साधारण मनुष्य के जीवन में काम, रिश्ते, जिम्मेदारियां, संघर्ष इत्यादि शामिल हैं : महंत जगन्नाथ
सती अनुसूया जयंती पर हुआ सत्संग
अश्विनी वालिया
कुरुक्षेत्र, 17 अप्रैल : अखिल भारतीय श्री मारकंडेश्वर जनसेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत जगन्नाथ पुरी एवं अन्य संतों की प्रेरणा से वीरवार को सती अनुसूया जयंती मनाई गई। इस कार्यक्रम में काफी संख्या में श्रद्धालु भी शामिल हुए। महंत जगन्नाथ पुरी ने कहा कि सती अनुसूया जयंती मनाई जा रही है। मां अनुसूया के पतिव्रत धर्म के आगे सभी देवता गण भी नतमस्तक होते हैं। सती अनुसूया तप, त्याग और पतिव्रता धर्म की मूर्ति थी। वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सती अनुसूया जयंती मनाई जाती है। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि सती अनुसूया ने नारी धर्म की ऐसी पराकाष्ठा को सिद्ध किया, जिसे आज तक कोई लांघ नहीं सका है। महंत जगन्नाथ पुरी ने सत्संग में कर्मयोग पर चर्चा करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन में हर दिन हम कुछ न कुछ करते हैं। साधारण मनुष्य के जीवन में काम, रिश्ते, जिम्मेदारियां, संघर्ष इत्यादि काफी कुछ शामिल है। लेकिन क्या कभी सोचा है कि कर्म ही साधना बन सकता है। उन्होंने बताया कि कर्मयोग श्रीमद्भागवत गीता का वह दिव्य सिद्धांत है। भगवान ने भी कहा है कि तुम कर्म करो लेकिन फल की चिंता मत करो। महंत जगन्नाथ पुरी ने कहा कि यह ज्ञान केवल अर्जुन के लिए नहीं था। बल्कि मानव समाज के उन सभी लोगों के लिए है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में खुद को खो देते हैं और फिर खुद को ही खोजने निकलते हैं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर स्वामी पृथ्वी पुरी, स्वामी संतोषानंद, गोकुल दास, आकाश पुरी, बिल्लू पुजारी इत्यादि भी मौजूद रहे।


