छत्तीसगढ़ की कवयित्री अहिल्या नायक से राजीव कुमार झा की बातचीत…
साहित्य लेखन: छत्तीसगढ़
प्रश्न:आप क्या करती हैं?
उत्तर: मैं छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में बसना ब्लाक के मेढापली गांव में सहायक शिक्षिका के तौर पर सरकारी स्कूल में नौकरी करती हूं।
प्रश्न: अपने प्रिय लेखक के तौर किसका नाम लेना चाहेंगी?
उत्तर:सुभद्राकुमारी चौहान मेरी पसंदीदा कवयित्री हैं ।
प्रश्न: छत्तीसगढ़ के बारे में बताइए?
उत्तर:छत्तीसगढ़ में मै जात्मई, घटारानी ,तालागांव, चैतुरगढ़ , रतनपुर , बागबाहरा की चंडी मंदिर , सिंघाड़ा की घंटेश्वरी मंदिर के अलावा यहां के और भी कई जगहों पर भी पूजा पाठ करने और घूमने गयी हूं।
मेरे मां – पापा मूंगफली, उड़द और मूंग की खेती करते हैं।
प्रश्न:अपने वर्तमान परिवार के बारे में बताएं।
उत्तर:मैंने हिंदी और संस्कृत में रविशंकर यूनिवर्सिटी से एम. ए. किया है।
मेरे पति कृष्ण कुमार नायक हैं।
वह पेशे से लेक्चरर हैं।
मेरा बेटा डॉ ऋतिकनायक
एमबीबीएस है।
बेटी डॉ प्रणति नायक भी
एमबीबीएस है।
प्रश्न: अपनी किसी कविता को प्रस्तुत करें।
उत्तर: यहां अपनी एक कविता मैं प्रस्तुत कर रही हूं जिसमें अपने गांव के बारे में मैंने लिखा है!
गांव की याद
मेरी आंखों के सपनों में,
मेरा बचपन मुझे बुलाता है।
मेरे गांव की याद ही मुझे,
अनमोल एहसास दे जाती है,
बिछिया गांव नाम से ही,
अंदर से प्यार उमड़ता है।
यहां के गली मोहल्लों में,
कूचे और गलियारों में,
अपनापन बरसता है।
भागदौड़ और नीरसता में,
गलाकाट प्रतिस्पर्धा में,
यहां का शांत पर्यावरण ही
सुकुन मुझे पहुंचता है।
मेरे गांव का याद ही मुझे, अनमोल एहसास दे जाता है।
पीपल की छांव हो या,
आम की अमराई,
डोंगरी का मेला हो या,
चल रही पुरवाई।
सरसों की पीली – पीली खेती,
गेहूं की हरी बाली,
धान की झुकी डालियों से,
वातावरण पूरी आच्छादित।
मेरे गांव के ये नजारे ,
नैना को सुख पहुंचाते हैं
बसना ब्लॉक में मेरे गांव को,
सब आयुर्वेद ग्राम कहते है!
-अहिल्या नायक
मैं अपने गांव में सिर्फ स्कूल तक ही पढ़ाई कर पाई और फिर कालेज की पढ़ाई करने गांव से पन्द्रह किलोमीटर दूर सरायगढ़ के देवेंद्र बहादुर कालेज में पढ़ने जाती थी। संस्कृत में एम.ए.के पाठ्यक्रम में कालिदास के अभिज्ञानशाकुन्तलम और भारवि के कीरातार्जुनियम ग्रंथ को पढ़ने का मौका मुझे मिला।



