पंजाब विधानसभा की बड़ी भूल
सीएम मान समेत 78 एमएल, अकाल तख्त में पेश
भारत पोस्ट संवाददाता
अमृतसर। पंजाब विधानसभा की 117 सीटों में से सिख समुदाय के सभी 78 सदस्य जिनमें मुख्यमंत्री भगवंत मान, उनके सिख कैबिनेट सहयोगी और स्पीकर कुलतार सिंह संधवान शामिल हैं। सोमवार को अमृतसर में सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त के सामने पेश हुए। यह मामला दो महीने पहले उनके द्वारा पारित किए गए एक कानून से जुड़ा था। बैठक के अंत तक उपस्थित विधायकों ने सिख भावनाओं के अनुरूप कानून में संशोधन करने पर सहमति व्यक्त की, जबकि अकाल तख्त ने पंजाब सरकार को आपत्तियों की औपचारिक सूची पर कार्रवाई करने के लिए एक महीने का समय दिया था। यहां बताया गया है कि यह कानून क्या कहता है, सिख धर्मगुरुओं के साथ विवाद का मुद्दा क्यों बनाए और जब मामला अकाल तख्त तक पहुंचा तो क्या निर्णय लिया गया।
अकाल तख्त कोई सरकारी संस्था नहीं है, बल्कि सिख धर्म में सबसे बड़ी धार्मिक सत्ता है। यह अमृतसर में स्वर्ण मंदिर परिसर के अंदर स्थित है। इसके प्रमुख जत्थेदार होते हैं। अभी ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज कार्यवाहक जत्थेदार हैं जो चार अन्य वरिष्ठ धर्मगुरुओं, जिन्हें श्पंज सिंह साहिबान कहा जाता है, के साथ मिलकर किसी भी सिख को बुला सकते हैं और धार्मिक आदेश जारी कर सकते हैं जो मानना ज़रूरी होता है। जो सिख ऐसे आदेश को नहीं मानता, उसे तनखैया धार्मिक नियम तोड़ने का दोषी घोषित किया जा सकता है। ताज़ा विवाद जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन एक्ट- 2026 से जुड़ा है। यह एक्ट 2008 के उस मूल कानून में संशोधन करता है जो सिखों के सबसे पवित्र ग्रंथ, गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
इससे पहले, बेअदबी के लिए सख़्त सज़ा का प्रावधान करने की कोशिशें 2015 में एसडीए-बीजेपी सरकार और 2018 में कांग्रेस सरकार द्वारा केंद्र सरकार ने लौटा दी थीं। केंद्र का तर्क था कि राष्ट्रीय आपराधिक कानून में संशोधन किसी एक धर्म के ग्रंथ को विशेष रूप से लक्षित नहीं कर सकता। आप सरकार ने पंजाब प्रिवेंशन ऑफ़ ऑफेंसेज अगेंस्ट होली स्क्रिप्चर्स बिल-2025 भी पेश किया था, जिसे एक सेलेक्ट कमेटी को भेजा गया था, लेकिन बाद में 2026 के एक्ट ने इसकी जगह ले ली।



