फरीदाबाद की कवयित्री श्रीमती रिया अग्रवाल से राजीव कुमार झा की बातचीत…
साहित्य : साक्षात्कार
प्रश्न 1: आपकी कविताओं में ज्यादातर महिलाओं के जीवन से जुड़े मौजूदा समाज के ज्वलंत मुद्दों का समावेश हुआ है। इसके बारे में क्या कहना चाहेंगी?
उत्तर: स्त्रियों की दशा आज भी हमारे देश में बहुत अच्छी नहीं है। खासकर छोटे शहरों और गांवों में। समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से ही मैंने कई रचनाएं लिखीं।
प्रश्न 2: आप फरीदाबाद की निवासी हैं। इस शहर के सामाजिक-सांस्कृतिक माहौल के बारे में बताइए?
उत्तर: फरीदाबाद एक बहुत पुराना शहर है और दिल्ली से जुड़ा हुआ है। यहां पारंपरिक विचारधारा और आधुनिकीकरण का मिला जुला प्रभाव है। यहां लोग ज़मीन से जुड़े हुए हैं और प्रोग्रेसिव सोच रखते हैं।
प्रश्न 3: कविता लेखन की ओर आपका झुकाव कैसे क़ायम हुआ। अपने बचपन, माता-पिता और शिक्षा-दीक्षा के बारे में जानकारी दीजिए।
उत्तर: बचपन से लिखने में रुचि थी। लेकिन तब बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया। मेरा जन्म दिल्ली में हुआ और शिक्षा भी वहीं से पूरी की। मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी.कॉम (दौलत राम कॉलेज) की, फिर बीएड किया। मैंने पीजीडीबीए फाइनेंस में, एम.ए. इकोनॉमिक्स और एम.कॉम किया हुआ है। पिछले कई वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय हूं और सकारात्मक लेखन ही मेरा ध्येय है।
प्रश्न 4: क्या आपका कोई कविता संग्रह भी प्रकाशित हुआ है? इसके बारे में जानकारी दीजिए।
उत्तर: जी हां, मेरा काव्य संग्रह “मैं वही बदलाव हूं” प्रकाशित हो चुका है। मेरे 100 से ज्यादा साझा काव्य संग्रह में सह-लेखिका के रूप में कार्य प्रकाशित हो चुका है।
*प्रश्न 5: आपकी कविताएं सोशल मीडिया के माध्यम से भी सामने आती रही हैं। साहित्य और सोशल मीडिया के इस संबंधों को किस तरह से देखना पसंद करेंगी?
उत्तर: आज के परिप्रेक्ष्य में सोशल मीडिया बहुत अहम भूमिका निभा रहा है। सोशल मीडिया के कारण लेखकों और पाठकों को एक साझा प्लेटफार्म मिल गया है, जिससे वे सीधे तौर पर जुड़ गए हैं। यह बदलाव निश्चित ही बहुत सुखदायक है। लेखक सीधे पाठक से जुड़ने के कारण उनकी प्रतिक्रिया आसानी से समझ सकता है।
*प्रश्न 6: यहां अपनी कोई कविता प्रस्तुत कीजिए।
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उत्तर: जी ज़रूर। एक ग़ज़ल प्रस्तुत करती हूं.. गौर फरमाइए
ग़ज़ल
दिया जो बुझा है जला कर तो देखो
उदासी का आलम मिटा कर तो देखो
मिलेगा तुम्हें भी किनारा नदी का
ज़रा अपनी कश्ती चला कर तो देखो
न यूँ ख़ुद से रूठो न यूँ ख़ुद को परखो
कभी आईने को हँसा कर तो देखो
ये दुनिया तो यूँ ही तमाशा करेगी
तुम अपना तमाशा बना कर तो देखो
सफ़र में रिया अब अंधेरा बहुत है
तुम आँखों में जुगनू सजा कर तो देखो
प्रश्न 7: कविता लेखन और सामाजिक कार्यों के लिए आपको अनेकों पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इन उपलब्धियों के बारे में क्या कहना चाहेंगी?
उत्तर: जी ये सब ईश्वर की अनुकम्पा है। मैं सिर्फ अपना कार्य ईमानदारी से करने की कोशिश करती हूं और जब पुरस्कार मिलता है तो निश्चित ही वह एक ईंधन का काम करता है जो निरंतर अच्छा काम करने के लिए प्रेरित करता है। जब मुझे 2024 में रेडियो 90.8 FM की ओर से मोस्ट इंस्पायरिंग विमेन इन लिटरेचर का अवॉर्ड मिला था, वह मेरे लिए बहुत खुशी का पल था। आज आपके प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने पाठकों का तहे दिल से आभार प्रकट करना चाहती हूं जो उन्होंने मुझे इतना प्रेम दिया।
प्रश्न 8: नयी पीढ़ी की लड़कियों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
उत्तर: नयी पीढ़ी की लड़कियों को ये संदेश देना चाहूंगी कि बढ़े चलो और अपने आप को भूलो मत क्योंकि जीवन चलने का नाम है। अक्सर स्त्रियां जीवन के चक्रव्यूह में फंस कर अपनी पहचान ही भूल जाती हैं। जिम्मेदारियां ज़रूरी हैं लेकिन वो खुद को भी ना भूलें। अपने शौक को जरूर आगे बढ़ाएं और समाज में एक सकारात्मक योगदान अवश्य दें, भले ही वह छोटा सा ही क्यों ना हो।
साक्षात्कारकर्ता: राजीव कुमार झा
स्थान: इंदुपुर, बड़हिया, लखीसराय, बिहार



