पब्लिक सेक्टर बैंकों में PLI योजना पर छिड़ा विवाद, कर्मचारियों और अधिकारियों ने मिलकर जताया कड़ा विरोध!

_रमेश ठाकुर__

रामनगर नरकटियागंज,_प०चंपारण(बिहार)_संशोधित परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) फार्मूले को लेकर बैंकिंग सेक्टर में विवाद गहराता जा रहा है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) द्वारा शुरू किए गए विरोध आंदोलन को देशभर में कर्मचारियों और अधिकारियों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।
UFBU के महासचिव रूपम राय ने कहा कि संशोधित PLI फार्मूले को एकतरफा लागू करने के खिलाफ बैंक कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। शाखाओं से लेकर प्रशासनिक कार्यालयों तक, कर्मचारियों ने स्वतःस्फूर्त रूप से आंदोलन में भाग लिया, जो उनके बीच एकजुटता और इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि यह विरोध केवल प्रोत्साहन राशि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कार्यबल की एकता, निष्पक्षता और स्थापित सेवा शर्तों की रक्षा से जुड़ा हुआ है। UFBU के अनुसार, वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा प्रस्तावित नया PLI फार्मूला मौजूदा द्विपक्षीय समझौते से हटकर है और इससे अधिकारियों के बीच असमानता बढ़ेगी।
संघ का आरोप है कि संशोधित फार्मूला स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों को अलग श्रेणी में रखकर कार्यबल में विभाजन पैदा करता है। इससे टीमवर्क प्रभावित होगा और औद्योगिक संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
UFBU ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला पहले से ही मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के समक्ष सुलह प्रक्रिया में है। 9 मार्च 2026 को हुई सुलह बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी और आगे समाधान वार्ता के माध्यम से निकाले जाने पर सहमति बनी थी। इसके बावजूद एकतरफा निर्णय लेना संघ के अनुसार औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 33 का उल्लंघन है।
संघ ने मुख्य श्रम आयुक्त से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि सुलह प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की एकतरफा कार्रवाई औद्योगिक शांति के लिए खतरा है। UFBU ने वित्तीय सेवा विभाग (DFS), भारतीय बैंक संघ (IBA) और सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रबंधन से अपील की है कि वे इस मुद्दे पर संवाद के जरिए समाधान निकालें और सभी एकतरफा कदमों को तुरंत रोकें।
UFBU ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही संतोषजनक समाधान नहीं निकाला गया, तो बैंकिंग सेक्टर में औद्योगिक अशांति बढ़ सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित पक्षों की होगी।

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