कानपुर में लेम्बोर्गिनी से 6 लोगों को घायल करने का मामला : पैसे के बल पर नहीं बचा करोड़पति का बेटा, गिरफ्तार

 

सुनील बाजपेई
कानपुर। माना जाता है कि इस कलयुग में पैसा ही सब कुछ है और उसके बल पर कोई भी कुछ भी कर सकता है, लेकिन कानपुर में ऐसा नहीं हुआ। मतलब
अरबपति का पैसा कम नहीं आया और 5 करोड़ से ज्यादा कीमत वाली लेम्बोर्गिनी कार से टक्कर मारकर आधा दर्जन लोगों को घायल करने उसके बेटे को आज गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया।
डीसीपी अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि लेम्बोर्गिनी केस में आरोपी शिवम मिश्रा को आज गुरुवार सुबह घर के सामने से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि उसे सूचना मिली थी कि आरोपी शिवम मिश्रा एंबुलेंस से भाग रहा है। लेकिन इसके पहले ही उसेगिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक अरबपति शिवम पर जांच में सहयोग न करने और लगातार खुद को छिपाए रखने के आधार पर गिरफ्तार किया गया।
अपनी गिरफ्तारी के दौरान हाथ में वीगो लगाए शिवम बीमार भी नजर आया। इस बीच पुलिसवाले और रिश्तेदार उसे सहारा देते भी नजर आए। उसके साथ दिल्ली के एक फैमिली डॉक्टर लगे रहे। मेडिकल कराने के बाद पुलिस उसे ए जे सी एम कोर्ट लेकर पहुंचीं।
घटना के बारे में यह भी बतातेचलें कि अरबपतियों में सुमार तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा ने अपने इकलौते बेटे शिवम को बचाने की तमाम कोशिशें कीं, लेकिन सफल नहीं हो पाए।
घटनाक्रम के मुताबिक बीती 8 फरवरी को हादसे के तुरंत बाद पहले घटनास्थल से बेटे को हटवाया था। साथ ही मीडिया से बातचीत में बेटे शिवम द्वारा गाड़ी नहीं चलाने काभी दावा किया था। तुल पकड़ने पर सीएम योगी आदित्य नाथ ने भी अफसरों को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जिसके बाद कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर ने भी कहा था कि गाड़ी कारोबारी का बेटा शिवम ही चला रहा था। जांच में इसकी पुष्टि हुई। कमिश्नर के इस बयान पर कारोबारी भड़क भी गए थे और उन्हें झूठा बता दिया था। यही नहीं अरबपति शिवम को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए जो रणनीति बना गई थी उसके तहत ही कल बुधवार को कानपुर कोर्ट में मोहन नाम का शख्स सरेंडर करने पहुंचा था। उसने दावा किया कि था कि हादसे के वक्त लेम्बोर्गिनी कार वह खुद यानी मोहन चला रहा था। लेकिन कोर्ट ने आरोपी नहीं मानते हुए ड्राइवर मोहन की अर्जी खारिज कर दी थी। फिलहाल अरबपति कारोबारी और पुलिस के बीच का यह मामला अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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