मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की युवा कवयित्री नीतू नागर “अंबर” से राजीव कुमार झा की बातचीत…

साहित्य : साक्षात्कार

 

प्रश्न 1: आप राजगढ़ के लश्करपुर गांव की हैं। अपने गांव, जिला और अंचल के लोगों और यहां के परिवेश के बारे में जानकारी दीजिए।
उत्तर: मेरा गांव मेरा हृदय प्रदेश की शान “मिनी मालवा” के नाम से सुप्रसिद्ध है। जिला अपनी अनूठी भौगोलिक स्थिति, राजपूती और भील संस्कृति के मिश्रण और अपनी खास मालवी बोली के लिए जाना जाता है। ऐतिहासिक और धार्मिक माहौल: इस क्षेत्र पर कभी उमठ राजपूतों और भील राजाओं का शासन रहा था, जिसे ‘उमठवाड़ा’ भी कहा जाता था। नरसिंहगढ़ का किला, जिसे “कश्मीर-ए-मालवा” कहा जाता है, यहाँ की प्राकृतिक और ऐतिहासिक सुंदरता का प्रतीक है। धार्मिक स्थलों में मां जालपा देवी मंदिर जो पहाड़ी पर स्थित है और खोयरी महादेव मंदिर यहाँ की आस्था के मुख्य केंद्र हैं। हमारे यहां मौसम हमेशा मनमोहक सा रहता है।

प्रश्न 2: आप पर्यावरण और महिला सुरक्षा इन सब मुद्दों को लेकर भी काम करती रही हैं। इनके बारे में बताएं।
उत्तर: मैंने राजगढ़ जिले, मध्यप्रदेश की महिलाओं के लिए “नारी शक्ति संगठन राजगढ़ मध्यप्रदेश” एनजीओ की स्थापना की। इसमें महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और जागरूकता के लिए कार्य किए जाते हैं। उनको सरकारी योजनाओं की सही जानकारी प्रदान की जाती है और महिलाओं को हर कदम पर मदद की जाती है। जैसे बुजुर्ग महिला, गर्भवती महिलाओं को साथ जोड़कर सहभागिता और सम्मान सुनिश्चित किया जाता है। आगे भी ऐसे ही प्रगति करते रहेंगे।

प्रश्न 3: आपने कविता लेखन से सबका ध्यान अपनी तरफ आकृष्ट किया है। इसके बारे में जानकारी दीजिए।
उत्तर: यदि आपकी लेखनी सत्य और लोगों के दर्द से एकदम एकरूप होती है तो लोग आपकी तरफ आकर्षित होते हैं। बकायदे आप वो लिखो जो सबने महसूस किया हो। मेरी ज्यादातर कविता, कहानी, ब्लॉग सब वास्तविकता और यथार्थवाद पर आधारित होते हैं, जो पाठकों को एक सही अनुभूति महसूस करवाता है।

प्रश्न 4: अपने प्रिय कवियों और लेखकों के बारे में बताइए।
उत्तर: मेरे प्रिय कवि तुलसीदास जी, कबीर दास जी महाराज हैं। ओशो रजनीश, सुकरात, प्लेटो जैसे चिंतकों का गहरा प्रभाव मेरी लेखनी पर रहा है क्योंकि मैं यूपीएससी परीक्षा की तैयारी में संलग्न हूं। इनको पढ़कर खुद को बुनती चली गई। वर्तमान में मेरे मित्र प्रशांत सोऊ लेखक, रूपाली गर्ग जो लेखिका हैं, इन जैसे लोगों से सीखती रहती हूं।

प्रश्न 5: वर्तमान में आप क्या कर रही हैं?
उत्तर: भारत के हृदय मध्यप्रदेश के जिला राजगढ़ के गांव लश्करपुर से उभरता चेहरा, मेरा नाम नीतू नागर “अंबर” है। मैं लेखन की कला और साहित्य में अपने विचारों से चमकती हुई लेखिका और कवयित्री हूं। वर्तमान में यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रही हूं। बीएससी फाइनल के बाद मास्टर ऑफ सोशल वर्क की पढ़ाई के लिए भी प्रयास किया। मैंने “महिला सशक्तिकरण हेल्पर समूह” बनाया और 1500 महिला और लड़कियों को उससे जोड़कर मदद पहुंचाई। अपने फ्री समय में बच्चों को नि:शुल्क कोचिंग देती हूं। छात्र होते हुए यूपीएससी मेंटर की भूमिका नि:शुल्क निभाई। प्रकृति एनजीओ से जुड़कर पर्यावरण के लिए कार्य करती हूं और गांव में गरीब लोगों को नि:शुल्क सहायता करती हूं। मैं ब्लॉग लिखती हूं और एक छोटी मोटिवेशनल स्पीकर भी हूं। साथियों की पढ़ाई और डिप्रेशन जैसी समस्याओं में राहत का काम करती हूं। मैं “नारी शक्ति संगठन राजगढ़ मध्यप्रदेश” NGO की संस्थापिका हूं और दूसरा NGO “चाइल्ड एजुकेशन एनजीओ” भी चलाती हूं।

प्रश्न 6: अपने घर परिवार और माता-पिता शिक्षा-दीक्षा के बारे में जानकारी दीजिए।
उत्तर: मेरे घर से जो शिक्षा-दीक्षा मिली वो मेरे संस्कारों में प्रतिलक्षित होती है। मेरी माताश्री ने हमेशा मुझे मर्यादा का पाठ पढ़ाया। वहीं पिता ने बाइक चलाने से लेकर एनजीओ चलाने तक का रास्ता दिखाया। इसलिए घर में ही सब कुछ मिला, जो लेखनी में देखा जा सकता है।

प्रश्न 7: आपके युवा हृदय को समाज में लोगों की किन बातों से नफ़रत है?
उत्तर: समाज में लोगों में बढ़ती गरीबी, देश की शिक्षा व्यवस्था, भ्रष्टाचार, बलात्कार, पर्यावरण का विनाश, दहेज प्रथा से होने वाली मौत जैसी घटनाओं से मेरा हृदय बहुत दुखता है।

प्रश्न 8: अपनी कोई कविता प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: जी ज़रूर

कविता: “अंतर्मन”
खोज तेरी पूरी होगी,
तू खुद को देख अंतर्मन में…!
हैं सारे सवाल के जवाब,
तेरे ही मन के अंतर्चित्त में।

जब जाये तू खोज सफ़र में,
समझ पायेगा मंजिल को
क्योंकि सफ़र ही मंजिल है,
तू खोज जायेगा अपने मन को।

होगी बौछार उस नीर की,
जो लहरों से खींचा आया है।
इन लहरों में डुबा स्वयं को,
शून्य तल पा जायेगा।

वो नियत नीति तेरी सदा,
भावों से भरकर आयेंगी।
क्योंकि तू अपने मन में,
खोज लिया अंतर्मन में।

माध्यम मार्ग हो तेरा जीवन,
संतुलन से चला जा।
हो विजय विचारों की तेरी,
बस सकारात्मकता सोचें जा।

खोज तेरी पूरी होगी, तू खुद को देख अंतर्मन में…

साक्षात्कारकर्ता: राजीव कुमार झा
स्थान: इंदुपुर, बड़हिया, लखीसराय, बिहार

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