कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में नकल कराने वाले गैंग का बेगूसराय के अमित जायसवाल गिरफ्तार

फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर दिलाई जा रही थी परीक्षा

 

नन्दकिशोर दास

बेगूसराय ब्यूरो। कर्मचारी चयन आयोग की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल सीजीएल 2025 परीक्षा में धांधली कराने वाले साल्वर गैंग का यूपी एसटीएफ ने भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह के 11 सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में बेगूसराय के मुंगेरीगंज निवासी अमित कुमार उर्फ अमित जायसवाल का नाम भी शामिल है। अमित जायसवाल वर्तमान में दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट के पद पर कार्यरत है। इससे पहले वह लंबे समय तक बेगूसराय में डाटा एंट्री ऑपरेटर के तौर पर काम कर चुका है। सूत्रों के मुताबिक, अमित की गिनती बेगूसराय के कुछ बड़े प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं के करीबी लोगों में होती थी।एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि यह गैंग परीक्षार्थियों से साठगांठ कर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाकर आवेदन कराता था और फिर साल्वरों के जरिए उनकी जगह परीक्षा दिलवाई जाती थी। आरोप है कि अमित जायसवाल खुद भी इसी गिरोह के लिए साल्वर की भूमिका निभाता था और एक परीक्षा देने के एवज में उसे प्रति घंटे 10 हजार रुपये मिलते थे। एसटीएफ ने आरोपियों के पास से 16 फर्जी पीएच मेडिकल सर्टिफिकेट, 13 मोबाइल फोन, कई आधार और पैन कार्ड, साथ ही करीब 14.75 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं। गिरोह अभ्यर्थियों से नकल कराने के नाम पर एक से दो लाख रुपये तक वसूलता था। अब एसटीएफ यह जांच कर रही है कि फर्जी अपंगता प्रमाणपत्र जारी करने में सरकारी अस्पतालों की भी कोई मिलीभगत तो नहीं थी। पूछताछ के आधार पर इस धांधली में शामिल एजेंसियों और अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है। गौरतलब है कि कर्मचारी चयन आयोग देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक है, जिसमें हर साल करोड़ों परीक्षार्थी शामिल होते हैं। यही वजह है कि माफिया अक्सर इस परीक्षा को अपना निशाना बनाते रहे हैं। बीते वर्षों में बिहार, यूपी और दिल्ली से कई ऐसे गिरोह पकड़े जा चुके हैं। एक बार फिर यह मामला सामने आने के बाद परीक्षा की पारदर्शिता और लाखों युवाओं के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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