नागपुर के लेखक डॉ. बालकृष्ण महाजन से राजीव कुमार झा की बातचीत…

साहित्य: साक्षात्कार

 

 

प्रश्न 1: आपसे सबसे पहले साहित्य लेखन की शुरुआत के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहता हूँ। अपने माता-पिता, घर-परिवार और बाल्यावस्था के बारे में बताइए।
उत्तर: साहित्य लेखन की शुरुआत मेरे बचपन से ही हो गई थी। मैं छोटी-छोटी कविताएँ और कहानियाँ लिखा करता था। आकाशवाणी नागपुर से मेरी कविताएँ और लघु नाटक प्रसारित भी हुए हैं।
परिवार में माता-पिता, चार भाई और एक बड़ी बहन हैं। पिताजी हायर मैट्रिक थे और मुझे लेखन के लिए सदैव प्रोत्साहित करते थे। माताजी चौथी पास थीं, लेकिन मुझे आगे बढ़ाने में उनका योगदान अत्यंत मूल्यवान रहा है।

प्रश्न 2: आपका बाल साहित्य लेखन के प्रति विशेष झुकाव है। बालकों के लिए रचित अपनी पुस्तक के बारे में बताइए।
उत्तर: बाल साहित्य में मेरी रुचि बचपन से ही रही है। आकाशवाणी के लिए मैंने अनेक बालगीत लिखे हैं। बालकों के लिए मेरी प्रकाशित पुस्तक “कहावतों की कहानियाँ” है, जिसे बच्चों और शिक्षकों ने खूब सराहा है।

प्रश्न 3: समाज में बालकों के लिए निरंतर अच्छे साहित्य सृजन क्यों जरूरी है? आजकल इस तरफ लेखकों का ज्यादा ध्यान क्यों नहीं है?
उत्तर: बच्चों का भविष्य अच्छे संस्कारों और साहित्य से ही बनता है। आजकल मोबाइल का चलन बच्चों में बहुत बढ़ गया है। बचपन में ही उनके हाथ में मोबाइल पकड़ा दिया जाता है, जिससे पढ़ने की आदत कम हो रही है। फिर भी कुछ समर्पित साहित्यकार आज भी बाल साहित्य सृजन में लगे हुए हैं और यह प्रयास निरंतर जारी रहना चाहिए।

प्रश्न 4: आप समाजसेवी भी हैं और रक्तदान के लिए सदैव समाज को प्रेरित करते रहे हैं। रक्तदान के महत्व के बारे में बताइए।
उत्तर: मैंने एनसी में 18 वर्ष की आयु में पहली बार रक्तदान किया था। उसके बाद से निरंतर रक्तदान करते हुए अब तक मैं 100 बार रक्तदान कर चुका हूँ। अब तक लगभग 5000 लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित भी किया है। रक्तदान महादान है। इससे न केवल किसी की जान बचती है, बल्कि दाता को भी स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

प्रश्न 5: आपने नुक्कड़ नाटक लेखन भी किया है। अपने नुक्कड़ नाटकों में आपने किन विषयों को मुद्दे के रूप में उठाया है?
उत्तर: अब तक मैंने लगभग 200 नुक्कड़ नाटकों का लेखन किया है। मेरी 4 पुस्तकें प्रकाशित हैं, जिनमें से 2 नुक्कड़ नाटक संग्रहों “आओ मिलकर भारत जोड़ें” और “आओ अपना देश संवारें” को महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई द्वारा क्रमशः ₹25,000 और ₹35,000 के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
मेरे नुक्कड़ नाटकों का विषय सदैव समसामयिक समस्याएँ रही हैं – जैसे स्वच्छता, नशा मुक्ति, महिला सशक्तिकरण, राष्ट्रीय एकता और पर्यावरण।

प्रश्न 6: नुक्कड़ नाटक आंदोलन आज समाज में कमजोर क्यों पड़ता जा रहा है?
उत्तर: नुक्कड़ नाटक सीधे जनता के मन को प्रभावित करते हैं। लेकिन आज इसके लिए समर्पित कलाकारों और मंच की कमी है। साथ ही इसके प्रसारण की अवधि और अवसर कम होने के कारण यह आंदोलन अपेक्षाकृत कमजोर पड़ा है। इसे पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।

प्रश्न 7: आपको साहित्य लेखन के लिए अनेक महत्वपूर्ण सम्मानों से विभूषित किया गया है। इनमें महाराष्ट्र शासन और सरकार द्वारा प्रदान किए गए पुरस्कारों के बारे में बताइए। लेखक के रूप में सम्मान प्राप्त करके कैसा महसूस करते हैं?
उत्तर: आज तक मुझे साहित्य और रक्तदान के क्षेत्र में अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा मुझे विष्णुदास भावे पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सिंगापुर में हिंदी अकादमी, मुंबई द्वारा “आंतरराष्ट्रीय गौरव भूषण पुरस्कार” और नेपाल में “साहित्य भूषण पुरस्कार” प्राप्त हुए हैं। इस वर्ष भी मैंने कुछ पुस्तकें पुरस्कार हेतु भेजी हैं। सम्मान मिलने पर लगता है कि समाज ने हमारे कार्य को सराहा है और इससे आगे और बेहतर लिखने की प्रेरणा मिलती है।

प्रश्न 8: साहित्य लेखन के लिए पुरस्कार-सम्मान क्यों जरूरी हैं?
उत्तर: पुरस्कार और सम्मान लेखक का मनोबल बढ़ाते हैं। इनसे हमें अपनी रचनाओं का स्तर समझ में आता है और समाज में साहित्य के प्रति रुचि भी बढ़ती है। पुरस्कार एक प्रेरणा हैं जो हमें और अधिक सृजन के लिए प्रेरित करते हैं।

प्रश्न 9: नागपुर के साहित्यिक परिवेश और हिंदी के प्रति इस नगर के योगदान के बारे में संक्षेप में जानकारी दीजिए।
उत्तर: नागपुर हिंदी का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ मोर हिंदी भवन में हिंदी का बहुत अच्छा माहौल है। नागपुर में साहित्यिक गतिविधियाँ निरंतर चलती रहती हैं और यहाँ लेखकों के बीच स्वस्थ स्पर्धात्मक वातावरण है, जिससे हिंदी निरंतर समृद्ध हो रही है।

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