बिहार में विधानसभा का मौजूदा चुनाव और प्रशासन की भूमिका

लोकतंत्र और जनादेश:

 

राजीव कुमार झा

बिहार में चुनाव संहिता लागू होने से पहले राज्य में नीतीश कुमार की सत्तासीन सरकार के द्वारा सरकारी खजाने से दिल खोलकर समाज के तमाम तबकों के लोगों की खुशी से खूब धन लुटाया गया और सचमुच ऐसा लगता है कि यहां नीतीश कुमार की सरकार से किसी का कोई विरोध नहीं है। विधानसभा के आसन्न चुनावों में मौजूदा सरकार को काफी बड़ी तादाद में वृद्ध, महिलाओं और युवाओं के वोटों के अलावा गरीब लोगों के वोट मिलने के प्रबल आसार से यहां विपक्षी पार्टियों के हौसले पस्त नजर आ रहे हैं। विपक्षी दलों में राजद को सबसे प्रमुख माना जाता है और उसके नेतृत्व में यहां कांग्रेस, वामपंथी दल और अन्य पार्टियों के नेता अपने सामाजिक सरोकारों के अनुरूप उल्टी – सीधी बयानबाजी में शामिल दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस और राजद का शासन आम तौर पर बिहार में जाति और संप्रदाय की पतनशील सोच और चिंतन की राजनीति पर आधारित माना जाता है और इसी क्रम में नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति को इस वर्चस्ववादी सामाजिक संस्कृति से मुक्त करवाने का श्रेय भी दिया जाता है। जाति और धर्म से जुड़े हमारे पूर्वाग्रहों से बिहार में अनर्थ कायम होता रहा। पहले जब राजतंत्र था तो राजा सैनिक शक्ति से अपनी सरकार चलाते थे और आज के दौर में लोकतंत्र के नाम पर जाति – धर्म के सहारे बहुसंख्यक समुदाय के लोगों से समर्थन प्राप्त करके सरकार बनाने और चलाने की प्रवृत्ति सर्वत्र जोर पकड़ती चली जा रही है। नीतीश कुमार को ऐसी ही विकट परिस्थितियों में बिहार में फिर से जनादेश प्राप्त करके अपनी सरकार को गठित करने की काफी बड़ी चुनौती से वर्तमान विधानसभा चुनावों में गुजरना होगा। बिहार का मौजूदा प्रशासन इन्हीं परिस्थितियों में
वोटिंग को ज्यादा से ज्यादा व्यापक बनाने की कवायद में भी जुटा दिखाई दे रहा है और यहां मतदाता सूची से काफी मतदाताओं के फर्जी नाम भी हटाए गये हैं। निष्पक्ष चुनाव के लिए बिहार में अर्द्ध सैनिक बलों की
टुकड़ियों का पहुंचना भी शुरू हो गया है। यहां असामाजिक तत्वों पर समुचित निगरानी भी की जा रही है लेकिन इसमें सबसे जरूरी है कि राज्य की प्रशासनिक मशीनरी वोट पाने के लिए जनता को भ्रमित करने वाले तत्वों पर कड़ी नजर कायम करे और बिहार में मौजूदा विधानसभा चुनावों को लोकतांत्रिक आदर्शों के अनुरूप संपन्न कराने की अपनी प्रतिबद्धता को वह मूर्त रूप प्रदान करे।

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