मुंगेर के कवि गौतम कुमार से राजीव कुमार झा की बातचीत…

साहित्य:साक्षात्कार

प्रश्न: आपका साहित्य लेखन से लगाव है। साहित्य सृजन के साथ किसी लेखक का क्या दायित्व होता है?

उत्तर: साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है,बल्कि समाज को दिशा देने का साधन भी है। एक लेखक का दायित्व होता है कि वह सत्य, नैतिकता, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक मूल्यों को अपनी रचनाओं में स्थान देकर समाज की समस्याओं,विसंगतियों और अच्छाइयों को निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत करें। जिससे बेहतर समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण किया सके। साथ ही एक लेखक को पाठकों में सकारात्मक सोच, जागरूकता और मानवीयता का विकास करने का प्रयास भी करना चाहिए। इसके अलावा यदि किसी राष्ट्र का सत्तारूढ दल तानाशाही रूप अपनाता है तो उसे अपनी लेख के माध्यम से आईना दिखाते हुए देश युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना का विकास हेतु अपनी प्रेरणादायी रचनाओं के माध्यम से उसे प्रेरित करना चाहिए। यही एक लेखक का दायित्व होता है।

प्रश्न: अपने प्रिय लेखकों के बारे में जानकारी दीजिए।

उत्तर : मेरे प्रिय लेखक मनोज ठाकुर हैं। जो एक क्षेत्रीय रचनाकार है। एक क्षेत्रीय रचनाकार होने के बावजूद उन्होंने अपनी साहित्यिक प्रतिभा से पाठकों और श्रोताओं के बीच विशेष पहचान बनाई है। उनकी रचनाएँ मुझे निरंतर पढ़ने, सोचने और लिखने की प्रेरणा देती हैं।
मैं कक्षा 12वीं में था तब वे हमारे क्षेत्र के बापू स्मारक पुस्तकालय में आकर हम छात्रों के बीच अपनी कविताओं का वाचन करते थे जिससे बहुत कुछ सीखने को मिलता था। उनकी रचनाओं ने मेरी जिज्ञासा को बढ़ाया तथा हिंदी साहित्य के प्रति मेरा विशेष लगाव उत्पन्न किया। उनकी लेखनी सरल, प्रभावशाली और समाजोपयोगी है। उनकी प्रसिद्ध रचना दहेज प्रथा सामाजिक कुरीतियों पर तीखा प्रहार करती है और समाज को जागरूक करने का संदेश देती है।

प्रश्न: अपने घर-परिवार, माता-पिता और शिक्षा के बारे में बताइए।*

उत्तर : मेरा नाम गौतम कुमार कुशवाहा है। मेरा जन्म वर्ष 1994 में बिहार राज्य के मुंगेर जिले के बरीचक गाँव में हुआ। मेरे पिता का नाम महेश्वर मंडल जो पेशे से ग्रामीण चिकित्सक हैं तथा माता का नाम उमा देवी है जो गृहिणी है । मेरा परिवार शिक्षा और संस्कारों को विशेष महत्व देता है। मैंने अपनी प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा बिहार में प्राप्त की तथा तकनीकी शिक्षा झारखंड से प्राप्त किया है। वर्तमान में मैं एक निजी शिक्षक एवं साहित्य लेखन से जुड़ा हुआ हूँ और बी. एड. द्वितीय वर्ष का छात्र हूं । शिक्षण और लेखन दोनों मेरे जीवन के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।

प्रश्न: आप मुंगेर के निवासी हैं। यह ऐतिहासिक शहर है। यहाँ के समाज, संस्कृति, परिवेश और विरासत के बारे में जानकारी दीजिए।

उत्तर : मुंगेर बिहार का एक अत्यंत प्राचीन, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगर है। प्राचीन काल में पाल वंश के संस्थापक गोपाल ने अपनी राजधानी मुंगेर बनाया था। मुंगेर का ऐतिहासिक किला तथा राजा कर्ण से जुड़ी परंपराएँ इसकी गौरवशाली विरासत की साक्षी हैं।
मुंगेर विश्वविख्यात योग नगरी के रूप में भी प्रसिद्ध है। यहाँ स्थित बिहार स्कूल ऑफ योग ने योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। यह संस्थान देश-विदेश के साधकों को आकर्षित करता है। यहां स्थित बिहार पुलिस ट्रेनिंग सेंटर और आर.डी. एंड डीजे कॉलेज अपनी कठोर अनुशासन के लिए प्रसिद्ध है।
धार्मिक दृष्टि से मुंगेर का विशेष महत्व है। यहाँ स्थित सीता कुंड एक प्रसिद्ध गर्म जलस्रोत है, जिसके बारे में मान्यता है कि माता सीता ने अग्निपरीक्षा के उपरांत यहाँ स्नान किया था। इसके समीप रामकुंड, लक्ष्मणकुंड, भरतकुंड आदि भी स्थित हैं। यह स्थान आज भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है।
इसी प्रकार ऋषि कुंड अपनी प्राकृतिक गर्म जलधारा तथा धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। माना जाता है कि प्राचीन काल में अनेक ऋषि-मुनियों ने यहाँ तपस्या की थी।
यहां का भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य प्राकृतिक सौंदर्य,गर्म जलस्रोतों और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। महाभारत की लोक कथा के अनुसार इसका संबंध भीम से माना जाता है। घने जंगलों, पहाड़ियों और गर्म जलकुंडों के कारण यह बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। अतिरिक्त माँ चंडिका स्थान तथा बड़ी दुर्गा स्थान सनातन आस्था के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। मुंगेर की सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने में यहाँ के कलाकारों का भी योगदान रहा है। मुंगेर के सुपुत्र हीरो राजन कुमार अपने अभिनय कौशल के कारण देश-विदेश में चर्चित हैं। इन्हें चार्ली चैपलिन 2 के अभिनय के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मनित गया है।
मुंगेर का मछली तालाब, गंगा तट, मुंगेर किला के अंदर स्थित पोलो मैदान, कष्टहरनी घाट तथा प्राकृतिक परिवेश इसकी सुंदरता को बढ़ाते हैं। मुंगेर जिले के अंतर्गत स्थित जमालपुर मैं एशिया का सबसे पहला रेल कारखाना स्थापित हुआ जो मेरे ग्राम से मात्र सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वर्तमान में इस कारखाने में ही रेलवे ड्राइवर का प्रशिक्षण केंद्र स्थापित हुआ है। जिसके कारण मुंगेर को एक नई पहचान मिली है।

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