महंगाई पर अंकुश लगाने में सरकार नाकाम

-तेल संकट से यातायात प्रभावित

हरप्रीत भट्टी

नई दिल्ली। देश में महंगाई दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। लोगबाग आपस में चर्चा करते हैं कि महंगाई चरम पर पहुंच गई है। सबके अपने-अपने तर्क होते हैं। कहने को तो कह देते हैं कि अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध से उत्पन्न तेल संकट के कारण हर चीज के दामों इजाफा मजबूरी हो गई है। पिछले सप्ताह तो हद ही हो गई। एक के बाद एक महंगाई का बम फूटा। रसोई में दूध से लेकर सड़क पर वाहन चलाना तक महंगा हो गया। यानी महंगाई बढ़ाने वाला सप्ताह कहा जाएगा। पहले सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया गया, तो इसके तुरन्त बाद देश में पेटोल-डीजल की कीमतें बढ़ा दी गईं, यही नहीं सीएनजी की कीमतों में इजाफा किया गया। बात यही नहीं रुकी, दूध कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमत बढ़ा दीं। दूध के दाम बढ़े कि ब्रेड कंपनियां भी अपने उत्पादों के दाम में बढ़ोतरी कर दीं।
गौरतलब है कि जब पेटोल-डीजल की कीमत बढ़ेगी तो स्वाभाविक है कि इसका प्रभाव यातायात पर पड़ेगा। सामानों को एक जगह से दूसरी जगह लाने-ले जाने में खर्च मंे बढ़ोतरी होगी। यातायात खर्च बढ़ेगा तो स्वाभाविक है कि सामानों के दाम बढ़ेंगे। सवाल यह है कि जिस अनुपात में दामों में इजाफा होता है क्या उपभोक्ताओं को उसी अनुपात में सामानों का मूल्य अदा करना होता है। उत्तर है नहीं। क्योंकि आम उपभोक्ता को इस घुड़पेंच की जानकारी ही नहीं होती है।
देश में हर क्षेत्र में मनमानी है। सरकार महंगाई पर पाबंदी लगाने के पक्ष में ही नहीं है। भ्रष्टाचार ऐसे ही चरम पर है। धनलोलुपता और झूठी मान-सम्मान में हकीकत से दूर भागते हैं। आम लोगों के दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दाम रोज बढ़ जाते हैं। क्यों बढ़ जाते हैं, इसका जबाव किसी के पास नहीं होता है। लोग मजबूरी में जीवन-यापन के सामान खरीदते हैं। केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद सामानों के दामों बढ़ोतरी अक्सर होते ही रहते हैं। लोगों में इस सरकार से महंगाई पर लगाम की उम्मीद नहीं रह गई है। भ्रष्टाचार की वजह से सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में बगैर रिश्वत के कोई काम नहीं होते हैं। सरकार की तरफ से कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई अभियान चलाया गया हो, सुनने में नहीं आया।
हमाम में सभी नंगे हैं, यह सब जान गए हैं इसलिए अब तो लोग टिका-टिप्पणी भी नहीं करते हैं। सभी निन्यान्नवे के चक्कर में तीन-तेरह करने में मशगुल हैं। खाद्य सामानों के अतिरिक्त सब्जियां, दवाई, प्रसाधन, इलाज आदि में दिन-प्रतिदिन वृद्धि ने लोगों की कमर को तोड़ कर रख दिया है। देश में रोजी-रोजगार की घोर कमी है। बेरोजगारों की विशाल फौज बेबस है। महंगाई से जंग कैसे की जाए, यक्ष प्रश्न बन गया है।

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