बाद में।”

Growing Bihar इस मुद्दे को राष्ट्रीय जनआंदोलन का रूप देने के लिए देशभर में जागरूकता अभियान प्रारंभ करेगा।

— Dinesh Kumar, AdvocateNational Spokesperson, Growing Bihar

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button