नयी दिल्ली के हैबिटेट सेंटर में शारदा सिन्हा का गायन।

यादों के आईने में: कलाकार संस्मरण

 

राजीव कुमार झा

शारदा सिन्हा से मेरा परिचय सहरसा में शिवेन्द्र देव जो वहां के नामी वकील थे उनके माध्यम से हुआ था। शिवेंद्र देव जाड़े के मौसम में सुबह अपने घर के बाहर फुलवाड़ी के पास शारदा जी के बेटी विवाह के गीत बजाया करते थे और इन गीतों को सहरसा स्टेडियम में आयोजित शारदा सिन्हा के कार्यक्रम में उन्होंने रिकॉर्ड किया था। हमलोग शिवेन्द्र देव के यहां किराएदार के रूप में उनके एक फ्लैट में रहते थे और बगल में तुंगनाथ सिंह भी रहते थे। जो यहां गांव में आज भी मेरे पड़ोसी हैं। शिवेंद्र देव जहां बैठकर शारदा सिन्हा के गीतों को सुना करते थे वहीं पर मेरे पिता सुबह में अंग्रेजी पढ़ाया करते थे। शारदा सिन्हा को मंच पर गीत गाते मैंने नयी दिल्ली के हैबिटेट सेंटर में सुना था और उस दिन वहां स्टेज पर विवाह मंडप भी बनाया गया था। हैबिटेट सेंटर से उन दिनों मुझे वहां आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में शरीक होने के ई – इन्विटेशन रोज मिलते थे और दिनभर भारतीय ज्ञानपीठ में पुस्तकों के प्रकाशन के काम को निबटाने के बाद प्रायः वहां के कार्यक्रमों में शामिल होना मेरी दिनचर्या सी हो गयी थी। मैंने 2011-12 के आसपास सैकड़ों लेखकों,कवियों और कलाकारों के कार्यक्रम यहां अटेंड किए । यहां प्रभाकर श्रोत्रिय रस्किन बांड, गुलजार को भी मैंने सुना। हैबिटेट सेंटर से रात में आठ – नौ बजे आडिटोरियम से निकलने के बाद मैं रात में कोटला में ढाबा पर भोजन करने के बाद रमणिका गुप्ता के फ्लैट में जाकर सो जाता था। यहां मेरे सोने रहने का इंतजाम रमणिका गुप्ता ने किया था। रमणिका गुप्ता के इस फ्लैट में दो और लोग भी रहते थे और इनमें राकेश के अलावा पेंटर भी थे जो एक आदिवासी कलाकार थे और पत्नी के साथ वहां रहते थे। झारखंड के नेता रामदयाल मुंडा के एनजीओ में पहले पेंटर काम करते थे लेकिन कांग्रेस की सरकार के पतन के बाद मुंडा साहब के एनजीओ को अनुदान मिलना बंद हो गया था। उस दिन शारदा सिन्हा ने अपने लोकगीतों को खूब मन से गाया और इसके पहले उनका उतनी ही गर्मजोशी से स्वागत भी किया गया था।
शारदा सिन्हा जी को मेरी श्रद्धांजलि!

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