सुरसा बन चुकी जनसंख्या – सीमित भूमि और संसाधनों पर घातक बोझ

 राष्ट्रीय चेतावनी राष्ट्रिय जनशक्ति सेवा संघ (RJSS) भारत की भूमि और संसाधन सीमित हैं। लेकिन जनसंख्या जिस रफ्तार से “सुरसा के मुख” की तरह बढ़ रही है, वह आने वाले समय में भारत को भीषण संकट की ओर धकेल रही है।
यही कारण है कि कई स्थानों पर दुर्गा पूजा, दीपावली, होली जैसे त्यौहारों पर विरोध खड़ा हो रहा है।
कश्मीर की त्रासदी, केरल का असंतुलन और बांग्लादेश की भयावह स्थिति हमारे लिए चेतावनी हैं।
बेरोज़गारी, गरीबी, अपराध और सांस्कृतिक असुरक्षा – सबकी जड़ यही अनियंत्रित जनसंख्या है।

यदि इस पर अब भी अंकुश नहीं लगाया गया तो—
भारत के नागरिक अपनी ज़मीन, रोज़गार और संस्कृति – तीनों से हाथ धो बैठेंगे।

सामाजिक और धार्मिक टकराव और तेज़ होंगे।

सीमित संसाधनों की लड़ाई पूरे राष्ट्र को गृहयुद्ध जैसी स्थिति तक ले जा सकती है। इसलिए RJSS का स्पष्ट और अंतिम मत है:

“जनसंख्या नियंत्रण अब विकल्प नहीं, यह राष्ट्र की रक्षा और अस्तित्व का प्रश्न है।”

हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि तत्काल एक कड़ा, सख़्त और समान रूप से लागू होने वाला जनसंख्या नियंत्रण कानून लाया जाए।

टैक्सपेयर और राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने वालों को प्राथमिकता दी जाए।

हर नागरिक को अपनी संस्कृति, परंपरा और त्योहार बिना डर के मनाने का अधिकार सुनिश्चित किया जाए।

दिनेश कुमार, एडवोकेट एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता
राष्ट्रिय जनशक्ति सेवा संघ (RJSS)

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